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Meerut: SC का सख्त रुख-मानव जीवन कीमती, सुरक्षा से समझौता नहीं, आज अतुल प्रधान पहुंचे धरनास्थल

Wed, 15 Jul 2026 11:49 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 15 Jul 2026 11:49 AM IST
सार

मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण पर सख्त रुख अपनाते हुए 44 सील भवनों को ध्वस्त करने के आदेश दिए। ईडब्ल्यूएस मकानों को भी राहत नहीं मिली।

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Meerut: Supreme Court Takes Tough Stand on Central Market Case, Atul Pradhan Reaches Protest Site
सेंट्रल मार्केट मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवासीय भवनों में नर्सिंग होम, बैंक, स्कूल तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने कहा कि अवैध निर्माण को किसी भी आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता। मानव जीवन बहुमूल्य है और सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जा सकता। 

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लोकेश खुराना बनाम राजेंद्र बड़जात्या मामले की सुनवाई के दौरान आवास एवं विकास परिषद की ओर से अदालत को बताया गया कि 128 मकानों में पूरी तरह सेटबैक छोड़ दिया गया है, जबकि 201 मकानों में 60 से 70 प्रतिशत तक सेटबैक अनुपालन की कार्रवाई पूरी हो चुकी है। परिषद ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मकानों को राहत देने का अनुरोध किया लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। 
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परिषद की ओर से बताया गया कि शास्त्रीनगर स्कीम नंबर-7 में 25 से 40 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाले 328 मकान हैं। इनमें से कुछ मकानों को कंपाउंडिंग के दायरे में लाने की संभावना जताई गई। 
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Meerut: Supreme Court Takes Tough Stand on Central Market Case, Atul Pradhan Reaches Protest Site
सेंट्रल मार्केट विवाद - फोटो : अमर उजाला

आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों को किस आधार पर अनुमति दी 
परिषद ने अदालत को बताया कि कई छोटे मकानों में लोग कपड़े प्रेस करने, सब्जी बेचने या किराना जैसी गतिविधियों से आजीविका चला रहे हैं। इस पर खंडपीठ ने पूछा कि आवासीय क्षेत्र में ऐसी गतिविधियों को किस आधार पर अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने कंपाउंडिंग का आधार भी स्पष्ट करने को कहा।

न्यायाधीशों ने टिप्पणी की कि यदि एक मामले में कंपाउंडिंग की अनुमति दी गई तो अन्य लोग भी उसी आधार पर राहत मांगेंगे, जिसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने दिल्ली के मालवीय नगर और हाल में लखनऊ में हुई कोचिंग सेंटर से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख करते हुए किसी भी प्रकार की रियायत देने से इनकार कर दिया।

सपा विधायक अतुल प्रधान पहुंचे
सपा विधायक अतुल प्रधान आज सेंट्रल मार्केट पहुंचे और महिलाओं व व्यापारियों से बात की। महिलाएं बोलीं कि कि पहले कारोबार बंद हुआ और अब घरों पर संकट खड़ा हो गया है। आदेश की जानकारी मिलने के बाद कई महिलाएं भावुक हो गईं। देर शाम कुछ महिलाओं ने अपना धरना भी समाप्त कर दिया। महिलाओं का कहना है कि वर्षों की मेहनत और जमा-पूंजी से उन्होंने अपने घर और छोटे-छोटे कारोबार खड़े किए थे। पहले दुकानों पर ताले लगे और अब मकानों पर कार्रवाई की आशंका से परिवारों के सामने भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। 

Meerut: Supreme Court Takes Tough Stand on Central Market Case, Atul Pradhan Reaches Protest Site
सेंट्रल मार्केट विवाद - फोटो : अमर उजाला

अवैध निर्माण पर सख्त टिप्पणी
खंडपीठ ने कहा कि पिछली सुनवाई में भी इस मामले को आंखें खोलने वाला बताया गया था। अदालत ने प्रमुख सचिव को अवैध निर्माणों को चिह्नित कर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और कहा कि यह केवल मेरठ का नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। परिषद की ओर से यह भी बताया गया कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए बनाए गए 40 मकानों में मूल रूप से कोई सेटबैक नहीं था, लेकिन बाद में उनमें ऊपरी मंजिलों का निर्माण करा लिया गया। याचिकाकर्ता लोकेश खुराना ने बताया कि अदालत ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी आधार पर ऐसे मामलों में राहत नहीं दी जा सकती।

कई स्थानों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप
शास्त्रीनगर आवासीय योजना संख्या-7 में आवासीय और व्यावसायिक दोनों संपत्तियां शामिल हैं। विभाग द्वारा तैयार ले-आउट में 230 व्यावसायिक भूखंड निर्धारित किए गए थे। योजना में 6379 संपत्तियां हैं, जिनमें 5409 का वास्तविक उपयोग हो रहा है। आरोप है कि कई व्यावसायिक प्लॉटों पर सेटबैक छोड़े बिना शोरूम और कॉम्प्लेक्स बना दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ऐसे निर्माणों पर भी कार्रवाई हो सकती है। स्कीम नंबर-7 के अंतर्गत सेक्टर-1 से लेकर सेक्टर-13 तक का क्षेत्र शामिल है। सेक्टर-2 में सबसे अधिक 1325 भवन हैं, जिनमें 985 का वास्तविक उपयोग हो रहा है, जबकि 293 भवनों में परिवर्तित उपयोग किया जा रहा है।

इसी सेक्टर में सर्वाधिक 47 व्यावसायिक प्लॉट हैं। सेक्टर-3 में कुल 960 आवासीय संपत्तियां हैं, जिनमें 813 का वास्तविक उपयोग हो रहा है, 132 परिवर्तित उपयोग में हैं। यहां 15 व्यावसायिक प्लॉट हैं। योजना के सभी सेक्टरों में 6379 आवासीय भवन हैं, जिनमें 5409 का वास्तविक उपयोग है। वहीं 293 भवनों में परिवर्तित उपयोग दर्ज है। 

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सेंट्रल मार्केट विवाद - फोटो : अमर उजाला

अदालत के सख्त रुख से राहत की आस टूटी 
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के सेक्टर-2 में पिछले 89 दिनों से महिलाएं अपने घरौंदे बचाने की उम्मीद लेकर धरने पर बैठी थीं। चिलचिलाती धूप हो या बारिश, उनका हौसला नहीं डिगा। रोजाना धार्मिक अनुष्ठानों के साथ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से भी राहत का रास्ता निकालने की कोशिशें जारी रहीं लेकिन मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं।

धरने के 89वें दिन मंगलवार सुबह महिलाओं ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और दोपहर में सुंदरकांड का आयोजन कर राहत की प्रार्थना की। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट का आदेश सामने आया जिसके बाद महिलाओं और व्यापारियों की आखिरी आस भी टूट गई। कई महिलाएं भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। फैसले के बाद लोगों में गुस्सा भी देखने को मिला और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की गई।  

अल्प और दुर्बल आय वर्ग के परिवारों पर सबसे ज्यादा असर
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अल्प और दुर्बल आय वर्ग के हजारों परिवार सीधे प्रभावित होंगे। स्कीम नंबर-7 के अंतर्गत सेक्टर-1 से 13 तक 50 वर्ग मीटर तक क्षेत्रफल वाले 249 भवन हैं, जबकि 51 से 100 वर्ग मीटर तक के 222 भवन मौजूद हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इन मकानों में करीब तीन हजार की आबादी निवास करती है और अधिकांश मकानों में दो से तीन परिवार रह रहे हैं।

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मेरठ सेंट्रल मार्केट, ध्वस्तीकरण कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला

क्या होता है सेटबैक?
सेटबैक वह अनिवार्य खुला स्थान होता है जो भवन और प्लॉट की सीमा के बीच छोड़ा जाता है। यह दूरी भवन के आगे, पीछे अथवा किनारों पर निर्धारित नियमों के अनुसार रखी जाती है। इसका उद्देश्य भवनों में पर्याप्त हवा और प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित करना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव कार्यों के लिए आवश्यक स्थान उपलब्ध कराना होता है। भवन निर्माण नियमों के तहत नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों द्वारा सेटबैक संबंधी स्पष्ट मानक निर्धारित किए जाते हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होता है। 

विशेष प्रावधान
नए ले-आउट में कोने वाले भूखंडों पर पार्श्व (साइड) सेटबैक अग्रभाग (फ्रंट) सेटबैक के बराबर रखा जाएगा। पूर्व अनुमोदित ले-आउट में यदि सेटबैक निर्धारित नहीं है तो 500 वर्ग मीटर तक के कोने वाले भूखंडों पर न्यूनतम 1.5 मीटर पार्श्व सेटबैक अनिवार्य होगा। इससे अधिक क्षेत्रफल होने पर निर्धारित तालिका के अनुसार सेटबैक लागू होगा।

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