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Mainpuri News: कार्यकारिणी गठन पर विवाद, जिलाध्यक्ष ने छोड़ी बैठक

संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Updated Mon, 02 Mar 2026 11:35 PM IST
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Dispute over the formation of the executive committee, the district president left the meeting
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मैनपुरी। जनपद में रविवार को भारतीय जनता पार्टी की कार्यकारिणी के गठन की बैठक में घमासान हो गया। कार्यकारिणी में शामिल नाम को लेकर जमकर विरोधाभास हुआ। दोनों लोग अपने दस्तावेज लेकर बैठक को बीच में ही छोड़कर निकल गए। बैठक में हुआ विवाद अब कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि कोई भी वरिष्ठ नेता इस बारे में खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। बता दें भारतीय जनता पार्टी की के प्रदेश संगठन की ओर से सभी जिलों में जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। जिसके बाद मैनपुरी जनपद में कार्यकारिणी का गठन किया जाना है। इसके लिए हर जनपद में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों को पर्यवेक्षक बनाया गया है। जनपद में ये जिम्मेदारी विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) सत्यपाल सिंह सैनी को सौंपी गई। उन्हें कोर कमेटी के साथ गोपनीय बैठक कर कार्यकारिणी की सूची पर आम राय बनानी थी और उसे संगठन को सौंपना था। रविवार को तय कार्यक्रम के चलते वह मैनपुरी पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कार्यकारिणी के गठन के लिए कोर कमेटी की बैठक बुलाई जिसमें भोगांव विधायक राम नरेश अग्निहोत्री, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष आलोक गुप्ता, पूर्व जिलाध्यक्ष राहुल चर्तुर्वेदी और वर्तमान में भाजपा की जिलाध्यक्ष ममता राजपूत शामिल हुई। कोर कमेटी के सदस्य पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को भी इसमें शामिल होना था, लेकिन व्यस्तता के कारण वह यहां नहीं आ पाए। कोर कमेटी ने कार्यकारिणी में शामिल होने वाले 20 लोगों के लिए नाम सुझाए गए। सभी नामों पर कमेटी के सभी सदस्यों की सहमति बनी लेकिन जिलाध्यक्ष ममता राजपूत ने सहमति न जताते हुए, नए पदाधिकारियों की एक लिस्ट पर्यवेक्षक को साैंप दी। बस यहीं से विवाद शुरू हो गया। सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्ष की सूची में नए कार्यकर्ताओं के नाम जोड़े गए थे। वहीं, संगठन की ओर से जारी निर्देशों के आधार पर कार्यकारिणी में 50 प्रतिशत लोग पुराने और 50 प्रतिशत नए लोगों को जोड़ा जाना चाहिए। इस सूची पर पर्यवेक्षक ने आपत्ति की, लेकिन जिलाध्यक्ष अपनी बात पर अड़ी रहीं। जब दोनों लोगों में बात नहीं बनी तो जिलाध्यक्ष अपनी सूची लेकर कमरे से बाहर निकल आईं और अपने बेटे के साथ गाड़ी की ओर चली गई। पार्टी सूत्रों की मानें तो पार्किंग में जिलाध्यक्ष का वाहन खड़ा हुआ था। जब वह और उनका बेटा बाहर आए तो वह पर्यवेक्षक के लिए कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग कर रहे थे। जो वहीं मौजूद पदाधिकारियों को सही नहीं लगे। इसके कुछ देर बाद ही पर्यवेक्षक भी कमरे से बाहर निकल आए और अपने वाहन में बैठकर जाने लगे तो कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें रोका और बात करने की कोशिश की, पर्यवेक्षक ने सिर्फ इतना ही कहा कि अब आपके जिले का मैं पर्यवेक्षक नहीं हूं और यहां कोई और पर्यवेक्षक आएंगे। जिलाध्यक्ष ममता राजपूत का कहना है कि पार्टी के निर्देशानुसार सूची तैयार की गई थी। सूची में कोई भी बाहर का कार्यकर्ता नहीं था। मैंने जिले के ही कार्यकर्ता जोड़े हैं और हमारी टीम के लोग हैं। इसमें महिलाएं भी थीं। नए जमाने के लोग चाहिए। बैठक में कोई भी विवाद नहीं हुआ है। सब कुछ सामान्य था। पर्यवेक्षक सत्यपाल सैनी ने बताया कि पार्टी की नीति और नियमों के आधार पर ही कार्यकारिणी का गठन होगा।
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