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UP: सिस्टम की क्रूरता से थमीं मासूम की सांसें, हर चौखट पर भटके थे दादा, कहीं वेंटिलेटर नहीं तो कहीं मिला बहाना

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Tue, 02 Jun 2026 05:57 AM IST
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सार

Kanpur New Born Death News: हमीरपुर के किसान की नवजात पोती को इलाज के लिए कानपुर से लखनऊ तक पांच अस्पतालों में ले जाया गया, लेकिन वेंटिलेटर और विशेषज्ञों के अभाव में कहीं भर्ती नहीं मिली। अंततः घर लौटते समय बच्ची की मौत हो गई।

Kanpur Man wanders to five hospitals with his four day old infant child does not survive
जेके चौराहे स्थित फ्लाईओवर के नीचे नवजात के साथ बैठे इंद्रबाबू - फोटो : amar ujala
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विस्तार

हमीरपुर के नारायणनगर निवासी किसान इंद्रबाबू पोती की जान बचाने के लिए कानपुर से लखनऊ तक भटके। इस दाैरान उन्होंने पांच अस्पतालों की चाैखट पर गुहार लगाई। इसके बावजूद वह जान बचाने में नाकाम रहे। चकेरी स्थित जेके चौराहे के फ्लाईओवर के नीचे पोती को सीने से चिपकाए बैठे इंद्रबाबू ने बताया कि बच्ची का जन्म 28 मई की सुबह निजी अस्पताल में हुआ था।

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जन्म के बाद ही मासूम की सांसें उखड़ने लगीं। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे और भर्ती कराया। आरोप है कि 29 और 30 मई को डॉक्टर इलाज के बजाय टालमटोल करते रहे। बाद में बताया कि बच्ची की खाने की नली में गंभीर समस्या है और उसका इलाज यहां संभव नहीं है।

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बची-खुची पूंजी समेटकर लखनऊ भागे
इसके बाद उसे हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। उसके पिता मनोज और चाचा शुभम के साथ हैलट लेकर पहुंचे। इंद्रबाबू ने बताया कि डॉक्टरों ने बच्ची को तुरंत हटाने को कह दिया। दलील दी कि बच्ची से अन्य बच्चों को संक्रमण फैल जाएगा। एंबुलेंस का किराया और बची-खुची पूंजी समेटकर लखनऊ भागे।

ऑपरेशन की तत्काल व्यवस्था नहीं है
केजीएमयू में पर्चा बनवाया और भर्ती कराने पहुंचे, तो जवाब मिला कि वेंटिलेटर खाली नहीं है वापस ले जाओ। उसे लेकर राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए। वहां भी समस्या जानने के बाद कहा गया कि विशेषज्ञ नहीं है एसजीपीजीआई ले जाओ। पीजीआई पहुंचे, तो कहा गया कि यहां इस तरह के ऑपरेशन की तत्काल व्यवस्था नहीं है।

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फ्लाईओवर के नीचे जमीन पर ही बैठ गए
छह महीने बाद लेकर आना। चारों तरफ से निराश होकर हमीरपुर के लिए निकले, लेकिन रास्ते में कानपुर के जेके चौराहे पर आकर हिम्मत ने साथ छोड़ दिया और फ्लाईओवर के नीचे जमीन पर ही बैठ गए। सोमवार को ही वह उसे लेकर हमीरपुर पहुंचे जहां बच्ची की मौत हो गई।

इस तरह का मामला पता चला है। हम भी जांच कर रहे हैं कि बच्ची कब आई थी। अभी कुछ पता नहीं चला है। हमारे यहां दो पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. आरके त्रिपाठी और डॉ. श्रद्धा वर्मा हैं। सर्जरी भी बच्चों की इस तरह की होती है। हम जांच कर रहे हैं कि बच्ची कब आई थी।  -डॉ. शैलेंद्र गौतम, विभागाध्यक्ष बाल रोग

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