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Mahoba News: आल्हा-उदल की नगरी महोबा बनेगा नया टूरिज्म हब
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Wed, 11 Feb 2026 12:38 AM IST
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महोबा। स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत चंदेल शासकों की सांस्कृतिक राजधानी रहे महोबा में पर्यटन विकास के काम तेजी से किए जा रहे हैं। आल्हा और उदल की वीर गाथाओं से जुड़ी यह ऐतिहासिक धरती अब कल्चरल व एजुकेशनल टूरिज्म हब के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप, अयोध्या, काशी और मथुरा में सफल पर्यटन विकास के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार का फोकस बुंदेलखंड क्षेत्र पर है, ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान व सांस्कृतिक विरासत को फिर से सशक्त किया जा सके। बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित महोबा अपनी समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता है। जिसे महान योद्धाओं आल्हा और उदल की बहादुरी व बलिदान ने विशेष पहचान दी है। जिससे यह जिला राज्य के सबसे ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में शामिल है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के निर्देश पर स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत महोबा में 24.98 करोड़ रुपये की लागत से इंटीग्रेटेड टूरिज्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा कार्यदायी संस्था यूपीपीसीएल बांदा को जारी किया गया है। इस पहल का उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के माध्यम से पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। जिसमें सन इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण, त्रिकोणीय गार्डन का विकास, प्रवेश द्वार का निर्माण और साइनेज की व्यवस्था शामिल है। इस पूरे प्रोजेक्ट को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह भारत की सभ्यता व इतिहास का जीवंत हिस्सा है और आल्हा-उदल जैसे महान योद्धाओं की कुर्बानियों की धरती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वदेश दर्शन 2.0 जैसी योजनाएं महोबा की ऐतिहासिक विरासत को नया जीवन दे रही हैं और पर्यटन सुविधाओं को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में महोबा में लगभग 28 लाख पर्यटक पहुंचने का दावा किया है। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धमार्थ कार्य अमृत अभिजात ने कहा कि बुंदेलखंड का इतिहास बेहद प्राचीन व ऐतिहासिक है, जिसे विशिष्ट पहचान देने का प्रयास है। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत महोबा में चल रहा यह प्रोजेक्ट केवल पर्यटन सुविधाओं के विकास तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य ऐसी जगहों का निर्माण करना भी है, जहां यात्री, विशेषकर छात्र और युवा इस क्षेत्र के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व को समझ सकें। सन इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी सुविधाएं हेरिटेज, विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान को एक साथ जोड़कर एजुकेशनल टूरिज्म को बढ़ावा देंगी। यह पहल बुंदेलखंड की पहचान को संरक्षित रखने के साथ भविष्य के लिए सस्टेनेबल टूरिज्म के अवसर तैयार करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
प्रोजेक्ट का मुख्य आकर्षण है सन इंटरप्रिटेशन सेंटर
महोबा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य आकर्षण सन इंटरप्रिटेशन सेंटर है। इसे 4,210 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विकसित किया जा रहा है। यह सेंटर भारतीय परंपरा में सूर्य से जुड़े वैज्ञानिक महत्व और सांस्कृतिक कथाओं को सरल व रोचक तरीके से प्रस्तुत करेगा। सेंटर की छत का डिजाइन दिन के आठ प्रहरों उषा, पूर्वान्ह, मध्यान्ह, अपराह्न, सायंकाल, प्रदोष, निशीथ और त्रियामा का प्रतीक होगा। इस परिसर में विशेष रूप से डिजाइन की गई सनडायल (सूर्यघड़ी) लगाई जाएगी, जो सूरज की पहली किरणों के आधार पर समय बताएगी। इसके साथ ही केंद्र में सोलर पैनल, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, ग्रास पेवर्स, इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम आदि इको-फ्रेंडली सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। जिससे हरित व सस्टेनेबल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सन इंटरप्रिटेशन सेंटर में इंटरैक्टिव गैलरियों की एक श्रृंखला तैयार की जाएगी। जिसमें एक गैलरी भारतीय और पश्चिमी धार्मिक मान्यताओं को जोड़ते हुए सूर्य व प्राचीन ग्रीक देवता हेलिओस की कहानी को दीवारों पर बनी चित्रकारी और मूर्तियों के माध्यम से प्रस्तुत करेगी। एक अन्य गैलरी में भारत के प्रमुख सूर्य मंदिरों जैसे कोणार्क सूर्य मंदिर और मार्तंड सूर्य मंदिर को आर्किटेक्चरल मॉडल व विज़ुअल एलिमेंट्स के माध्यम से दिखाया जाएगा। इसके अलावा सूर्य और एस्ट्रोनॉमी गैलरी में मौसम, कैलेंडर व आकाशीय गतिविधियों को तय करने में सूर्य की भूमिका को समझाया जाएगा। यह अनुभव सूर्य और एस्ट्रोलॉजी गैलरी के साथ समाप्त होगा, जहां 3डी प्रोजेक्शन व साउंड इफेक्ट्स के जरिए सूर्य और मानव जीवन के आपसी संबंध को रोचक ढंग से दर्शाया जाएगा।
पर्यटकों के स्वागत के लिए बनेंगे तीन प्रवेश द्वार
महोबा। परियोजना की सांस्कृतिक खूबसूरती को बढ़ाने के साथ ग्रीन टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सन इंटरप्रिटेशन सेंटर से लगभग चार किलोमीटर दूर शिवतांडव रोड पर एक सुंदर तिकोना गार्डन विकसित किया जा रहा है। इस गार्डन के केंद्र में सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य देव की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसे महोबा के लिए एक महत्वपूर्ण कल्चरल लैंडमार्क के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही पर्यटकों के स्वागत के लिए तीन भव्य प्रवेश द्वार भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक के ऊपर सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य देव की सैंडस्टोन से बनी बारीक नक्काशी वाली प्रतिमा लगाई जाएगी। इससे महोबा की विजुअल पहचान और हेरिटेज छवि को और मजबूती मिलेगी।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वदेश दर्शन 2.0 जैसी योजनाएं महोबा की ऐतिहासिक विरासत को नया जीवन दे रही हैं और पर्यटन सुविधाओं को मजबूत कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 2025 में महोबा में लगभग 28 लाख पर्यटक पहुंचने का दावा किया है। अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धमार्थ कार्य अमृत अभिजात ने कहा कि बुंदेलखंड का इतिहास बेहद प्राचीन व ऐतिहासिक है, जिसे विशिष्ट पहचान देने का प्रयास है। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत महोबा में चल रहा यह प्रोजेक्ट केवल पर्यटन सुविधाओं के विकास तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य ऐसी जगहों का निर्माण करना भी है, जहां यात्री, विशेषकर छात्र और युवा इस क्षेत्र के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक महत्व को समझ सकें। सन इंटरप्रिटेशन सेंटर जैसी सुविधाएं हेरिटेज, विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान को एक साथ जोड़कर एजुकेशनल टूरिज्म को बढ़ावा देंगी। यह पहल बुंदेलखंड की पहचान को संरक्षित रखने के साथ भविष्य के लिए सस्टेनेबल टूरिज्म के अवसर तैयार करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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प्रोजेक्ट का मुख्य आकर्षण है सन इंटरप्रिटेशन सेंटर
महोबा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य आकर्षण सन इंटरप्रिटेशन सेंटर है। इसे 4,210 वर्गमीटर क्षेत्रफल में विकसित किया जा रहा है। यह सेंटर भारतीय परंपरा में सूर्य से जुड़े वैज्ञानिक महत्व और सांस्कृतिक कथाओं को सरल व रोचक तरीके से प्रस्तुत करेगा। सेंटर की छत का डिजाइन दिन के आठ प्रहरों उषा, पूर्वान्ह, मध्यान्ह, अपराह्न, सायंकाल, प्रदोष, निशीथ और त्रियामा का प्रतीक होगा। इस परिसर में विशेष रूप से डिजाइन की गई सनडायल (सूर्यघड़ी) लगाई जाएगी, जो सूरज की पहली किरणों के आधार पर समय बताएगी। इसके साथ ही केंद्र में सोलर पैनल, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, ग्रास पेवर्स, इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम आदि इको-फ्रेंडली सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। जिससे हरित व सस्टेनेबल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सन इंटरप्रिटेशन सेंटर में इंटरैक्टिव गैलरियों की एक श्रृंखला तैयार की जाएगी। जिसमें एक गैलरी भारतीय और पश्चिमी धार्मिक मान्यताओं को जोड़ते हुए सूर्य व प्राचीन ग्रीक देवता हेलिओस की कहानी को दीवारों पर बनी चित्रकारी और मूर्तियों के माध्यम से प्रस्तुत करेगी। एक अन्य गैलरी में भारत के प्रमुख सूर्य मंदिरों जैसे कोणार्क सूर्य मंदिर और मार्तंड सूर्य मंदिर को आर्किटेक्चरल मॉडल व विज़ुअल एलिमेंट्स के माध्यम से दिखाया जाएगा। इसके अलावा सूर्य और एस्ट्रोनॉमी गैलरी में मौसम, कैलेंडर व आकाशीय गतिविधियों को तय करने में सूर्य की भूमिका को समझाया जाएगा। यह अनुभव सूर्य और एस्ट्रोलॉजी गैलरी के साथ समाप्त होगा, जहां 3डी प्रोजेक्शन व साउंड इफेक्ट्स के जरिए सूर्य और मानव जीवन के आपसी संबंध को रोचक ढंग से दर्शाया जाएगा।
पर्यटकों के स्वागत के लिए बनेंगे तीन प्रवेश द्वार
महोबा। परियोजना की सांस्कृतिक खूबसूरती को बढ़ाने के साथ ग्रीन टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सन इंटरप्रिटेशन सेंटर से लगभग चार किलोमीटर दूर शिवतांडव रोड पर एक सुंदर तिकोना गार्डन विकसित किया जा रहा है। इस गार्डन के केंद्र में सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य देव की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसे महोबा के लिए एक महत्वपूर्ण कल्चरल लैंडमार्क के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही पर्यटकों के स्वागत के लिए तीन भव्य प्रवेश द्वार भी बनाए जा रहे हैं, जिनमें से प्रत्येक के ऊपर सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य देव की सैंडस्टोन से बनी बारीक नक्काशी वाली प्रतिमा लगाई जाएगी। इससे महोबा की विजुअल पहचान और हेरिटेज छवि को और मजबूती मिलेगी।