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UP: 'मैंने सिर्फ नाम देखा, रोल नंबर नहीं, वो दूसरी', UPSC में 113वीं रैंक का दावा करने वाली शिखा की कहानी पलटी
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: Sharukh Khan
Updated Thu, 12 Mar 2026 02:18 PM IST
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सार
बुलंदशहर के भूड़ इलाके की अंबेडकर कॉलोनी निवासी शिखा गौतम द्वारा आईएएस बनने का किया गया दावा जांच में झूठा पाया गया है। युवती ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में 113वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था, जिसके बाद इलाके में जश्न भी मनाया गया था।
shikha upsc rank
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बुलंदशहर की एक युवती शिखा परीक्षा में 113वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था, लेकिन बाद में यह स्पष्ट हो गया कि यह दावा गलत था। उत्साह में, शिखा ने परिणाम सूची में केवल अपना नाम देखा और रोल नंबर की जांच नहीं की, जिसके कारण यह भ्रम उत्पन्न हुआ।
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असली अभ्यर्थी के सामने आने से खुला मामला
पूरा मामला तब सामने आया जब दिल्ली की एक अन्य अभ्यर्थी, जिसका नाम भी शिखा है और उसका रोल नंबर सूची में दर्ज था, वह सामने आई। दिल्ली की शिखा वर्तमान में रोहतक में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) के पद पर कार्यरत हैं। असली अभ्यर्थी के सामने आने के बाद बुलंदशहर की शिखा का दावा बेबुनियाद साबित हुआ।
पूरा मामला तब सामने आया जब दिल्ली की एक अन्य अभ्यर्थी, जिसका नाम भी शिखा है और उसका रोल नंबर सूची में दर्ज था, वह सामने आई। दिल्ली की शिखा वर्तमान में रोहतक में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) के पद पर कार्यरत हैं। असली अभ्यर्थी के सामने आने के बाद बुलंदशहर की शिखा का दावा बेबुनियाद साबित हुआ।
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भूल स्वीकारने के बाद मामले का पटाक्षेप
इस पूरे घटनाक्रम के बाद, बुलंदशहर की शिखा और उनके परिवार ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार कर ली है। उन्होंने माना कि उत्साह में उन्होंने परिणाम सूची को ठीक से नहीं देखा और केवल अपना नाम देखकर ही संतुष्ट हो गए। रोल नंबर की जांच न करने के कारण यह भ्रम पैदा हुआ।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद, बुलंदशहर की शिखा और उनके परिवार ने सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार कर ली है। उन्होंने माना कि उत्साह में उन्होंने परिणाम सूची को ठीक से नहीं देखा और केवल अपना नाम देखकर ही संतुष्ट हो गए। रोल नंबर की जांच न करने के कारण यह भ्रम पैदा हुआ।
सोशल मीडिया पर बनी रही चर्चा
यह मामला पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ था। लोगों में इस बात को लेकर उत्सुकता थी कि क्या वास्तव में बुलंदशहर की शिखा ने इतनी अच्छी रैंक हासिल की है। असली अभ्यर्थी के सामने आने और बुलंदशहर की शिखा द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने के बाद, इस विवाद पर अब विराम लग गया है।
यह मामला पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ था। लोगों में इस बात को लेकर उत्सुकता थी कि क्या वास्तव में बुलंदशहर की शिखा ने इतनी अच्छी रैंक हासिल की है। असली अभ्यर्थी के सामने आने और बुलंदशहर की शिखा द्वारा अपनी गलती स्वीकार करने के बाद, इस विवाद पर अब विराम लग गया है।
परीक्षा परिणामों के सत्यापन का महत्व
यह घटना परीक्षा परिणामों के सत्यापन के महत्व को रेखांकित करती है। किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले, विशेष रूप से प्रतिष्ठित परीक्षाओं के परिणामों के मामले में, सभी विवरणों की सावधानीपूर्वक जांच करना अत्यंत आवश्यक है। रोल नंबर, नाम और अन्य व्यक्तिगत विवरणों का मिलान यह सुनिश्चित करता है कि कोई भ्रम या गलत सूचना न फैले।
यह घटना परीक्षा परिणामों के सत्यापन के महत्व को रेखांकित करती है। किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले, विशेष रूप से प्रतिष्ठित परीक्षाओं के परिणामों के मामले में, सभी विवरणों की सावधानीपूर्वक जांच करना अत्यंत आवश्यक है। रोल नंबर, नाम और अन्य व्यक्तिगत विवरणों का मिलान यह सुनिश्चित करता है कि कोई भ्रम या गलत सूचना न फैले।
बुलंदशहर की शिखा का आएएएस बनने का दावा गलत
आपको बता दें कि बुलंदशहर के भूड़ इलाके की अंबेडकर कॉलोनी निवासी शिखा गौतम द्वारा आईएएस बनने का किया गया दावा जांच में झूठा पाया गया है। युवती ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में 113वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था, जिसके बाद इलाके में जश्न भी मनाया गया था।
आपको बता दें कि बुलंदशहर के भूड़ इलाके की अंबेडकर कॉलोनी निवासी शिखा गौतम द्वारा आईएएस बनने का किया गया दावा जांच में झूठा पाया गया है। युवती ने यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन की परीक्षा में 113वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था, जिसके बाद इलाके में जश्न भी मनाया गया था।
बड़ी बात यह है कि मेन्स भी पास नहीं कर पाई थीं। हरियाणा की शिखा का मामला सही पाए जाने पर मायूसी हाथ लगी है। बताया जा रहा है कि युवती ने अपना नाम शिखा बताते हुए आईएएस बनने की बात कही थी। लेकिन बाद में हरियाणा की शिखा गौतम द्वारा वास्तविक अभ्यर्थी होने का दावा सामने आने के बाद प्रशासन ने अपने स्तर से भी मामले की जांच कराई गई।
उच्च अधिकारियों के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने जब दस्तावेजों की जांच की तो पता चला कि दावा करने वाली युवती का नाम दस्तावेजों में शिखा रानी है और वह यूपीएससी की मुख्य परीक्षा (मेन्स) ही पास नहीं कर सकी थी। ऐसे में उसका इंटरव्यू के लिए चयन भी नहीं हुआ था।
सदर तहसील के एक अधिकारी ने नाम न छापने पर बताया कि जांच के दौरान युवती और उसके परिजनों ने अधिकारियों के सामने अपनी गलती स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि जानकारी थी कि चयन नहीं हुआ है, लेकिन लोगों के सम्मान के आगे वह कुछ बोल नहीं पाईं।
फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद से युवती के परिजन घर में ही बंद हैं और किसी का फोन भी नहीं उठा रहे हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। सच्चाई सामने आने पर परिजनों और मिलने वालों को मायूसी हाथ लगी है।