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Deoria News: भटनी की डलिया-टोकरी की विदेशों में धूम
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 24 Jan 2026 12:16 AM IST
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भटनी। मूंज और खर से बने पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों की मांग अब देश की सीमाओं को पार कर विदेशों तक पहुंच गई है। क्षेत्र के बेहराडाबर गांव में आजीविका मिशन से जुड़ीं महिलाएं मूंज और खर से डलिया और टोकरी सहित अन्य घरेलू उपयोग के सामान तैयार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। बेहराडाबर गांव की यह पहल न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही है, बल्कि पारंपरिक हस्तकला को नई पहचान दिलाने के साथ ही क्षेत्र का नाम भी देश-विदेश में रोशन कर रही है। अभी हाल ही में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किरन शर्मा व उनकी टीम को बेहतर प्रयास के लिए सम्मानित किया था।
ग्रामीण महिलाओं के हाथ से तैयार किए जा रहे इन उत्पादों की मजबूती, आकर्षक बनावट और पारंपरिक कारीगरी को बाजार में खासा पसंद किया जा रहा है।
आजीविका मिशन के सहयोग से इन उत्पादों की बिक्री विभिन्न मेलों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन माध्यमों से की जा रही है, जिससे महिलाओं की आमदनी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
इस पहल को मजबूती देने में मिशन टीम की सदस्य किरन शर्मा की अहम भूमिका है। वह देश के विभिन्न शहरों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मूंज और खर से टिकाऊ, उपयोगी और आकर्षक सामान बनाने के साथ ही उनकी बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं।
गांव की बुच्ची देवी, सुभावती, दुर्गावती, मनसा, सीमा, सोनमती, सुनीता, सैदुल निशा सविता यादव आदि ने बताया कि योजना से उन्हें घर बैठे रोजगार मिला है। परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
पहले जहां यह काम सीमित दायरे में था, वहीं अब उनके बनाए उत्पाद विदेशों तक भेजे जा रहे हैं, जिससे उन्हें आत्मविश्वास के साथ पहचान भी मिल रही है।
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ग्रामीण महिलाओं के हाथ से तैयार किए जा रहे इन उत्पादों की मजबूती, आकर्षक बनावट और पारंपरिक कारीगरी को बाजार में खासा पसंद किया जा रहा है।
आजीविका मिशन के सहयोग से इन उत्पादों की बिक्री विभिन्न मेलों, प्रदर्शनियों और ऑनलाइन माध्यमों से की जा रही है, जिससे महिलाओं की आमदनी में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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इस पहल को मजबूती देने में मिशन टीम की सदस्य किरन शर्मा की अहम भूमिका है। वह देश के विभिन्न शहरों में जाकर महिलाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को मूंज और खर से टिकाऊ, उपयोगी और आकर्षक सामान बनाने के साथ ही उनकी बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं।
गांव की बुच्ची देवी, सुभावती, दुर्गावती, मनसा, सीमा, सोनमती, सुनीता, सैदुल निशा सविता यादव आदि ने बताया कि योजना से उन्हें घर बैठे रोजगार मिला है। परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है।
पहले जहां यह काम सीमित दायरे में था, वहीं अब उनके बनाए उत्पाद विदेशों तक भेजे जा रहे हैं, जिससे उन्हें आत्मविश्वास के साथ पहचान भी मिल रही है।
