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Auraiya: बेटे की शादी में पैरोल पर आए सजायाफ्ता कैदी की मौत, नहीं दी पुलिस को सूचना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
Published by: Shikha Pandey
Updated Tue, 10 Mar 2026 06:49 PM IST
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सार
Auraiya News: बेटे की शादी में पैरोल पर आए सजायाफ्ता कैदी की मौत हो गई। परिजनों ने बिना पुलिस को जानकारी दिए अंतिम संस्कार कर दिया।
गांव में परिजन से पूछताछ करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अछल्दा थाना क्षेत्र के गांव धमसरी रामनगर में हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी की पैरोल अवधि के दौरान संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजन ने मामले की जानकारी पुलिस को दिए बिना उनका अंतिम संस्कार कर दिया। सूचना मिलने पर गांव पहुंची पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। सजायाफ्ता कैदी बेटे की शादी में शामिल होने के लिए आया था।
गांव धमसरी निवासी बहादुर सिंह उर्फ वीर बहादुर यादव (65) हत्या के एक मामले में इटावा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। बहादुर सिंह बेटे अरुण कुमार की शादी में शामिल होने के लिए बीती छह फरवरी को पैरोल पर जेल से बाहर आए थे। 10 फरवरी को धूमधाम से बेटे की शादी हुई, इसके बाद परिवार में खुशी का माहौल था।
बहादुर सिंह की पैरोल अवधि मार्च माह की 19 तारीख को समाप्त होने वाली थी, इसके बाद उन्हें वापस जेल जाना था, लेकिन सोमवार की रात संदिग्ध हालात में उनकी मौत हो गई। मंगलवार की सुबह परिजन ने कानून को ताक पर रखते हुए पुलिस को सूचना देना मुनासिब नहीं समझा और गुपचुप तरीके से शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
घटना की भनक लगते ही अछल्दा थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुरेश सिंह फोर्स के साथ गांव पहुंचे और परिजन से पूछताछ की। उनकी मौत कैसे हुई पुलिस इसकी जानकारी जुटा रही है। परिजन अभी तक कारण नहीं बता पा रहे हैं।
प्रभारी थानाध्यक्ष अछल्दा सुरेश चंद्र ने बताया कि वीर बहादुर हत्या के मामले में सजायाफ्ता था। उसकी मौत की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। चूंकि मूल मामला इटावा के बकेवर थाने से संबंधित है इसलिए वहां की पुलिस को भी अवगत कराया गया है। बिना सूचना अंतिम संस्कार किए जाने के पहलुओं की जांच की जा रही है।
इस मामले में जेल में निरुद्ध था दोषी
वीर बहादुर यादव ने नौ मई साल 2018 को इटावा जनपद के बकेवर थाना क्षेत्र के गांव नगला गुलाब निवासी रामवीर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। रामवीर के बेटे बिंतेश की तहरीर पर मामला दर्ज हुआ था, इसमें अदालत ने बहादुर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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गांव धमसरी निवासी बहादुर सिंह उर्फ वीर बहादुर यादव (65) हत्या के एक मामले में इटावा जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। बहादुर सिंह बेटे अरुण कुमार की शादी में शामिल होने के लिए बीती छह फरवरी को पैरोल पर जेल से बाहर आए थे। 10 फरवरी को धूमधाम से बेटे की शादी हुई, इसके बाद परिवार में खुशी का माहौल था।
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बहादुर सिंह की पैरोल अवधि मार्च माह की 19 तारीख को समाप्त होने वाली थी, इसके बाद उन्हें वापस जेल जाना था, लेकिन सोमवार की रात संदिग्ध हालात में उनकी मौत हो गई। मंगलवार की सुबह परिजन ने कानून को ताक पर रखते हुए पुलिस को सूचना देना मुनासिब नहीं समझा और गुपचुप तरीके से शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
घटना की भनक लगते ही अछल्दा थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक सुरेश सिंह फोर्स के साथ गांव पहुंचे और परिजन से पूछताछ की। उनकी मौत कैसे हुई पुलिस इसकी जानकारी जुटा रही है। परिजन अभी तक कारण नहीं बता पा रहे हैं।
प्रभारी थानाध्यक्ष अछल्दा सुरेश चंद्र ने बताया कि वीर बहादुर हत्या के मामले में सजायाफ्ता था। उसकी मौत की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। चूंकि मूल मामला इटावा के बकेवर थाने से संबंधित है इसलिए वहां की पुलिस को भी अवगत कराया गया है। बिना सूचना अंतिम संस्कार किए जाने के पहलुओं की जांच की जा रही है।
इस मामले में जेल में निरुद्ध था दोषी
वीर बहादुर यादव ने नौ मई साल 2018 को इटावा जनपद के बकेवर थाना क्षेत्र के गांव नगला गुलाब निवासी रामवीर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। रामवीर के बेटे बिंतेश की तहरीर पर मामला दर्ज हुआ था, इसमें अदालत ने बहादुर सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।