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Gonda News: पत्नी बोली-छिन गया सहारा, अब किसके सहारे जिंदा रहूंगी
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Fri, 10 Apr 2026 11:24 PM IST
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गोंडा। नगर कोतवाली के पथवलिया निवासी पत्रकार रंजीत तिवारी की करंट की चपेट में आने से हुई दर्दनाक मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। रंजीत की मां सरोज देवी और पत्नी पूजा के विलाप ने हर किसी की आंखों को नम कर दिया। बेटे के शव से लिपटकर मां सरोज देवी बेसुध हो जा रही थीं। रोते-रोते कई बार बेहोश हुईं पत्नी पूजा हर आने-जाने वाले से बस एक ही सवाल दोहरा रही थी कि मेरा सहारा छिन गया। अब किसके सहारे जी पाऊंगी?
रंजीत तिवारी पिछले 10 वर्षों से अपने घर की छत से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से एक बड़े हादसे के डर में जी रहे थे। दुर्भाग्यवश, इतने वर्षों की अथक कोशिशों के बावजूद, अधिकारियों ने इस मामले को कभी गंभीरता से नहीं लिया। विद्युत विभाग के अधिकारी या तो लाइन हटाने के लिए एस्टीमेट बनाने की बात करते रहे या फिर पैसों की मांग करते रहे। सामाजिक कार्याें में भी वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। वह घर के सामने स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की भी चिंता करते रहे। बार-बार लाइन हटाना का अनुरोध किया। स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि रंजीत स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की चिंता करते थे। ऐसे में मौत के बाद शिक्षक भी रो पड़े। स्कूल में भी छुट्टी कर दी गई।
पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग
रंजीत तिवारी की मृत्यु पर स्थानीय लोगों, पत्रकारों, अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने गहरा शोक जताया है। रेड क्रॉस सोसाइटी की ओर से पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद पहुंचाई गई है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दीनानाथ त्रिपाठी की अगुवाई में अधिवक्ताओं ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार से पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।
मासूम बेटे ने पिता को दी मुखाग्नि
माधवपुर चकत्ता में टेढ़ी नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। चार के साल के मासूम बेटे आर्यन ने पिता रंजीत को मुखाग्नि दी। मासूम बेटे को चिता में आग लगाते देख मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।
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रंजीत तिवारी पिछले 10 वर्षों से अपने घर की छत से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से एक बड़े हादसे के डर में जी रहे थे। दुर्भाग्यवश, इतने वर्षों की अथक कोशिशों के बावजूद, अधिकारियों ने इस मामले को कभी गंभीरता से नहीं लिया। विद्युत विभाग के अधिकारी या तो लाइन हटाने के लिए एस्टीमेट बनाने की बात करते रहे या फिर पैसों की मांग करते रहे। सामाजिक कार्याें में भी वह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। वह घर के सामने स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की भी चिंता करते रहे। बार-बार लाइन हटाना का अनुरोध किया। स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि रंजीत स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की चिंता करते थे। ऐसे में मौत के बाद शिक्षक भी रो पड़े। स्कूल में भी छुट्टी कर दी गई।
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पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग
रंजीत तिवारी की मृत्यु पर स्थानीय लोगों, पत्रकारों, अधिकारियों और अधिवक्ताओं ने गहरा शोक जताया है। रेड क्रॉस सोसाइटी की ओर से पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद पहुंचाई गई है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दीनानाथ त्रिपाठी की अगुवाई में अधिवक्ताओं ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार से पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है।
मासूम बेटे ने पिता को दी मुखाग्नि
माधवपुर चकत्ता में टेढ़ी नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। चार के साल के मासूम बेटे आर्यन ने पिता रंजीत को मुखाग्नि दी। मासूम बेटे को चिता में आग लगाते देख मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।