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Hardoi News: ई-रिक्शों के तय नहीं हो पाए मार्ग, जाम की समस्या से नहीं मिली निजात
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फोटो-12- ई- रिक्शा पर कुछ इस तरह सवारियां लेकर जाता चालक। संवाद
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हरदोई। शहरवासियों को जाम से निजात दिलाने के लिए ई-रिक्शों के रूट निर्धारण की योजना पूरी तरह बेपटरी हो गई है। प्रशासन और परिवहन विभाग ने एक जनवरी से नए नियम लागू करने का दावा तो किया था लेकिन तीन माह बीत जाने के बाद भी सड़कों पर ई-रिक्शा चालकों की अराजकता है। न तो रूट तय हुए और न ही ई-रिक्शा चालकों ने विभाग के निर्देशों को गंभीरता से लिया।
शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के उद्देश्य से ई-रिक्शों को रूटों में बांटने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत परिवहन विभाग ने शहर में 10 रूट चिह्नित किए और चालकों को आवंटित रूट पर ही चलने के निर्देश दिए गए। इसके लिए चालकों को अपने ई-रिक्शों पर कलर कोडिंग व क्यूआर कोड लगवाना अनिवार्य था लेकिन विभागीय सुस्ती और चालकों की मनमानी के चलते यह कवायद सिर्फ कागजों तक ही सिमट रह गई।
ई-रिक्शाें को निर्धारित रूटों पर एक जनवरी से चलना था, हैरानी की बात यह है कि परिवहन विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक न तो पंजीकरण के लिए पहुंचे और न ही क्यूआर कोड लेने में रुचि दिखाई। बिना किसी नियम और रूट के सड़कों पर बेतरतीब दौड़ते ई-रिक्शे आए दिन जाम की बड़ी वजह बन रहे हैं। मुख्य बाजारों और चौराहों पर ई-रिक्शों की अवैध पार्किंग से निकलना तक दूभर हो गया है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे हैं।
नियमों की उड़ रही धज्जियां
शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा चालकों की मनमानी का आलम यह है कि यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। मुख्य मार्गों पर कहीं भी, कभी भी ई-रिक्शा रोक दिए जाने से जाम आम बात हो गई है। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में तो तेज धूप में लगने वाले जाम से लोगों को और अधिक परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं।
व्यवस्था पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर रखी गई थी लेकिन कोई चालक आया ही नहीं। जल्द ही अभियान चलाकर ई-रिक्शा चालकों की धरपकड़ की जाएगी। शहर में जाम से निपटने के लिए रूट निर्धारण आवश्यक है। -अरविंद कुमार सिंह, एआरटीओ
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शहर में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के उद्देश्य से ई-रिक्शों को रूटों में बांटने की योजना बनाई गई थी। इसके तहत परिवहन विभाग ने शहर में 10 रूट चिह्नित किए और चालकों को आवंटित रूट पर ही चलने के निर्देश दिए गए। इसके लिए चालकों को अपने ई-रिक्शों पर कलर कोडिंग व क्यूआर कोड लगवाना अनिवार्य था लेकिन विभागीय सुस्ती और चालकों की मनमानी के चलते यह कवायद सिर्फ कागजों तक ही सिमट रह गई।
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ई-रिक्शाें को निर्धारित रूटों पर एक जनवरी से चलना था, हैरानी की बात यह है कि परिवहन विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक न तो पंजीकरण के लिए पहुंचे और न ही क्यूआर कोड लेने में रुचि दिखाई। बिना किसी नियम और रूट के सड़कों पर बेतरतीब दौड़ते ई-रिक्शे आए दिन जाम की बड़ी वजह बन रहे हैं। मुख्य बाजारों और चौराहों पर ई-रिक्शों की अवैध पार्किंग से निकलना तक दूभर हो गया है लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे हैं।
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शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा चालकों की मनमानी का आलम यह है कि यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। मुख्य मार्गों पर कहीं भी, कभी भी ई-रिक्शा रोक दिए जाने से जाम आम बात हो गई है। इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। आने वाले दिनों में तो तेज धूप में लगने वाले जाम से लोगों को और अधिक परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं।
व्यवस्था पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर रखी गई थी लेकिन कोई चालक आया ही नहीं। जल्द ही अभियान चलाकर ई-रिक्शा चालकों की धरपकड़ की जाएगी। शहर में जाम से निपटने के लिए रूट निर्धारण आवश्यक है। -अरविंद कुमार सिंह, एआरटीओ