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UP: पांच करोड़ से बायोरेमेडिएशन... गंगा, पांडु में जा रहा गंदा पानी, केमिकल बचाने के लिए ठेकेदार ने की गड़बड़ी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: Shikha Pandey Updated Mon, 09 Mar 2026 12:00 PM IST
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सार

पनकी में बायोरेमेडिएशन टैंक का वाल्व बंद है। रानी घाट नाले में लगे एक टैंक का वाल्व भी खराब है। अवकाश में केमिकल बचाने के लिए ठेकेदार ने गड़बड़ी की। अफसरों की मिलीभगत की आशंका है।

UP: Bioremediation worth five crore rupees... Dirty water flowing into Ganga and Pandu
खराब पड़ा टैंक का वाल्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गंगा और पांडु नदी में गिर रहे नालों के पानी को शोधित करने के लिए पांच करोड़ रुपये का बायोरेमेडिएशन ठेका दिया गया है। इसके बावजूद प्रतिदिन करीब 5.30 करोड़ लीटर गंदा पानी इन नदियों में जा रहा है। अमर उजाला की रविवार को की गई पड़ताल में इस गंभीर स्थिति का खुलासा हुआ है। नगर निगम ने रानी घाट और रफाका सहित 14 नालों के पानी को बायोरेमेडिएशन विधि से शोधित करने का ठेका ऑर्गनिक 121 साइंटिफिक प्राइवेट लिमिटेड को दिया है। इस पर एक साल में पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा रहे हैं। इस विधि में नदी के मुहाने के पास प्लास्टिक की 25 टंकियां लगाई गई हैं। इनमें ऐसे रसायन भरे जाते हैं जिनमें बैक्टीरिया होते हैं, जो नालों की गंदगी अवशोषित करते हैं। हालांकि, पड़ताल में सामने आया कि यह व्यवस्था धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पा रही है।
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पड़ताल के दौरान रानी घाट पर लगी एक बायोरेमेडिएशन टंकी का वाल्व खराब मिला जिससे रसायन नहीं निकल रहा था। हालांकि इसी नाले में लगी दूसरी टंकी से केमिकल टपक रहा था। पनकी नाले में लगी टंकी का वाल्व बंद पाया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले माह तक कभी टंकियों में रसायन भरा रहता था तो कभी खाली। अब रसायन भरा तो जाता है पर अधिकारियों के आने से पहले ही ठेकेदार इन्हें चालू कर देता है और उनके लौटने के बाद बंद कर देता है।
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पनकी पड़ाव स्थित नाले के पास लगी बायोरेमेडिएशन टंकी में रसायन भरा था लेकिन नाले में रसायन जाने के लिए लगा नल बंद था। इस कारण टंकी से रसायन नाले में नहीं जा रहा था और गंदा पानी सीधे पांडु नदी में गिर रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि टंकियों में रसायन केवल अधिकारियों के निरीक्षण के समय दिखाने के लिए डाला जाता है। कंपनी पूरे माह में केवल एक या दो बार ही टैंकर से रसायन भरती है जबकि इसे दिन-रात नालों में गिरना चाहिए। लोगों का दावा है कि इन टंकियों के बावजूद पांडु नदी में पहले की तरह ही गंदा पानी जा रहा है।

परमिया नाले में हकीकत छिपाने के लिए झाड़ियों के बीच लगाई टंकी
अटल घाट के ठीक बगल में स्थित परमिया नाला (रामेश्वर नाला) में ठेकेदार ने हकीकत छिपाने के लिए कर्बला के पास झाड़ियों के बीच टंकी लगाई है। अटल घाट के बगल में यह नाला गिर रहा है। यहां से लेकर घाट के पीछे स्थित मैदान में कहीं भी टंकी नजर नहीं आती। आसपास के लोगों ने भी कहीं टंकी लगी होने की जानकारी से इन्कार किया।

ठेकेदार कंपनी कर रही ममनमानी
अमर उजाला ने 14 फरवरी को पांडु नदी में गिर रहे गंदे नाले में अलग-अलग स्थानों में लगी तीन टंकियों (गंदा नाला-एक, दो, चार) की हकीकत देखी। इसी तरह अर्रा नाला, हलवाखाड़ा नाला, पनकी नाला-एक, पनकी नाला-दो की पड़ताल की थी। सभी नालों में लगीं टंकियां खाली मिलीं थीं। अपर नगर आयुक्त प्रथम मोहम्मद आवेश खान और मुख्य अभियंता एसएफए जैदी की चेतावनी के बाद व्यवस्था में सुधार हुआ था। मुख्य अभियंता ने ठेकेदार कंपनी को रोज लाइव फोटो, वीडियो भेजने के निर्देश देकर खानापूरी कर ली थी। इसके चलते होली में लगातार कई दिन के अवकाश और अफसरों के बाहर जाने की वजह से ठेकेदार कंपनी ने केमिकल बचाने के लिए फिर मनमानी शुरू कर दी।

महीनों से टैंक पड़ा है खाली
ठेकेदार के लोग केमिकल डालकर फोटो, वीडियो बनाते हैं और उसके बाद वाल्व बंद कर लौट जाते हैं। महीनों से टैंक खाली पड़ा था। दो दिन पहले ही केमिकल भरा गया था लेकिन नाले में नहीं डाला जा रहा। नदी में गंदा पानी जा रहा है। - मनीष बाजपेई, पनकी पड़ाव

टैंक केवल दिखावे के लिए लगाए
टैंक केवल दिखावे के लिए लगाए गए हैं जब कोई अधिकारी दौरे पर आता है तो उसमें एक-दो कंटेनर केमिकल डालकर जांच कर दी जाती है। इसके बाद फिर यह टैंक भगवान भरोसे पड़े रहते हैं और गंदा पानी नदी में जाता है। - सोनू शुक्ला, पनकी पड़ाव

नालों के पानी को बायोरेमेडिएशन विधि से शोधित किया जा रहा है। फिर भी यदि इसमें गड़बड़ी की जा रही है तो इसकी जांच होगी। रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। - दिवाकर भास्कर, प्रभारी अभियंता (पर्यावरण)
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