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Jhansi News: एक हफ्ते में ही दोगुने हो गए चिल ब्लेन के मरीज
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पिछले दिनों चली बर्फीली हवा के चलते एक हफ्ते में ही चिल ब्लेन के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। इस बीमारी में हाथ-पैर की उंगलियों में सूजन, छाले के साथ ही मरीज तेज दर्द से कराह उठता है। समय पर इलाज न कराने पर अल्सर यानी घाव तक हो जाता है।
इन दिनों झांसी में भीषण ठंड पड़ रही है। पिछले कुछ दिनों से न्यूनतम तापमान छह से सात डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उन्हें तेज ठंड के बाद जब अचानक से बहुत ज्यादा गर्माहट मिलती है या गर्मी से अचानक तेज ठंड में जाते हैं तो चिल ब्लेन की समस्या हो सकती है। ये समस्या सबसे ज्यादा दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में देखने को मिलती है। क्योंकि इस सीजन में ही सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। एक हफ्ते में रोगियों की संख्या दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई है।
वहीं त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक शिवहरे का कहना है कि अधिक ठंड में ही चिल ब्लेन का असर देखने को मिलता है। ठंड में रक्त गाढ़ा होने से खून का संचार धीमा पड़ जाता है। इससे त्वचा में लालिमा, सूजन से लेकर खुजली और जलन शुरू हो जाती है। इसमें असहनीय दर्द शुरू हो जाता है। बच्चे से बुजुर्ग तक इसकी चपेट में आ रहे हैं। 50 फीसदी मरीजों में ये बीमारी होने का कारण आनुवांशिक होता है। सूजन बहुत अधिक होने से अल्सर यानी घाव हो जाता है। इस बीमारी का इलाज 15 से 20 दिन चलता है। एक हफ्ते पहले जहां प्रतिदिन पांच से छह चिल ब्लेन के मरीज दिखाने आते थे। अब उनकी संख्या बढ़कर 10 से 12 हो गई है।
इन बातों का रखें ध्यान
- ठंड से बचाव करें
- ऊनी दस्ताने पहनें
- घरों में मोजे पहनकर रहें
- हाथ-पैर गीले होने पर पोंछ लें
- सुबह-रात में पानी के इस्तेमाल से बचें
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झांसी। पिछले दिनों चली बर्फीली हवा के चलते एक हफ्ते में ही चिल ब्लेन के मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। इस बीमारी में हाथ-पैर की उंगलियों में सूजन, छाले के साथ ही मरीज तेज दर्द से कराह उठता है। समय पर इलाज न कराने पर अल्सर यानी घाव तक हो जाता है।
इन दिनों झांसी में भीषण ठंड पड़ रही है। पिछले कुछ दिनों से न्यूनतम तापमान छह से सात डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उन्हें तेज ठंड के बाद जब अचानक से बहुत ज्यादा गर्माहट मिलती है या गर्मी से अचानक तेज ठंड में जाते हैं तो चिल ब्लेन की समस्या हो सकती है। ये समस्या सबसे ज्यादा दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में देखने को मिलती है। क्योंकि इस सीजन में ही सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। एक हफ्ते में रोगियों की संख्या दोगुनी से ज्यादा बढ़ गई है।
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वहीं त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक शिवहरे का कहना है कि अधिक ठंड में ही चिल ब्लेन का असर देखने को मिलता है। ठंड में रक्त गाढ़ा होने से खून का संचार धीमा पड़ जाता है। इससे त्वचा में लालिमा, सूजन से लेकर खुजली और जलन शुरू हो जाती है। इसमें असहनीय दर्द शुरू हो जाता है। बच्चे से बुजुर्ग तक इसकी चपेट में आ रहे हैं। 50 फीसदी मरीजों में ये बीमारी होने का कारण आनुवांशिक होता है। सूजन बहुत अधिक होने से अल्सर यानी घाव हो जाता है। इस बीमारी का इलाज 15 से 20 दिन चलता है। एक हफ्ते पहले जहां प्रतिदिन पांच से छह चिल ब्लेन के मरीज दिखाने आते थे। अब उनकी संख्या बढ़कर 10 से 12 हो गई है।
इन बातों का रखें ध्यान
- ठंड से बचाव करें
- ऊनी दस्ताने पहनें
- घरों में मोजे पहनकर रहें
- हाथ-पैर गीले होने पर पोंछ लें
- सुबह-रात में पानी के इस्तेमाल से बचें