जिंदगी से खिलवाड़: एंबुलेंस चालक बना था 'डॉक्टर', साउथ अफ्रीकी महिला का कर डाला चेकअप, फोटो देख पुलिस भी दंग
Kanpur News: कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर आठवीं पास एंबुलेंस चालक शिवम ने खुद को डॉक्टर बताकर विदेशी मरीजों की जांच की, जिसकी फोटो पुलिस को मिली है। पुलिस इस फोटो को अदालत में आरोपियों के खिलाफ मुख्य डिजिटल सुबूत के तौर पर पेश करेगी।
विस्तार
कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर मसवानपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया गया। यहां आठवीं पास एंबुलेंस चालक शिवम ने खुद को डॉक्टर बताकर साउथ अफ्रीका की महिला मरीज की स्वास्थ्य जांच कर दी। जांच करते हुए आरोपी की एक फोटो पुलिस को मिली है। यह फोटो शिवम के मोबाइल में थी।
31 मार्च को आहूजा हॉस्पिटल में पुलिस टीम ने छापा मारकर किडनी ट्रांसप्लांट के काले कारोबार का भंडाफोड़ किया था। पुलिस मामले में हॉस्पिटल के मालिक डॉ. सु़रजीत सिंह आहूजा और उसकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा, दलाल एंबुलेस चालक शिवम अग्रवाल और तीन अन्य हॉस्पिटल के संचालक को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
स्टेथेस्कोप लगाकर मरीज की जांच करता दिखा
पुलिस की जांच के अनुसार उससे पहले भी उस अस्पताल में मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया है। तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका का यहीं ट्रांसप्लांट किया गया था। उस दौरान की एक फोटो पुलिस को जेल भेजे गए आरोपी शिवम के मोबाइल से मिली है। इसमें वह स्टेथेस्कोप लगाकर मरीज की जांच करता दिख रहा है।
विदेशी मरीजों को क्लाइंट दिखाने के लिए खिंचवाई फोटो
जेल भेजे जाने से पहले पुलिस की पूछताछ में आरोपी शिवम ने कबूला था कि वह डॉक्टर नहीं बल्कि आठवीं पास एंबुलेंस चालक है। उसने इलाके में खुद को डॉक्टर बता रखा है। लोग उसे डॉ. शिवम के नाम से जानते हैं। डॉक्टर दिखने के लिए वह एप्रिन पहनता और गले में स्टेथेस्कोप डाले रहता। फोटो के बारे में उसने बताया था कि यह फोटो उसने लोगों को यह दिखाने के लिए खिंचवाई थी, ताकि लोगों को लगे कि उसके क्लाइंट में विदेशी भी शामिल हैं।
शिवम की रिमांड से खुलेंगे कई राज
डीसीपी वेस्ट एसएन कासिम आबिदी ने बताया कि पुलिस सोमवार को एंबुलेंस संचाल शिवम अग्रवाल को रिमांड पर लेने की अर्जी न्यायालय में डालेगी। उसे रिमांड पर लेने के बाद ही कई सवालों के जवाब मिलेंगे। इससे उसके मोबाइल में मिले वीडियो वाले पंजाब के व्यक्ति के बारे में जानकारी मिल सकेगी। साथ ही कब-कब आहूजा और मेडिलाइफ में ट्रांसप्लांट किया गया और किनका किया गया, इसके बारे में पूछताछ की जाएगी।
शिवम की अरेबिका की जांच करते हुए फोटो मिली है। यह इस बात का सुबूत है कि ट्रांसप्लांट के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया गया। इस तरह के सारे सुबूत आरोपियों को सजा दिलाने में अहम साबित होंगे। -एसएन कासिम आबिदी, डीसीपी वेस्ट