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Kannauj News: 18 घंटे के आदेश पर 12 घंटे ही बत्ती
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जलालाबाद। गुगरापुर विद्युत उपकेंद्र से जुड़े 130 गांव इन दिनों अघोषित बिजली कटौती और इमरजेंसी रोस्टिंग का दंश झेल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 18 घंटे आपूर्ति के सरकारी आदेश के बावजूद12 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। सबसे ज्यादा परेशानी रात के समय होने वाली कटौती से हो रही है, जिससे लोगों की नींद और दिनचर्या दोनों प्रभावित हो रही हैं।
भीषण गर्मी और उमस के बीच गुगरापुर बिजलीघर से जुड़े गांवों में बिजली संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात नौ-दस बजे के बाद अचानक आपूर्ति बंद हो जाती है और दो से तीन घंटे बाद बहाल होती है। कई बार आधी रात से लेकर सुबह तक भी बिजली गुल रहती है। ऐसे में लोग घरों से निकलकर खुले स्थानों पर समय बिताने को मजबूर हैं।
ग्रामीण क्षेत्र के फीडरों को 18 घंटे बिजली देने का आदेश है। इसके तहत विभाग सुबह नौ से 12 बजे और शाम चार से सात बजे तक निर्धारित कटौती करता है, लेकिन इसके अतिरिक्त भी दिन और रात में पांच से छह घंटे तक इमरजेंसी रोस्टिंग के नाम पर आपूर्ति बंद कर दी जाती है। इससे उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है।
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बिजली के आने-जाने का तय नहीं समय
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है। कभी रात नौ से 11 बजे तक, कभी 12 से तीन बजे तक और कई बार सुबह पांच बजे तक आपूर्ति बाधित रहती है। उपभोक्ताओं के अनुसार जिले में सबसे अधिक बिजली कटौती गुगरापुर क्षेत्र में की जा रही है। कस्बे निवासी पीयूष दुबे ने कहा कि रात के समय इमरजेंसी रोस्टिंग बंद होनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। गौतम दुबे का कहना है कि गुगरापुर फीडर की बिजली अक्सर बंद रहती है, जबकि पास के अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति जारी रहती है। ब्रजेश दुबे ने कहा कि ऊर्जा राज्यमंत्री का जिला होने के बावजूद ग्रामीणों को अघोषित कटौती झेलनी पड़ रही है। उन्होंने पूरे 18 घंटे निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
वर्जन
ओवरलोड बढ़ने पर कंट्रोल रूम से इमरजेंसी रोस्टिंग के निर्देश मिलते हैं। इसका कोई निर्धारित समय नहीं होता। उन्होंने कहा कि ऐसे समय बिजलीघर की सप्लाई भी प्रभावित रहती है और स्थानीय स्तर से कोई अतिरिक्त कटौती नहीं की जा रही है।
-सुनील सिंह, जेई
भीषण गर्मी और उमस के बीच गुगरापुर बिजलीघर से जुड़े गांवों में बिजली संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात नौ-दस बजे के बाद अचानक आपूर्ति बंद हो जाती है और दो से तीन घंटे बाद बहाल होती है। कई बार आधी रात से लेकर सुबह तक भी बिजली गुल रहती है। ऐसे में लोग घरों से निकलकर खुले स्थानों पर समय बिताने को मजबूर हैं।
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ग्रामीण क्षेत्र के फीडरों को 18 घंटे बिजली देने का आदेश है। इसके तहत विभाग सुबह नौ से 12 बजे और शाम चार से सात बजे तक निर्धारित कटौती करता है, लेकिन इसके अतिरिक्त भी दिन और रात में पांच से छह घंटे तक इमरजेंसी रोस्टिंग के नाम पर आपूर्ति बंद कर दी जाती है। इससे उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है।
बिजली के आने-जाने का तय नहीं समय
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है। कभी रात नौ से 11 बजे तक, कभी 12 से तीन बजे तक और कई बार सुबह पांच बजे तक आपूर्ति बाधित रहती है। उपभोक्ताओं के अनुसार जिले में सबसे अधिक बिजली कटौती गुगरापुर क्षेत्र में की जा रही है। कस्बे निवासी पीयूष दुबे ने कहा कि रात के समय इमरजेंसी रोस्टिंग बंद होनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। गौतम दुबे का कहना है कि गुगरापुर फीडर की बिजली अक्सर बंद रहती है, जबकि पास के अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति जारी रहती है। ब्रजेश दुबे ने कहा कि ऊर्जा राज्यमंत्री का जिला होने के बावजूद ग्रामीणों को अघोषित कटौती झेलनी पड़ रही है। उन्होंने पूरे 18 घंटे निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
वर्जन
ओवरलोड बढ़ने पर कंट्रोल रूम से इमरजेंसी रोस्टिंग के निर्देश मिलते हैं। इसका कोई निर्धारित समय नहीं होता। उन्होंने कहा कि ऐसे समय बिजलीघर की सप्लाई भी प्रभावित रहती है और स्थानीय स्तर से कोई अतिरिक्त कटौती नहीं की जा रही है।
-सुनील सिंह, जेई