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Kaushambi News: महिलाओं के जीवन में पेठा से आर्थिक मिठास घोल रहीं सीमा
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Tue, 07 Apr 2026 01:54 AM IST
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विकास खंड नेवादा के तरनी गांव की रहने वाली सीमा देवी अपने साथ-साथ अन्य महिलाओं के जीवन में पेठा की मदद से आर्थिक मिठास घोल रहीं हैं। इससे गांव की कई महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। पेठा और चेरी के व्यवसाय से वह क्षेत्र ही नहीं बल्कि जिले में नई पहचान बना रही हैं।
सीमा देवी बताती हैं कि वह वर्ष 2018 से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं और शुरुआत में समूह के छोटे-छोटे कार्यों में सक्रिय रहीं। वर्ष 2022 में उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी और पेठा बनाने का विचार आया। इसके लिए समूह के माध्यम से उन्हें मंझनपुर में चार दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के बाद सीमा देवी ने अपने पति जय प्रकाश सिंह के सहयोग से घर से ही पेठा बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनका यह छोटा प्रयास बड़े व्यवसाय में बदल गया। आज उनके यहां करीब 10 लोग काम कर रहे हैं, जिससे गांव के लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों से सफेद कद्दू खरीदकर पेठा तैयार किया जाता है। प्रतिदिन करीब 10 कुंतल पेठा बनाया जाता है, जिसमें लगभग 7 कुंतल चीनी की खपत होती है। सीमा देवी के यहां तैयार पेठा न केवल जिले में, बल्कि प्रयागराज और मध्य प्रदेश तक के व्यापारी खरीदने आते हैं। इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने लगभग ढाई से तीन लाख रुपये का टर्नओवर मिल रहा है।
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सीमा देवी बताती हैं कि वह वर्ष 2018 से स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं और शुरुआत में समूह के छोटे-छोटे कार्यों में सक्रिय रहीं। वर्ष 2022 में उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी और पेठा बनाने का विचार आया। इसके लिए समूह के माध्यम से उन्हें मंझनपुर में चार दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
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प्रशिक्षण के बाद सीमा देवी ने अपने पति जय प्रकाश सिंह के सहयोग से घर से ही पेठा बनाने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उनका यह छोटा प्रयास बड़े व्यवसाय में बदल गया। आज उनके यहां करीब 10 लोग काम कर रहे हैं, जिससे गांव के लोगों को भी रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों से सफेद कद्दू खरीदकर पेठा तैयार किया जाता है। प्रतिदिन करीब 10 कुंतल पेठा बनाया जाता है, जिसमें लगभग 7 कुंतल चीनी की खपत होती है। सीमा देवी के यहां तैयार पेठा न केवल जिले में, बल्कि प्रयागराज और मध्य प्रदेश तक के व्यापारी खरीदने आते हैं। इस व्यवसाय से उन्हें हर महीने लगभग ढाई से तीन लाख रुपये का टर्नओवर मिल रहा है।