Meerut: आवारा कुत्तों को आतंक, एक करोड़ खर्च, नसबंदी बनी सिर्फ दिखावा, नगर निगम की नाकामी उजागर
मेरठ में आवारा कुत्तों की समस्या बेकाबू हो चुकी है। एक करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद नसबंदी योजना नाकाम साबित हो रही है। रोजाना हमले और अस्पतालों में रेबीज इंजेक्शन की लंबी कतारें हालात की गंभीरता बता रही हैं।
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मेरठ शहर में आवारा कुत्तों का आतंक किसी से छिपा नहीं है। गलियों, मोहल्लों और कॉलोनियों में घूमते बेसहारा कुत्ते रोजाना लोगों को काट रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमले आम हो चुके हैं। जिला अस्पताल में रेबीज इंजेक्शन के लिए लंबी कतारें इस बात की गवाही दे रही हैं कि हालात कितने भयावह हो चुके हैं। सवाल यह है कि जब शासन हर साल करीब एक करोड़ रुपये नगर निगम को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए दे रहा है फिर भी शहर की जनता आज भी दहशत में जी रही है।
नगर निगम मेरठ की ओर से परतापुर थाना क्षेत्र के शंकर नगर फेस-2 में एनीमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाया गया था। उद्देश्य था कुत्तों की नसबंदी कर उनकी संख्या पर नियंत्रण लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। बुधवार को अमर उजाला टीम के निरीक्षण में यह साफ हो गया कि यह सेंटर सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है। सेंटर में प्रवेश तक के लिए कर्मचारियों से जद्दोजहद करनी पड़ी। अंदर हालात और भी चिंताजनक थे।
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न्यायालय भी गंभीर
न्यायालय भी लगातार बढ़ती घटनाओं को लेकर गंभीर है, लेकिन नगर निगम की कार्यप्रणाली में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा। एक करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अगर शहर सुरक्षित नहीं है, तो जवाबदेही तय होनी चाहिए। कब तक मेरठ की जनता नगर निगम की लापरवाही की कीमत अपनी जान और सुरक्षा से चुकाती रहेगी
