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मनरेगा : अधूरे कामों का अंबार, 14828 कार्य अटके
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अधूरे कामों को पूरा करने के लिए शासन ने दिए निर्देश, बिरधा ब्लॉक में सबसे ज्यादा कार्य लंबित
अशोक तिवारी
ललितपुर। ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले मनरेगा अधिनियम के तहत जिले में शुरू कराए गए हजारों कार्य अब तक अधूरे पड़े हैं। शासन के निर्देश पर इन अपूर्ण कार्यों को पूरा कराने की कवायद तेज कर दी गई है। इसके तहत जनपद में 14,828 अपूर्ण कार्यों को चिह्नित कर उनके अधूरे रहने के कारणों की पड़ताल शुरू कर दी गई है।
जिले के छह विकास खंडों की 415 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत करीब 1.95 लाख जॉब कार्ड सक्रिय हैं, जिन पर 3.20 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। इन श्रमिकों को गांवों में संचालित विकास कार्यों के माध्यम से रोजगार दिया जाता है। वर्तमान में मजदूरी दर 252 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।
हर वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायतों में कच्चे और पक्के निर्माण कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर मस्टररोल जारी किया जाता है, जिसके बाद कार्य शुरू होते हैं। हालांकि, जिले में कराए गए कार्यों में से 14,828 कार्य विभिन्न कारणों से अधूरे रह गए हैं।
शासन के निर्देश पर विभाग ने इन कार्यों के अपूर्ण रहने के कारण संबंधित ब्लॉकों से मांगे हैं और उनका चिह्नीकरण शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जांच में जियो टैगिंग न होना, समयसीमा में कार्य पूरा न होना, सामग्री भुगतान में देरी और अधिकारियों द्वारा निरीक्षण न किए जाने जैसे कारण सामने आए हैं।
अब इन कार्यों को पूरा करने के लिए विभाग ने कार्ययोजना तैयार की है। जिन कार्यों पर व्यय नहीं हुआ है, उन्हें डीपीसी लॉगिन से क्लोज किया जाएगा। 0 से 30 प्रतिशत तक व्यय वाले कार्यों का भौतिक सत्यापन कर तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। जहां कार्य संभव होगा, उसे पुनः शुरू कर पूरा कराया जाएगा। वहीं, लापरवाही, कुप्रबंधन या धन के दुरुपयोग के मामलों में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। संवाद
अपूर्ण कार्यों का ब्लॉकवार विवरण
बार – 2409
बिरधा – 2869
जखौरा – 2661
मड़ावरा – 2412
महरौनी – 2361
तालबेहट – 2116
कुल – 14,828
इन कारणों से अधूरे रहे कार्य
4388 कार्य सामग्री का भुगतान होने पर पूरे हो जाएंगे
4723 कार्य एडवाइजरी के माध्यम से क्लोज होंगे
267 कार्य शून्य व्यय व धनराशि वापसी पर क्लोज होंगे
5450 कार्य एक माह में पूरे किए जाएंगे
इनमें 1867 आवासीय कार्य शामिल हैं
अपूर्ण कार्यों को शासन के निर्देश पर चिह्नित किया गया है। इनके अधूरे रहने के कारणों की जांच कर उन्हें शीघ्र पूरा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- रमेश कुमार यादव, डीसी, मनरेगा
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अशोक तिवारी
ललितपुर। ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले मनरेगा अधिनियम के तहत जिले में शुरू कराए गए हजारों कार्य अब तक अधूरे पड़े हैं। शासन के निर्देश पर इन अपूर्ण कार्यों को पूरा कराने की कवायद तेज कर दी गई है। इसके तहत जनपद में 14,828 अपूर्ण कार्यों को चिह्नित कर उनके अधूरे रहने के कारणों की पड़ताल शुरू कर दी गई है।
जिले के छह विकास खंडों की 415 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत करीब 1.95 लाख जॉब कार्ड सक्रिय हैं, जिन पर 3.20 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। इन श्रमिकों को गांवों में संचालित विकास कार्यों के माध्यम से रोजगार दिया जाता है। वर्तमान में मजदूरी दर 252 रुपये प्रतिदिन निर्धारित है।
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हर वित्तीय वर्ष में ग्राम पंचायतों में कच्चे और पक्के निर्माण कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर मस्टररोल जारी किया जाता है, जिसके बाद कार्य शुरू होते हैं। हालांकि, जिले में कराए गए कार्यों में से 14,828 कार्य विभिन्न कारणों से अधूरे रह गए हैं।
शासन के निर्देश पर विभाग ने इन कार्यों के अपूर्ण रहने के कारण संबंधित ब्लॉकों से मांगे हैं और उनका चिह्नीकरण शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जांच में जियो टैगिंग न होना, समयसीमा में कार्य पूरा न होना, सामग्री भुगतान में देरी और अधिकारियों द्वारा निरीक्षण न किए जाने जैसे कारण सामने आए हैं।
अब इन कार्यों को पूरा करने के लिए विभाग ने कार्ययोजना तैयार की है। जिन कार्यों पर व्यय नहीं हुआ है, उन्हें डीपीसी लॉगिन से क्लोज किया जाएगा। 0 से 30 प्रतिशत तक व्यय वाले कार्यों का भौतिक सत्यापन कर तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। जहां कार्य संभव होगा, उसे पुनः शुरू कर पूरा कराया जाएगा। वहीं, लापरवाही, कुप्रबंधन या धन के दुरुपयोग के मामलों में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। संवाद
अपूर्ण कार्यों का ब्लॉकवार विवरण
बार – 2409
बिरधा – 2869
जखौरा – 2661
मड़ावरा – 2412
महरौनी – 2361
तालबेहट – 2116
कुल – 14,828
इन कारणों से अधूरे रहे कार्य
4388 कार्य सामग्री का भुगतान होने पर पूरे हो जाएंगे
4723 कार्य एडवाइजरी के माध्यम से क्लोज होंगे
267 कार्य शून्य व्यय व धनराशि वापसी पर क्लोज होंगे
5450 कार्य एक माह में पूरे किए जाएंगे
इनमें 1867 आवासीय कार्य शामिल हैं
अपूर्ण कार्यों को शासन के निर्देश पर चिह्नित किया गया है। इनके अधूरे रहने के कारणों की जांच कर उन्हें शीघ्र पूरा कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
- रमेश कुमार यादव, डीसी, मनरेगा