{"_id":"69c02bd91a79622c760360e4","slug":"kajal-became-self-reliant-by-making-herbal-incense-sticks-along-with-her-studies-gonda-news-c-100-1-gon1001-154698-2026-03-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gonda News: पढ़ाई के साथ हर्बल धूपबत्ती बनाकर आत्मनिर्भर बनीं काजल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gonda News: पढ़ाई के साथ हर्बल धूपबत्ती बनाकर आत्मनिर्भर बनीं काजल
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 22 Mar 2026 11:20 PM IST
विज्ञापन
काजल और उनके द्वारा बनाई गई धूपबत्ती। स्रोत: स्वयं
विज्ञापन
गोंडा। पड़रीकृपाल के गिलौली गांव की छात्रा काजल पढ़ाई के साथ-साथ घर में ही हर्बल धूपबत्ती बनाकर सफलता की मिसाल पेश कर रही हैं। खास बात यह है कि काजल बेकार पड़े फूलों का उपयोग कर पर्यावरण के अनुकूल धूपबत्ती तैयार कर रही हैं, जिससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ रही है बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक संदेश मिल रहा है।
स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहीं काजल ने बताया आत्मनिर्भर बनने की सोच ने उन्हें कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। इसी दौरान उन्होंने सुभागपुर स्थित प्रशिक्षण केंद्र से छह माह का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद घर में ही धूपबत्ती बनाने की शुरुआत कर दी।
इस तरह शुरू हुआ सफर
एक दिन पूजा करने के दौरान धूपबत्ती जलाते समय काजल के मन में खुद धूपबत्ती बनाने का विचार आया। इसके बाद पहले इंटरनेट व यू ट्यूब से जानकारी जुटाई और फिर प्रशिक्षण लेकर काम शुरू किया। काजल मंदिरों में एकत्र फूल लाकर सुखाती हैं और उसमें कपूर, लोहबान व अन्य प्राकृतिक तत्व मिलाकर हर्बल धूपबत्ती तैयार करती हैं। काजल की धूपबत्ती गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या और बस्ती में सप्लाई हो रही हैं। सालाना टर्नओवर करीब ढाई लाख रुपये है।
Trending Videos
स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई की तैयारी कर रहीं काजल ने बताया आत्मनिर्भर बनने की सोच ने उन्हें कुछ नया करने के लिए प्रेरित किया। इसी दौरान उन्होंने सुभागपुर स्थित प्रशिक्षण केंद्र से छह माह का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद घर में ही धूपबत्ती बनाने की शुरुआत कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस तरह शुरू हुआ सफर
एक दिन पूजा करने के दौरान धूपबत्ती जलाते समय काजल के मन में खुद धूपबत्ती बनाने का विचार आया। इसके बाद पहले इंटरनेट व यू ट्यूब से जानकारी जुटाई और फिर प्रशिक्षण लेकर काम शुरू किया। काजल मंदिरों में एकत्र फूल लाकर सुखाती हैं और उसमें कपूर, लोहबान व अन्य प्राकृतिक तत्व मिलाकर हर्बल धूपबत्ती तैयार करती हैं। काजल की धूपबत्ती गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या और बस्ती में सप्लाई हो रही हैं। सालाना टर्नओवर करीब ढाई लाख रुपये है।

काजल और उनके द्वारा बनाई गई धूपबत्ती। स्रोत: स्वयं