डॉक्टर्स डे विशेष: सफेद कोट की विरासत, चार पीढ़ियों तक मेरठ के चिकित्सक परिवारों में जिंदा है सेवा का संकल्प
डॉक्टर्स डे पर पढ़िए मेरठ के उन चिकित्सक परिवारों की प्रेरक कहानी, जहां चिकित्सा केवल पेशा नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सेवा की विरासत है। चार पीढ़ियों तक समाज की सेवा करने वाले डॉक्टर परिवार आज भी नई मिसाल कायम कर रहे हैं।
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मेरठ की धरती पर ऐसे कई चिकित्सक परिवार हैं, जहां स्टेथोस्कोप केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी सौंपी जाने वाली विरासत है। किसी घर में दादा ने इलाज की शुरुआत की, पिता ने उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अब बेटे-बेटियां आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के साथ उसी सेवा-संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।
लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज और शहर के सौ से अधिक अत्याधुनिक अस्पताल लाखों मरीजों के उपचार का आधार बने हुए हैं। डॉक्टर्स डे पर ऐसे परिवार यह साबित करते हैं कि चिकित्सा केवल रोजगार नहीं, बल्कि समाज के प्रति आजीवन समर्पण का संस्कार है।
बच्चों की मुस्कान के लिए समर्पित उपाध्याय परिवार
बाल रोग चिकित्सा में उपाध्याय परिवार का नाम विशेष सम्मान से लिया जाता है। मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विभागाध्यक्ष रहे डॉ. अमित उपाध्याय पिछले लगभग ढाई दशकों से बच्चों के उपचार से जुड़े हैं। यह सेवा उन्हें विरासत में मिली। उनके पिता डॉ. विनय उपाध्याय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित बाल रोग विशेषज्ञ रहे, जिन्होंने केजीएमयू, लखनऊ से शिक्षा प्राप्त करने के बाद एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में लंबे समय तक सेवाएं दीं।
उनकी माता डॉ. शोभा उपाध्याय और पत्नी डॉ. अनुपमा उपाध्याय स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। डॉ. अमित उपाध्याय ने एलएलआरएम से एमबीबीएस, सफदरजंग अस्पताल से एमडी तथा एम्स, नई दिल्ली से डीएम की उपाधि प्राप्त की। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न और दिल्ली के प्रतिष्ठित अस्पतालों में कार्य करने के बाद वे वापस मेरठ लौट आए। उनका मानना है कि विदेश में अवसर अधिक थे, लेकिन अपने लोगों की सेवा करने का संतोष कहीं बड़ा है। अब उनके दोनों बेटे अर्नव और अनन्य भी चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और परिवार की तीसरी पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
आंखों की रोशनी बचाने का मिशन बना मित्थल परिवार
नेत्र चिकित्सा में मील का पत्थर हैं डॉ. संदीप मित्थल। मेडिकल कॉलेज में कॉर्निया बैंक और आई बैंक की स्थापना से लेकर आधुनिक माइक्रोइन्सिजन फैको, एक्टिव फ्लूडिक्स सिस्टम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रोबोटिक तकनीक से मोतियाबिंद सर्जरी तक, उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में कई नए आयाम स्थापित किए।
1200 से अधिक नेत्रहीनों को दृष्टि दिलाने का उनका कार्य चिकित्सा सेवा की मिसाल माना जाता है। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन्स एंड सर्जन्स, ग्लास्गो द्वारा मानद एफआरसीएस से सम्मानित किया जा चुका है। अब उनकी पुत्री डॉ. कोपल मित्थल इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। लेसिक सर्जरी, मोतियाबिंद और रेटिना रोगों के उपचार में उनकी विशेषज्ञता नई पीढ़ी की आधुनिक चिकित्सा का प्रतिनिधित्व करती है। डा. मित्थल के पिता डा. केजी मित्थल भी नामचीन रहे हैं।
आधुनिक प्रजनन तकनीक से हजारों घरों में खुशियां
आईवीएफ और आईसीएसआई तकनीक के क्षेत्र में डॉ. सुनील जिंदल और डॉ. अंशु जिंदल का नाम देशभर में जाना जाता है। दंपती आधुनिक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से लगभग दस हजार दंपतियों की गोद भरने में सफल रहे हैं। डॉ. सुनील जिंदल बताते हैं कि चिकित्सा सेवा उनके परिवार की परंपरा रही है।
उनके पिता डॉ. डी.के. जिंदल बाल रोग विशेषज्ञ और माता डॉ. मधु जिंदल स्त्री रोग विशेषज्ञ थीं। वर्ष 1970 में उन्होंने मेरठ में शहर के शुरुआती बहुविशेषज्ञ अस्पतालों में शामिल जिंदल अस्पताल की स्थापना की। अब उनकी बेटी डॉ. निकिता भी एमडी गायनी की पढ़ाई पूरी कर परिवार के साथ चिकित्सा सेवा में सक्रिय हो गई हैं।
कोलकाता से मेरठ तक सेवा का अनूठा सफर
डॉ. सुब्रतो सेन का परिवार चिकित्सा सेवा का ऐसा उदाहरण है, जिसकी जड़ें लगभग 170 वर्ष पुरानी हैं। उनके दादा डॉ. सुरोजित सेन जर्मनी से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के बाद कोलकाता लौटे, लेकिन मित्रों के आग्रह पर मेरठ आकर यहीं बस गए। गरीबों की सेवा उनके जीवन का ध्येय बन गई।
उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए डॉ. सुकुमार सेन और फिर डॉ. सुब्रतो सेन ने चिकित्सा सेवा को मानवता का माध्यम बनाया। आज भी डॉ. सुब्रतो सेन नाममात्र के शुल्क पर मरीजों का उपचार करते हैं। उनका कहना है कि मेरठ ने उन्हें इतना अपनापन दिया कि यह शहर ही उनका स्थायी घर बन गया।
चार पीढ़ियों से चिकित्सा सेवा में गुप्ता परिवार
मेरठ में चिकित्सा सेवा की समृद्ध परंपराओं में गुप्ता परिवार का नाम भी शामिल है। हेल्थ केयर के निदेशक डॉ. संजय गुप्ता के परिवार की चार पीढ़ियां चिकित्सा जगत में सक्रिय रही हैं। उनके पिता डॉ. रामप्रकाश गुप्ता, माता डॉ. चंद्रप्रभा गुप्ता, दादा डॉ. अंबा प्रसाद और नाना डॉ. लक्ष्मीनारायण मिश्र अपने समय के प्रतिष्ठित चिकित्सकों में गिने जाते रहे।
वर्तमान में उनकी पत्नी डॉ. रचना गुप्ता स्त्री रोग विशेषज्ञ तथा भाई डॉ. राजीव गुप्ता अस्थि रोग विशेषज्ञ हैं। इस परंपरा को अब चौथी पीढ़ी की डॉ. सांची गुप्ता आगे बढ़ा रही हैं। सुभारती मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस में नौ स्वर्ण पदक प्राप्त कर उन्होंने न केवल परिवार, बल्कि मेरठ का भी नाम रोशन किया है। दूसरी बेटी सरयू गुप्ता भी दून मेडिकल कॉलेज में अध्ययरत हैं।