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Kaushambi News: कैसे हो नस्ल सुधार... भैंसों के लिए सात सालाें से साॅर्टेड सीमेन का इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Sun, 25 Jan 2026 01:15 AM IST
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जितेंद्र तिवारी, पशुपालक
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अमित कुमार सिंह
महेवाघाट। उत्कृष्ट नस्ल के मादा पशुओं की संख्या बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने करीब सात वर्ष पहले सेक्स सॉर्टेड सीमेन योजना की शुरुआत की थी। लेकिन भैंसों के कृत्रिम गर्भाधान के लिए अब तक यह सीमेन उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
गाय पालक किसानों को ही लाभ मिल पा रहा है। भैंसों से मादा पड़िया के लिए मजबूरी में पशुपालक निजी एआई वर्करों का सहारा ले रहे हैं, जहां एक बार के कृत्रिम गर्भाधान के लिए 1500 से 1800 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। जबकि गायों के लिए 100 रुपये के खर्च पर सरकारी सुविधा उपलब्ध है।
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 में हुई पशुगणना में भैंसों की संख्या 364403 पाई गई थी। जबकि देशी और क्रास भीड़ गोजातीय पशुधन की संख्या 176495 पाई गई थी। जानकारों के मुताबिक मौजूदा समय में भैंसों की संख्या चार लाख से ऊपर पहुंच गई है। भैंस पालन जनपद में किसानों की आय का प्रमुख साधन है। संवाद
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गाय पालक किसानों को ही लाभ मिल पा रहा है। भैंसों से मादा पड़िया के लिए मजबूरी में पशुपालक निजी एआई वर्करों का सहारा ले रहे हैं, जहां एक बार के कृत्रिम गर्भाधान के लिए 1500 से 1800 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। जबकि गायों के लिए 100 रुपये के खर्च पर सरकारी सुविधा उपलब्ध है।
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पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 में हुई पशुगणना में भैंसों की संख्या 364403 पाई गई थी। जबकि देशी और क्रास भीड़ गोजातीय पशुधन की संख्या 176495 पाई गई थी। जानकारों के मुताबिक मौजूदा समय में भैंसों की संख्या चार लाख से ऊपर पहुंच गई है। भैंस पालन जनपद में किसानों की आय का प्रमुख साधन है। संवाद

जितेंद्र तिवारी, पशुपालक
