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Hardoi News: मरीजों को सांस देने के लिए बने ऑक्सीजन प्लांट का निकल गया दम, कंसंट्रेटर का सहारा
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फोटो-11- मेडिकल कॉलेज में स्थित ऑक्सीजन प्लांट। संवाद
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज के मरीजों को सांस देने के लिए स्थापित किए गए ऑक्सीजन प्लांट खुद ही दम तोड़ गए हैं। मेडिकल कॉलेज में पीकू वार्ड के पास स्थित ऑक्सीजन प्लांट तकनीकी खराबी से बंद है। मशीनों में प्रेशर न बनने के कारण उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों को कंसंट्रेटर और सिलिंडरों से ऑक्सीजन दी जा रही है।
कोरोना काल के दौरान ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में प्रधानमंत्री कोष और निजी क्षेत्रों के सहयोग से प्लांट लगवाए गए। मेडिकल कॉलेज में चार प्लांटों में से एक प्लांट इमरजेंसी वार्ड के लिए बनवाया गया। 500 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन उत्पादन की क्षमता रखने वाले इस प्लांट से इमरजेंसी के अतिरिक्त आईसीयू और पीकू वार्ड ऑक्सीजन की आपूर्ति की जानी है। यह प्लांट भी आए दिन खराब रहता है। अभी बीती 28 नवंबर को प्लांट सही करवाकर संचालित कराया गया, लेकिन अधिक काम नहीं कर पाया। करीब डेढ़ माह चलने के बाद अब डेढ़ माह से प्लांट फिर बंद है। बताया जा रहा है कि प्लांट के कंप्रेसर में दिक्कत होने के कारण मशीनें पर्याप्त वायु दबाव नहीं बना पा रही हैं। इससे उत्पादन बंद होने से मरीजों को दोबारा पोर्टेबल कंसंट्रेटर और सिलिंडरों से ऑक्सीजन दी जा रही है।
मरीजों पर रोज खर्च हो रहे छह से सात सिलिंडर
ऑक्सीजन प्लांट चलने से मरीजों की निर्भरता कंसंट्रेटर और सिलिंडर पर समाप्त हो गई थी। वहीं, अब दोबारा प्लांट बंद है तो फिर से हर रोज छह से सात सिलिंडर मरीजों पर खर्च हो रहे हैं। हालांकि, सिलिंडरों की आपूर्ति की इमरजेंसी में कोई कमी नहीं है, लेकिन सिलिंडरों को भरवाने में मेडिकल कॉलेज को अतिरिक्त वित्तीय बोझ झेलना पड़ रहा है।
सिलिंडर भरवाने की आड़ में खेल की आशंका
ऑक्सीजन संयंत्र डेढ़ माह से बंद है, इसमें सिलिंडर भरवाने की आड़ में जिम्मेदारों के खेल का अंदेशा साफ नजर आ रहा है। बता दें, कि एक सिलिंडर भरवाने में 400 से 450 रुपये खर्च होते हैं। ऑक्सीजन सिलिंडर निजी स्तर पर भरवाए जाते हैं और हर सप्ताह करीब 40 से 50 सिलिंडर भरकर आते हैं। निजी स्तर पर लाभ पहुंचाने और कमीशन के चलते संयंत्रों के प्रयोग करने के लिए जोर नहीं दिया जा रहा है।
संयंत्र को चालू कराने के लिए कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया जा चुका है। संस्था के इंजीनियरों ने प्लांट की जांच कर ली है और खराब हुए उपकरणों को बदलने की बात कही है। कंपनी के अभियंताओं ने बताया है कि उपकरण आ चुके हैं, जल्द ही काम शुरू करवाकर संयंत्र दोबारा संचालित करा दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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मरीजों पर रोज खर्च हो रहे छह से सात सिलिंडर
ऑक्सीजन प्लांट चलने से मरीजों की निर्भरता कंसंट्रेटर और सिलिंडर पर समाप्त हो गई थी। वहीं, अब दोबारा प्लांट बंद है तो फिर से हर रोज छह से सात सिलिंडर मरीजों पर खर्च हो रहे हैं। हालांकि, सिलिंडरों की आपूर्ति की इमरजेंसी में कोई कमी नहीं है, लेकिन सिलिंडरों को भरवाने में मेडिकल कॉलेज को अतिरिक्त वित्तीय बोझ झेलना पड़ रहा है।
सिलिंडर भरवाने की आड़ में खेल की आशंका
ऑक्सीजन संयंत्र डेढ़ माह से बंद है, इसमें सिलिंडर भरवाने की आड़ में जिम्मेदारों के खेल का अंदेशा साफ नजर आ रहा है। बता दें, कि एक सिलिंडर भरवाने में 400 से 450 रुपये खर्च होते हैं। ऑक्सीजन सिलिंडर निजी स्तर पर भरवाए जाते हैं और हर सप्ताह करीब 40 से 50 सिलिंडर भरकर आते हैं। निजी स्तर पर लाभ पहुंचाने और कमीशन के चलते संयंत्रों के प्रयोग करने के लिए जोर नहीं दिया जा रहा है।
संयंत्र को चालू कराने के लिए कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया जा चुका है। संस्था के इंजीनियरों ने प्लांट की जांच कर ली है और खराब हुए उपकरणों को बदलने की बात कही है। कंपनी के अभियंताओं ने बताया है कि उपकरण आ चुके हैं, जल्द ही काम शुरू करवाकर संयंत्र दोबारा संचालित करा दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज

फोटो-11- मेडिकल कॉलेज में स्थित ऑक्सीजन प्लांट। संवाद