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Kasganj News: कागज के दाम बढ़े, जेबों का संतुलन बिगड़ा
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फोटो36कासगंज में एक दुकान पर बिक्री के लिए रखी स्टेशनरी । संवाद
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कासगंज। नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले ही कागज की कीमतों में 10 फीसदी तक तेजी आ गई है। प्लास्टिक भी महंगी हुई है। इससे स्कूल की किताबें, कॉपियां, स्टेशनरी, बोतल और बॉक्स महंगे हो जाएंगे। यह वृद्धि अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त दबाव डालेगी।
जिले के विक्रेताओं ने नए सत्र के लिए कागज और स्टेशनरी की बिक्री की तैयारियां शुरू कर दी हैं। स्कूलों में अभी परीक्षाएं चल रही हैं और प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। 1 अप्रैल के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही पाठ्य सामग्री की खरीदारी में तेजी आएगी। कागज महंगा होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। विक्रेताओं का कहना है कि कोर्स और स्टेशनरी महंगी होने से अभिभावकों का बजट बिगड़ सकता है।
- स्थानीय विक्रेता विवेक बंसल ने बताया कि पाठ्य पुस्तकों का स्टॉक 15 दिन पहले मंगवाया गया था। इसलिए वह पुराने रेट पर आया है और इसकी कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
मयंक माहेश्वरी के अनुसार, पुराने स्टॉक की कॉपियां और स्टेशनरी पुराने दाम पर बिक रही हैं। लेकिन नए माल की कीमतें बढ़ने से बाजार में जल्द ही कीमतों में अंतर दिखाई देगा। कागज की बढ़ती कीमतें स्कूल सामग्री को महंगा करेंगी।
अभिभावक सुखवीर सिंह का कहना है कि पाठ्यपुस्तकें व स्टेशनरी पहले ही काफी महंगी है। इनकी कीमतें बढ़ने पर खर्च बोझ बढ़ेगा।
अभिभावक राजकुमार का कहना है कि सरकार को निजी स्कूलों में सरकारी पाठ्यपुस्तकों को लागू करना की व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे अभिभावकों पर पढ़ाई का बोझ न पड़े।
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जिले के विक्रेताओं ने नए सत्र के लिए कागज और स्टेशनरी की बिक्री की तैयारियां शुरू कर दी हैं। स्कूलों में अभी परीक्षाएं चल रही हैं और प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। 1 अप्रैल के बाद नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही पाठ्य सामग्री की खरीदारी में तेजी आएगी। कागज महंगा होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। विक्रेताओं का कहना है कि कोर्स और स्टेशनरी महंगी होने से अभिभावकों का बजट बिगड़ सकता है।
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- स्थानीय विक्रेता विवेक बंसल ने बताया कि पाठ्य पुस्तकों का स्टॉक 15 दिन पहले मंगवाया गया था। इसलिए वह पुराने रेट पर आया है और इसकी कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
मयंक माहेश्वरी के अनुसार, पुराने स्टॉक की कॉपियां और स्टेशनरी पुराने दाम पर बिक रही हैं। लेकिन नए माल की कीमतें बढ़ने से बाजार में जल्द ही कीमतों में अंतर दिखाई देगा। कागज की बढ़ती कीमतें स्कूल सामग्री को महंगा करेंगी।
अभिभावक सुखवीर सिंह का कहना है कि पाठ्यपुस्तकें व स्टेशनरी पहले ही काफी महंगी है। इनकी कीमतें बढ़ने पर खर्च बोझ बढ़ेगा।
अभिभावक राजकुमार का कहना है कि सरकार को निजी स्कूलों में सरकारी पाठ्यपुस्तकों को लागू करना की व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे अभिभावकों पर पढ़ाई का बोझ न पड़े।