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Kanpur: सीवर के गंदे पानी से घटी गंगा में ऑक्सीजन, मर गई थीं हजारों मछलियां, यूपी पीसीबी की जांच में खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 25 Jun 2026 12:09 PM IST
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सार

Kanpur News: वाजिदपुर में मछलियों की मौत का कारण एसटीपी से बिना शोधित सीवेज का गंगा में गिरना था, जिससे ऑक्सीजन का स्तर 1.2 मिलीग्राम तक गिर गया। प्रशासन ने कंपनी पर नाराजगी जताते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

Kanpur Oxygen levels in Ganga dropped due to contaminated sewage water  leading to death of thousands of fish
गंगा में मरी मिलीं हजारों मछलियां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कानपुर में 10 दिन पहले वाजिदपुर में गंगा में हजारों मछलियां मरी मिलने का कारण गंगाजल में घुलित ऑक्सीजन का कम होना था। वाजिदपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से बिना शोधित किए पानी गंगा में बहा देने से ऑक्सीजन में कमी आई थी। बुधवार को एसडीएम की बैठक में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपी पीसीबी) ने इस संबंध में रिपोर्ट सौंपी।


इसमें बताया गया कि उस दिन सुबह बारिश की वजह से वाजिदपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से बगैर शोधित किए पानी को गंगा में बहा दिया गया था जिसकी वजह से वहां गंगाजल में घुलित ऑक्सीजन घटकर 1.2 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गई थी। जलीय जीवों के लिए पानी में घुलित ऑक्सीजन कम से कम चार मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए। एसडीएम ने इस पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।

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नालों के पानी के पांच स्थानों में नमूने लिए
जटेटा से भी संबद्ध टेनरियों और जल निगम से बरसात में गंदा पानी गंगा में जाने से रोकने की कार्ययोजना तलब की। गंगा में हजारों मछलियां मरी मिलने का मामला प्रकाशित होने पर जिला प्रशासन और यूपी पीसीबी सक्रिय हुआ। जिलाधिकारी ने जांच के लिए एसडीएम सदर अनुभव सिंह की अध्यक्षता में कमेटी गठित की। कमेटी में छह दिन पहले जाजमऊ गंगा पुल से वाजिदपुर तक गंगा तट का निरीक्षण किया। पंपिंग स्टेशन और गंगा में गिर रहे नालों के पानी के पांच स्थानों में नमूने लिए गए।

रेत की वजह से गंगा दो धाराओं में बंट गई
बुधवार को यूपी पीसीबी ने बैठक के दौरान एसडीएम को जांच रिपोर्ट सौंपी। बताया गया कि जाजमऊ पुल के बाद बीच में रेत की वजह से गंगा दो धाराओं में बंट गई है। उन्नाव की तरफ धारा में पानी का बहाव ज्यादा है जबकि सिटी साइड में बहाव कम है। इसीलिए जब एसटीपी संचालक कंपनी केआरएमपीएल ने वहां अशोधित सीवेज बहाया तो वहां गंगाजल में घुलित ऑक्सीजन घटकर मात्र 1.2 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गई।

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