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Kanpur News: हाईकोर्ट ने करोड़ की भूमि पर केडीए के स्वामित्व का दिया आदेश
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कानपुर। सीलिंग के तहत केडीए को मिली जमीन को अपना बताने वाले बारा सिरोही के किसान को हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने केडीए के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने करीब 39.65 करोड़ की भूमि केडीए के स्वामित्व की मानी है। अब केडीए यहां अपना कब्जा प्राप्त करेगा।
केडीए विधि के विशेष कार्याधिकारी सत शुक्ला ने बताया कि बारा सिरोही स्थित आराजी संख्या-357, 358, 359 व 360 की करीब 12008 वर्ग गज सीलिंग भूमि केडीए की है। भूमि आवासीय सर्किल दर के अनुसार करीब 39 करोड़ 65 लाख 80 हजार की है। यह नगर भूमि सीमा रोपड़ अधिनियम-1976 के प्रावधानों के अनुसार सीमांकन घोषित कर इसका कब्जा केडीए को प्राप्त कराया गया था। इसके विरुद्ध कृष्ण कुमार मिश्रा व अन्य ने उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में याचिका दाखिल की थी।
याचिका में वर्ष 2010 से स्थल पर यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश पारित हुआ और 16 साल तक स्थगन आदेश पारित रहा था जिस वजह से प्राधिकरण भूमि का निस्तारण नहीं कर पा रहा था। याचिकाकर्ताओं ने भूमि का मुआवजा न मिलने और अन्य आधार प्रस्तुत किए थे। भूमि को सीलिंग से मुक्त करने की मांग की थी। अब हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर याचिका खारिज कर भूमि का निर्णय प्राधिकरण के पक्ष में पारित किया है। इससे प्राधिकरण को राहत मिली है और अब इस भूमि का निस्तारण किया जा सकेगा।
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केडीए विधि के विशेष कार्याधिकारी सत शुक्ला ने बताया कि बारा सिरोही स्थित आराजी संख्या-357, 358, 359 व 360 की करीब 12008 वर्ग गज सीलिंग भूमि केडीए की है। भूमि आवासीय सर्किल दर के अनुसार करीब 39 करोड़ 65 लाख 80 हजार की है। यह नगर भूमि सीमा रोपड़ अधिनियम-1976 के प्रावधानों के अनुसार सीमांकन घोषित कर इसका कब्जा केडीए को प्राप्त कराया गया था। इसके विरुद्ध कृष्ण कुमार मिश्रा व अन्य ने उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में याचिका दाखिल की थी।
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याचिका में वर्ष 2010 से स्थल पर यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश पारित हुआ और 16 साल तक स्थगन आदेश पारित रहा था जिस वजह से प्राधिकरण भूमि का निस्तारण नहीं कर पा रहा था। याचिकाकर्ताओं ने भूमि का मुआवजा न मिलने और अन्य आधार प्रस्तुत किए थे। भूमि को सीलिंग से मुक्त करने की मांग की थी। अब हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर याचिका खारिज कर भूमि का निर्णय प्राधिकरण के पक्ष में पारित किया है। इससे प्राधिकरण को राहत मिली है और अब इस भूमि का निस्तारण किया जा सकेगा।
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