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किसान आंदोलन में जान फूंकती महापंचायतें, खेत-खलिहानों से राजनीतिक हलचल तक, क्या बदलेंगी सियासी समीकरण

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 11 Feb 2021 09:32 PM IST
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Kisan Mahapanchayat: What political equations will change in west UP by mahapanchayat that revive the farmer movement
किसानों का सैलाब - फोटो : amar ujala

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का धरने पर डटे हैं। वहीं पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन में जान फूंकने की कोशिशों में लगातार महापंचायतों को दौर जारी है। एक तरफ इन महापंचायतों को किसानों के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इन्हें पश्चिमी यूपी की बदलती राजनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे जानें कैसे खेत-खलिहान से राजनीतिक हलचल तक आंदोलन को संजीवनी दे रही हैं ये महापंचायतें:-



26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड हिंसा के बाद किसान आंदोलन फीका पड़ता दिखाई देने लगा था, लेकिन धरने पर डटे राकेश टिकैत के आंसुओं ने कमजोर पड़ते आंदोलन को धार देने का काम किया। वहीं पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों में पंचायतों को दौर शुरू हो गया। अलग-अलग जिलों में राकेश टिकैत के समर्थन में आयोजित की जा रही किसान महापंचायतें किसान आंदोलन में जान फूंकने की कोशिशों में लगातार जुटी हुई हैं।

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Kisan Mahapanchayat: What political equations will change in west UP by mahapanchayat that revive the farmer movement
भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत, जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला

किसान महापंचायतों की शुरूआत राकेश टिकैत के गृह जनपद मुजफ्फरनगर से हुई। 30 जनवरी को हुई इस महापंचायत में किसानों की भारी भीड़ उमड़ी। गाजीपुर बॉर्डर पर राकेश टिकैत के समर्थन में इकट्ठा हुए किसानों को विपक्ष ने भी भरपूर समर्थन दिया। महापंचायत में जहां भाकियू की मंच हुंकार भरी। वहीं रालोद ने अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश की।

पंचायत में मोदी योगी सरकार को किसान विरोधी बताते हुए सभी विपक्षी दलों ने की किसान आंदोलन व राकेश टिकैत को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की गई। इस महापंचायत में उमड़ी भीड़ ने किसान आंदोलन को तो संजीवनी दी ही, साथ ही सियासी समीकरणों में उलटफेर के संकेत भी दिए।

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भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत, जयंत चौधरी - फोटो : अमर उजाला

इस पंचायत की खास बात यह थी कि आठ साल पहले जिले में भड़के दंगे के बाद पहली बार भाकियू के बैनर तले विपक्षी दलों ने गिले शिकवे भूलकर एक साथ मंच साझा किया। विपक्षी पार्टियों के बड़े मुस्लिम चेहरे भी मंच पर थे। भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने भी चौधरी अजित सिंह को हराने को अपनी भूल बताकर भाजपा के खिलाफ लामबंदी की कोशिश की। इन बदलते सियासी समीकरणों ने भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। 

उधर, बड़ौत के धरने पर रात के समय किसानों पर किए गए लाठीचार्ज और राकेश टिकैत के विरोध में बड़ौत तहसील में महापंचायत की गई। मुजफ्फरनगर महापंचायत की तरह ही बड़ौत महापंचायत में भी किसानों का सैलाब उमड़ पड़ा। युवा किसान हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचे। महापंचायत में पहुंचे किसानों में बीजेपी के खिलाफ आक्रोश दिखा।

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किसान पंचायत को संबोधित करते हुए जयंत चौधरी। - फोटो : अमर उजाला

जमीन पर बैठे रहे नेता, मंच से दहाड़े किसान नेता
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान संगठनों की कितनी मजबूत पकड़ है इसका नजारा 1 फरवरी को बिजनौर में हुई महापंचायत में देखने को मिला। ऐसा पहली बार हुआ कि जनप्रतिनिधि और राजनीतिक दलों के नेता जमीन पर बैठे रहे और किसान संगठनों के नेता मंच से खूब दहाड़े।

इस महापंचायत में नेताओं की राजनीति चमकाने की कोशिशों पर पानी फिर गया। सपा व कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों को इससे करारा झटका लगा। पंचायत में वक्ताओं ने राकेश टिकैत के आसुओं को देश की आंखें खोलने वाला बताया।

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पोस्टरों पर लिखा 'नो फारमर नो फूड' - फोटो : amar ujala

पंचायत में उमड़े किसान, तो शहर हुआ जाम
शामली के भैंसवाल में किसान महापंचायत हुई तो गांव को आने वाले तीनों रास्ते जाम हो गए। किसानों की भीड़ इतनी थी कि पुलिस को सुरक्षा के लिए गांव और आसपास के चौराहों को छावनी में तब्दील करना पड़ा।

गांव भैंसवाल की किसान महापंचायत में रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी केंद्र और यूपी की भाजपा सरकार पर खूब बरसे। कहा कि जो उंगली किसानों की तरफ उठेगी उसे तोड़ दिया जाएगा। सिंघु बॉर्डर पर हिंसा रची गई और यही सरकार गाजीपुर में करना चाहती थी, लेकिन चौधरी अजित सिंह के आगे आने से कामयाब नहीं हो सकी।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहा कि मोदीजी तुम्हें ही पीछे हटना होगा, हम तो पैदा ही जिद्दी हुए हैं। 

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