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Kaushambi News: धूल से जन्म ले रही खतरनाक बीमारी, सिलिकोसिस बन रहा साइलेंट किलर
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sun, 25 Jan 2026 01:41 AM IST
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में दमा के मरीज का इलाज करते डॉक्टर। संवाद
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सुधीर कश्यप
निर्माणाधीन रामवनगमन मार्ग पर उड़ती धूल अब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। सड़क निर्माण के दौरान पानी का नियमित छिड़काव न होने से दिनभर धूल के गुबार उड़ते रहते हैं, जिससे आसपास के ग्रामीण इलाकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन विभाग की ओपीडी में रोजाना करीब 150 से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं, इनमें से 50 से ज्यादा मरीज खांसी, एलर्जी, दमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से फेफड़ों पर सीधा असर पड़ता है और पहले से दमा या एलर्जी से ग्रसित मरीजों की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
स्थानीय सुरेश, रामलाल, पुष्पराज सहित अन्य लोगों का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा नियमों के अनुसार सड़क पर पानी का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। कई बार बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी होने पर अस्पताल ले जाना पड़ता है।
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सांस की बीमारी नहीं, जानलेवा बन सकता है सिलिकोसिस
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से सिलिकोसिस नाम की गंभीर बीमारी भी हो सकती है, जिसे खास तरह की टीबी माना जाता है। यह बीमारी फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है और मरीज को सांस लेने में भारी परेशानी होने लगती है। डॉ. सजीव सिंह ने लोगों को सलाह दी है कि वे धूल से बचाव करें, मास्क का प्रयोग करें और किसी भी प्रकार की सांस की समस्या होने पर तुरंत जांच कराएं।
बीमारी से बचाव के उपाय
- आंखों में जलन होने पर साफ पानी से आंख धोएं।
- बाहर निकलते समय मास्क या गमछा जरूर पहनें।
- निर्माण स्थल और धूल वाले इलाकों में अनावश्यक न जाएं।
- बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से धूल से दूर रखें।
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मेडिकल कॉलेज के फिजिशियन विभाग की ओपीडी में रोजाना करीब 150 से अधिक मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं, इनमें से 50 से ज्यादा मरीज खांसी, एलर्जी, दमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से फेफड़ों पर सीधा असर पड़ता है और पहले से दमा या एलर्जी से ग्रसित मरीजों की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
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स्थानीय सुरेश, रामलाल, पुष्पराज सहित अन्य लोगों का कहना है कि निर्माण एजेंसी द्वारा नियमों के अनुसार सड़क पर पानी का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। कई बार बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी होने पर अस्पताल ले जाना पड़ता है।
सांस की बीमारी नहीं, जानलेवा बन सकता है सिलिकोसिस
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय तक धूल के संपर्क में रहने से सिलिकोसिस नाम की गंभीर बीमारी भी हो सकती है, जिसे खास तरह की टीबी माना जाता है। यह बीमारी फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है और मरीज को सांस लेने में भारी परेशानी होने लगती है। डॉ. सजीव सिंह ने लोगों को सलाह दी है कि वे धूल से बचाव करें, मास्क का प्रयोग करें और किसी भी प्रकार की सांस की समस्या होने पर तुरंत जांच कराएं।
बीमारी से बचाव के उपाय
- आंखों में जलन होने पर साफ पानी से आंख धोएं।
- बाहर निकलते समय मास्क या गमछा जरूर पहनें।
- निर्माण स्थल और धूल वाले इलाकों में अनावश्यक न जाएं।
- बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से धूल से दूर रखें।
