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Maharajganj News: लंबी दूरी की लग्जरी बसों का बढ़ता दबदबा, पिछड़ रहा रोडवेज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 24 Apr 2026 06:14 AM IST
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सिद्धार्थनगर। जिले की परिवहन व्यवस्था तेजी से बदल रही है, जहां अब यात्री पारंपरिक रोडवेज बसों के बजाय प्राइवेट लग्जरी बसों को प्राथमिकता दे रहे हैं। डुमरियागंज, बांसी, नौगढ़ और बढ़नी जैसे प्रमुख केंद्रों से लेकर ग्रामीण रूटों तक यह बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। बेहतर सुविधा, समय की बचत और दिन-रात उपलब्धता इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
सिद्धार्थनगर से दिल्ली, लखनऊ, गोरखपुर और मुंबई जैसे बड़े शहरों के लिए रोजाना दर्जनों प्राइवेट बसें संचालित हो रही हैं। इन बसों में एसी स्लीपर, पुश बैक सीट, मोबाइल चार्जिंग और पानी जैसी सुविधाएं आम हो चुकी हैं। यात्रियों का कहना है कि किराये में बहुत अधिक अंतर नहीं है, लेकिन समय और आराम के मामले में प्राइवेट बसें आगे हैं। ये बसें कम स्टॉपेज के साथ सीधे गंतव्य तक पहुंचाती हैं जबकि रोडवेज बसें तय स्टॉप और सीमित फ्रीक्वेंसी के कारण पीछे रह जाती हैं।
बस्ती से रोजाना ड्यूटी करने वाले रमाकांत शुक्ल बताते हैं कि जिले में शाम छह बजे के बाद रोडवेज सेवाएं लगभग खत्म हो जाती हैं। इसका सीधा असर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें मजबूरी में प्राइवेट बसों या महंगे निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
बढ़नी बॉर्डर क्षेत्र के कारण सिद्धार्थनगर का परिवहन केवल घरेलू नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व भी रखता है। नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों में भी प्राइवेट बसों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या सिर्फ प्रतिस्पर्धा की नहीं, बल्कि सेवा प्रबंधन की है। यदि रोडवेज अपनी फ्रीक्वेंसी, समयबद्धता और ग्रामीण रूटों पर पकड़ मजबूत करे तो स्थिति में सुधार संभव है।
परिवहन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर करने के लिए विभाग स्तर पर योजना बनाई जा रही है, जिससे आने वाले समय में रोडवेज सेवाओं को मजबूत किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोडवेज ने जल्द ही सेवाओं में सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में उसकी हिस्सेदारी और घट सकती है, जबकि प्राइवेट बसों का दबदबा और मजबूत होगा।प
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बस्ती से रोजाना ड्यूटी करने वाले रमाकांत शुक्ल बताते हैं कि जिले में शाम छह बजे के बाद रोडवेज सेवाएं लगभग खत्म हो जाती हैं। इसका सीधा असर नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें मजबूरी में प्राइवेट बसों या महंगे निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
बढ़नी बॉर्डर क्षेत्र के कारण सिद्धार्थनगर का परिवहन केवल घरेलू नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व भी रखता है। नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों में भी प्राइवेट बसों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या सिर्फ प्रतिस्पर्धा की नहीं, बल्कि सेवा प्रबंधन की है। यदि रोडवेज अपनी फ्रीक्वेंसी, समयबद्धता और ग्रामीण रूटों पर पकड़ मजबूत करे तो स्थिति में सुधार संभव है।
परिवहन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि यात्रियों की सुविधा बढ़ाने और सेवाओं को बेहतर करने के लिए विभाग स्तर पर योजना बनाई जा रही है, जिससे आने वाले समय में रोडवेज सेवाओं को मजबूत किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रोडवेज ने जल्द ही सेवाओं में सुधार नहीं किया, तो आने वाले समय में उसकी हिस्सेदारी और घट सकती है, जबकि प्राइवेट बसों का दबदबा और मजबूत होगा।प

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