कर्ज का कहर: मां मरी, भाई गया और अब उजड़ गया खुशबू का सिंदूर, ‘होम लोन’ बना मौत का सबब, हफ्ते भर की मासूम अनाथ
Hamirpur News: हमीरपुर में होम लोन और उधारी के दबाव में सीएससी संचालक अंकित ने आत्महत्या कर ली। चार साल में मां और भाई को खोने के बाद अब अंकित की मौत से परिवार अनाथ हो गया है।
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हमीरपुर जिले के भरुआ सुमेरपुर कस्बे में जनसेवा केंद्र संचालक अंकित ओमर की आत्महत्या के मामले में कर्ज का दबाव मुख्य वजह बनकर सामने आया है। होम लोन व करीबी लोगों से पैसा उधार लेकर दो मंजिला मकान बनवाया था। उधारी को चुकाने का दबाव था, जिसको लेकर वह परेशान था।
पति की मौत से पत्नी बदहवास है। उसका कहना है कि उन्हें बस इनता पता है कि पति ने कर्ज लेकर मकान बनवाया था। बैंक का नाम मालूम नहीं है। अंकित की पत्नी खुशबू के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह कभी दहाड़ मारकर रोने लगती तो कभी बेहोश हो जाती।
पहले से ही परिवार कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था
दो बेटियों की परवरिश कैसे होगी, बस यही शब्द मुंह से निकल रहे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार पहले से ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा था। ससुर के लापता होने के बाद सास सीता पुखरायां से आकर कस्बे में किराये के मकान में रहने लगी थीं।
सीएससी आईडी के माध्यम से लिया था होम लोन
इसके बाद में कांशीराम कॉलोनी में आवास मिलने पर परिवार यहीं बस गया। अंकित ने जनसेवा केंद्र खोलकर घर की जिम्मेदारी संभाली। जनसेवा केंद्र संचालन से आय ठीक होने लगी तो वार्ड-15 में एक प्लॉट खरीद लिया। खुशबू ने बताया कि सीएससी आईडी के माध्यम से होम लोन लिया था।
कर्ज ही मेरे पति की मौत का कारण बना
दोस्तों और रिश्तेदारों से भी कर्ज लिया था। करीब 25 से 30 लाख की लागत से दो मंजिला मकान तैयार कराया था। कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ने लगा और बैंक की किस्त जमा करने में भी दिक्कतें आने लगीं। वह अपनी परेशानी कभी नहीं बताते थे। कर्ज ही मेरे पति की मौत का कारण बन गया।
चार साल में सब उजड़ गया
खुशबू ने बताया कि चार साल में मेरा सब कुछ उजड़ गया। वर्ष 2022 में मां सीता की मौत हो गई। यह परिवार के लिए सबसे बड़ा झटका था। सास की मौत के बाद परिवार पर दुखों का बोझ और बढ़ गया। बीते वर्ष देवर अमर की भी मौत हो चुकी है। अब पति की मौत से सब कुछ उजड़ गया।
पति ने ही रखा था बेटी का नाम गौरी
पत्नी खुशबू ने बताया कि पति की मौत के बाद परिवार पर संकट आ गया है। उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी गौरी (5) पूर्ण रूप से दिव्यांग है। दूसरी बेटी का जन्म अभी पिछले सप्ताह ही हुआ है। बड़ी बेटी को अंकित बहुत चाहते थे। उन्होंने ही उसका नाम गौरी रखा था।

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