कानपुर: रिच ग्रुप की कंपनियों में आयकर विभाग की छापेमारी पूरी, म्यूचुअल फंड के जरिए काले धन को कर रहे थे सफेद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Tue, 21 Sep 2021 12:40 AM IST

सार

यह कंपनी कई स्रोतों से नकदी ले रही थी। उस रकम को एक बोगस कंपनी में निवेश करती थी। उसके बाद उसको दूसरी बोगस कंपनी में निवेश कराया जाता था। कई बार किसी डमी व्यक्ति के नाम पर डिमैट अकाउंट खोलकर उसके नाम से म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

फर्जी इनवॉइस जारी करने वाली और सोनू सूद के साथ मिले कनेक्शन मामले में आयकर विभाग को बड़ी सफलता हाथ लगी है। समूह की कंपनियां काले धन को सफेद करने के लिए म्यूचुअल फंड का सहारा ले रही थीं। आयकर अफसरों ने बडे़ पैमाने पर दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है।
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साथ ही कंपनी के कंप्यूटर का डाटा क्लोन करके जांच चल रही है। रिच समूह के ठिकानों पर चल रही छापेमारी शनिवार देर रात को खत्म हो गई थी। सूत्रों के मुताबिक, यह कंपनी कई स्रोतों से नकदी ले रही थी। उस रकम को एक बोगस कंपनी में निवेश करती थी।


उसके बाद उसको दूसरी बोगस कंपनी में निवेश कराया जाता था। कई बार किसी डमी व्यक्ति के नाम पर डिमैट अकाउंट खोलकर उसके नाम से म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता। म्यूचुअल फंड में निवेश के कुछ महीनों बाद उस पैसे को सफेद करके लाभार्थी को दे दिया जाता।

अभी तक म्यूचुअल फंड के सहारे ऐसा कोई मामला देखने को नहीं मिला है, जिसमें काले धन को सफेद किया जा रहा हो। जब कोई व्यक्ति म्यूचुअल फंड में निवेश करता है तो माना जाता है कि रकम एक नंबर की होगी, क्योंकि उस रकम के ऊपर कई प्रकार की जांच हो चुकी होती है। 

आयकर की टीमें छापेमारी कर मुंबई और दिल्ली लौट गई हैं। टीमें अपने साथ कागजात के साथ कंपनी के खाते और कंप्यूटर में दर्ज डाटा को क्लोन करके साथ ले गई हैं। अब डाटा एनालिसिस के जरिए पता किया जाएगा कि कितनी रकम का फ्रॉड किया गया है। 

इससे पहले आयकर विभाग ने विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि कानपुर सहित लखनऊ, गुरुग्राम, जयपुर, मुंबई और दिल्ली में सोनू सूद को लेकर छापेमारी चल रही है। सूत्र बताते हैं कि यह कंपनी सोनू सूद को फंड देने वाली कंपनियों के लिए फर्जी इनवॉइस जारी कर रही थी। 

रिच समूह पर 6 साल पहले भी हो चुकी कार्रवाई
आयकर विभाग ने 2015-16 में भी रिच समहू की कंपनियों पर सर्वे किया था। उस वक्त कंपनी पर फर्जी इनवॉइस जारी करने के आरोप लगे थे। कंपनी के मालिकान इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय भी गए थे, जहां पर आयकर विभाग की जीत हुई थी। विभाग ने कर नहीं चुकाने पर कंपनी के मालिक और कंपनियों के बैंक एकाउंट सीज कर दिए थे।
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