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Mau News: डायरिया और उल्टी-दस्त के मरीजों अस्पतालों के वार्ड फुल, मेडिकल कॉलेज में एक हफ्ते में 276 भर्ती
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कल्पनाथ राय मेडिकल कॉलेज में डायरिया के भर्ती मरीज
- फोटो : 1
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मऊ। जनपद में बारिश के बाद अब निकल रही धूप से उमस भरी गर्मी लोगों को बीमार बना रही है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग की ओपीडी में उल्टी-दस्त व डायरिया और पेट की बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। शनिवार को जिला अस्पताल में 200 तो मेडिकल कॉलेज में 158 मरीज पहुंचे थे। वहीं 18 मरीज डायरिया से पीड़ित मिले, जिन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। बीते एक सप्ताह में डायरिया के 276 मरीज अकेले मेडिकल कॉलेज में तो जिला अस्पताल में 100 से अधिक मरीज भर्ती हुए हैं।
शनिवार को कल्पनाथ राय मेडिसिन विभाग की ओपीडी में 158 मरीज पहुंचे। इनमें 48 फीसदी मरीज पेट दर्द व उल्टी-दस्त के पहुंचे। वहीं 55 मरीजों में पेट दर्द व उल्टी-दस्त की समस्या रही। जबकि 15 मरीजों को डायरिया के चलते भर्ती किया गया। मेडिसिन विभाग के डॉ. सुमित आर्या ने बताया कि बीते सात दिन में वायरल फैलने से सर्दी, जुकाम व बुखार के दस फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। अब तक जहां 60 से 70 मरीज आ रहे थे, जो अब 90 से 100 तक पहुंच गए हैं।बताया कि उमस से डिहाइड्रेशन की स्थिति बन रही है। पानी की कमी होने से लोगों में डायरिया की समस्या हो रही है। प्रतिदिन 10 से 12 उल्टी-दस्त के मरीज भर्ती हो रहे हैं। इससे वार्ड भी फुल चल रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बारिश होने से पानी दूषित हो गया है। वर्तमान में साफ-सफाई की अनदेखी भारी पड़ रही है। बासी खाना खाने से बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में बचाव के लिए स्वच्छता पर ध्यान दें। साफ पानी पीने व खान-पान में संयम बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिक पानी पिएं।
खुद से डॉक्टरी करना भी पड़ रहा है खतरनाक
मऊ। मेडिकल कॉलेज के डॉ. फक्रे आलम ने बताया कि बारिश और नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हर दिन 40 से 50 मरीज जो कि दूषित पानी, दस्त और डिहाइड्रेशन के साथ किडनी इन्फेक्शन की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।इनमें से अधिकतर मरीज पहले यूरिन इन्फेक्शन, उल्टी या दस्त से पीड़ित रहे हैं। समय पर सही इलाज न मिलने और बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मनमर्जी से दवाइयां लेने के कारण लोग खुद ही किडनी की गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। साधारण इन्फेक्शन को सही इलाज न मिलने के कारण मरीज गंभीर बना लेते हैं, जिससे यह संक्रमण किडनी तक पहुंच जाता है।
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किडनी के मरीजों के लिए तीन गुना बढ़ा खतरा
मऊ। सीएमओ डॉ. पंकज कुमार का कहना है कि बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस बहुत तेजी से पनपते हैं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण होने वाले संक्रमण का सीधा और घातक असर किडनी पर पड़ता है। लगातार दस्त और उल्टी होने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की भारी कमी हो जाती है, जिससे किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे मरीज जो पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, उनके लिए यह खतरा 2 से 3 गुना तक बढ़ जाता है।बताया कि पेशाब में जलन होना, कम पेशाब आना, तेज बुखार आना, कमर में दर्द होना, शरीर में अत्यधिक कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती दौर में ही सही इलाज मिलने से इस संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। लोगों को बाहर के खान-पान से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और खुद को भी बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं देनी चाहिए।
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शनिवार को कल्पनाथ राय मेडिसिन विभाग की ओपीडी में 158 मरीज पहुंचे। इनमें 48 फीसदी मरीज पेट दर्द व उल्टी-दस्त के पहुंचे। वहीं 55 मरीजों में पेट दर्द व उल्टी-दस्त की समस्या रही। जबकि 15 मरीजों को डायरिया के चलते भर्ती किया गया। मेडिसिन विभाग के डॉ. सुमित आर्या ने बताया कि बीते सात दिन में वायरल फैलने से सर्दी, जुकाम व बुखार के दस फीसदी मरीज बढ़ गए हैं। अब तक जहां 60 से 70 मरीज आ रहे थे, जो अब 90 से 100 तक पहुंच गए हैं।बताया कि उमस से डिहाइड्रेशन की स्थिति बन रही है। पानी की कमी होने से लोगों में डायरिया की समस्या हो रही है। प्रतिदिन 10 से 12 उल्टी-दस्त के मरीज भर्ती हो रहे हैं। इससे वार्ड भी फुल चल रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि बारिश होने से पानी दूषित हो गया है। वर्तमान में साफ-सफाई की अनदेखी भारी पड़ रही है। बासी खाना खाने से बीमारियां बढ़ रही हैं। ऐसे में बचाव के लिए स्वच्छता पर ध्यान दें। साफ पानी पीने व खान-पान में संयम बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिक पानी पिएं।
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खुद से डॉक्टरी करना भी पड़ रहा है खतरनाक
मऊ। मेडिकल कॉलेज के डॉ. फक्रे आलम ने बताया कि बारिश और नमी के कारण बैक्टीरिया और वायरस संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हर दिन 40 से 50 मरीज जो कि दूषित पानी, दस्त और डिहाइड्रेशन के साथ किडनी इन्फेक्शन की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।इनमें से अधिकतर मरीज पहले यूरिन इन्फेक्शन, उल्टी या दस्त से पीड़ित रहे हैं। समय पर सही इलाज न मिलने और बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से मनमर्जी से दवाइयां लेने के कारण लोग खुद ही किडनी की गंभीर बीमारियों को न्योता दे रहे हैं। साधारण इन्फेक्शन को सही इलाज न मिलने के कारण मरीज गंभीर बना लेते हैं, जिससे यह संक्रमण किडनी तक पहुंच जाता है।
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किडनी के मरीजों के लिए तीन गुना बढ़ा खतरा
मऊ। सीएमओ डॉ. पंकज कुमार का कहना है कि बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस बहुत तेजी से पनपते हैं। दूषित पानी और अस्वच्छ भोजन के कारण होने वाले संक्रमण का सीधा और घातक असर किडनी पर पड़ता है। लगातार दस्त और उल्टी होने से शरीर में पानी और आवश्यक लवणों की भारी कमी हो जाती है, जिससे किडनी की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे मरीज जो पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, उनके लिए यह खतरा 2 से 3 गुना तक बढ़ जाता है।बताया कि पेशाब में जलन होना, कम पेशाब आना, तेज बुखार आना, कमर में दर्द होना, शरीर में अत्यधिक कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत किसी योग्य डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती दौर में ही सही इलाज मिलने से इस संक्रमण को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। लोगों को बाहर के खान-पान से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और खुद को भी बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी प्रकार की एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं देनी चाहिए।