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Mau News: आरआरसी में कहीं बच्चे खेल रहे तो कहीं लटके ताले, ई-रिक्शा फांक रहे धूल
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मुहम्दाबाद सिपाह स्थित आर आर सी सेंटर में खेलते बच्चे।संवाद
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बड़राव ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) शोपीस बनकर रह गए हैं। अधिकांश आरआरसी पर ताले लटके हैं।
कहीं बच्चे खेलते नजर आते हैं तो कहीं छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था ठप होने से इन केंद्रों का उद्देश्य अधूरा साबित हो रहा है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार ब्लॉक की 68 ग्राम पंचायतों में से 42 में आरआरसी बनकर तैयार हैं। सोमवार को टीम ने कुछ स्थानों पर पहुंचकर पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। मादी सिपाह में बना आरआरसी उद्घाटन से पहले ही जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। परिसर में बच्चे खेलते दिखाई दिए, जबकि गांव में जगह-जगह कूड़े और गंदगी का अंबार लगा हुआ था।
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अतरसावा में आरआरसी बदहाल पड़ा मिला। गांव से दूर बने इस केंद्र तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग भी कच्चा है, जिससे इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। मादी दुल्लह का आरआरसी बंद मिला। अंदर रखा कचरा सड़ रहा है और दुर्गंध फैल रही है।
इसी तरह रेयाव, पिड़ऊथ सिंहपुर, सोनाडीह, भैरोपुर, भटमिला, रामपुर सोहड़ समेत कई ग्राम पंचायतों के आरआरसी पर ताला लटका मिला। कई केंद्र ऐसे स्थानों पर बनाए गए हैं, जहां तक पहुंचने के लिए सुगम रास्ता नहीं है।
ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही है। कचरा ढोने के लिए उपलब्ध कराए गए ई-रिक्शा भी कई जगह ग्राम प्रधानों के दरवाजों पर खड़े-खड़े धूल फांक रहे हैं। नतीजतन गांवों में गंदगी बढ़ रही है और स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है।
कोट-- -- -- -
बड़राव ब्लॉक क्षेत्र की 42 ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। संबंधित ग्राम पंचायतों को इन केंद्रों के नियमित संचालन के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी भी ग्राम पंचायत में आरआरसी बंद पाया जाता है, तो उसकी जांच कराते हुए आगामी 15 दिनों के भीतर उसे संचालित कराया जाएगा। -अरुण वर्मा, खंड विकास अधिकारी, बड़राव
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प्रतिक्रिया
गांव में लाखों रुपये खर्च कर आरआरसी बनाया गया, लेकिन इसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे गांव में जगह-जगह कूड़ा फैला रहता है। -अजीत यादव, भैरोपुर
आरआरसी कई गांवों में काफी दूर बनाया गया है। वहां तक पहुंचने के लिए सही रास्ता भी नहीं है। कचरा संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ रहा है। -मोहिउद्दीन, रेयांव
आरआरसी पर हमेशा ताला लटका रहता है। गांव में कूड़े के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। छुट्टा पशु घूमते रहते हैं और बच्चे खेलते रहते हैं। -सत्यप्रकाश राय, मुहम्मदाबाद सिपाह
गांव में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण नहीं हो रहा है। कचरा ढोने के लिए आए वाहन भी उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। इससे स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है और गांव में गंदगी बढ़ती जा रही है। -प्रियंका राय, पिड़ऊथ सिंहपुर
कहीं बच्चे खेलते नजर आते हैं तो कहीं छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है। नियमित कचरा संग्रहण व्यवस्था ठप होने से इन केंद्रों का उद्देश्य अधूरा साबित हो रहा है।
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विभागीय आंकड़ों के अनुसार ब्लॉक की 68 ग्राम पंचायतों में से 42 में आरआरसी बनकर तैयार हैं। सोमवार को टीम ने कुछ स्थानों पर पहुंचकर पड़ताल की तो हकीकत सामने आई। मादी सिपाह में बना आरआरसी उद्घाटन से पहले ही जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। परिसर में बच्चे खेलते दिखाई दिए, जबकि गांव में जगह-जगह कूड़े और गंदगी का अंबार लगा हुआ था।
अतरसावा में आरआरसी बदहाल पड़ा मिला। गांव से दूर बने इस केंद्र तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग भी कच्चा है, जिससे इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। मादी दुल्लह का आरआरसी बंद मिला। अंदर रखा कचरा सड़ रहा है और दुर्गंध फैल रही है।
इसी तरह रेयाव, पिड़ऊथ सिंहपुर, सोनाडीह, भैरोपुर, भटमिला, रामपुर सोहड़ समेत कई ग्राम पंचायतों के आरआरसी पर ताला लटका मिला। कई केंद्र ऐसे स्थानों पर बनाए गए हैं, जहां तक पहुंचने के लिए सुगम रास्ता नहीं है।
ग्रामीणों से बातचीत में पता चला कि डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण व्यवस्था प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो पा रही है। कचरा ढोने के लिए उपलब्ध कराए गए ई-रिक्शा भी कई जगह ग्राम प्रधानों के दरवाजों पर खड़े-खड़े धूल फांक रहे हैं। नतीजतन गांवों में गंदगी बढ़ रही है और स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है।
कोट
बड़राव ब्लॉक क्षेत्र की 42 ग्राम पंचायतों में आरआरसी का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। संबंधित ग्राम पंचायतों को इन केंद्रों के नियमित संचालन के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी भी ग्राम पंचायत में आरआरसी बंद पाया जाता है, तो उसकी जांच कराते हुए आगामी 15 दिनों के भीतर उसे संचालित कराया जाएगा। -अरुण वर्मा, खंड विकास अधिकारी, बड़राव
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गांव में लाखों रुपये खर्च कर आरआरसी बनाया गया, लेकिन इसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। इससे गांव में जगह-जगह कूड़ा फैला रहता है। -अजीत यादव, भैरोपुर
आरआरसी कई गांवों में काफी दूर बनाया गया है। वहां तक पहुंचने के लिए सही रास्ता भी नहीं है। कचरा संग्रहण एवं निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने से पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ रहा है। -मोहिउद्दीन, रेयांव
आरआरसी पर हमेशा ताला लटका रहता है। गांव में कूड़े के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। छुट्टा पशु घूमते रहते हैं और बच्चे खेलते रहते हैं। -सत्यप्रकाश राय, मुहम्मदाबाद सिपाह
गांव में डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण नहीं हो रहा है। कचरा ढोने के लिए आए वाहन भी उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। इससे स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है और गांव में गंदगी बढ़ती जा रही है। -प्रियंका राय, पिड़ऊथ सिंहपुर