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Mau News: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी को दस साल की सजा
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विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) छांगुर राम ने नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म तथा गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में नामजद तीन लोगों में से संदीप कुमार को नाबालिग के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया। उसे 10 साल कारावास की सजा तथा 20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया।
अर्थदंड न देने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं अनिल कुमार और विद्या देवी को गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में दोषी पाते हुए परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए 3 माह तक सदाचार बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया गया।
मामला थाना सरायलखंसी क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के एक गांव निवासी वादी मुकदमा की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
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वादी का कथन था कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री अपनी बुआ के यहां काशीराम आवास में रहती थी। इस दौरान काशीराम आवास कॉलोनी निवासी संदीप कुमार ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
गर्भवती होने पर उसका गर्भपात करा दिया गया। जब इसकी शिकायत की गई तो अनिल कुमार और विद्या देवी ने उसे गाली दी और धमकी दी। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
न्यायालय में अभियोजन की ओर से कुल पांच गवाह प्रस्तुत कर अभियोजन पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह को प्रस्तुत कर यह तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद संदीप कुमार को दुष्कर्म के मामले में दोषी पाया। उसे 10 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये अर्थदंड दुष्कर्म के मामले में और 10 हजार रुपये अर्थदंड पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत लगाया गया।
अर्थदंड जमा होने पर 75 प्रतिशत राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया गया। वहीं अनिल कुमार और विद्या देवी को गाली-गलौज और धमकी के मामले में दोषी पाकर परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए 3 माह तक सदाचार बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया।
अर्थदंड न देने पर 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं अनिल कुमार और विद्या देवी को गाली-गलौज और धमकी देने के मामले में दोषी पाते हुए परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए 3 माह तक सदाचार बनाए रखने की शर्त पर रिहा कर दिया गया।
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मामला थाना सरायलखंसी क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, कोतवाली मुहम्मदाबाद गोहना क्षेत्र के एक गांव निवासी वादी मुकदमा की तहरीर पर एफआईआर दर्ज की गई थी।
वादी का कथन था कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री अपनी बुआ के यहां काशीराम आवास में रहती थी। इस दौरान काशीराम आवास कॉलोनी निवासी संदीप कुमार ने उसके साथ दुष्कर्म किया।
गर्भवती होने पर उसका गर्भपात करा दिया गया। जब इसकी शिकायत की गई तो अनिल कुमार और विद्या देवी ने उसे गाली दी और धमकी दी। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
न्यायालय में अभियोजन की ओर से कुल पांच गवाह प्रस्तुत कर अभियोजन पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह को प्रस्तुत कर यह तर्क दिया गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद संदीप कुमार को दुष्कर्म के मामले में दोषी पाया। उसे 10 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपये अर्थदंड दुष्कर्म के मामले में और 10 हजार रुपये अर्थदंड पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत लगाया गया।
अर्थदंड जमा होने पर 75 प्रतिशत राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया गया। वहीं अनिल कुमार और विद्या देवी को गाली-गलौज और धमकी के मामले में दोषी पाकर परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देते हुए 3 माह तक सदाचार बनाए रखने की शर्त पर रिहा किया गया।