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सपा का मिशन 2027: मेरठ की सातों सीटों पर मंथन, टिकट को लेकर खींचतान-दावेदारों की लंबी लिस्ट; सियासी हलचल तेज

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 15 May 2026 10:52 AM IST
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सार

मिशन 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी मेरठ की सातों विधानसभा सीटों पर गहन मंथन कर रही है। संभावित उम्मीदवारों की सूची लखनऊ पहुंच चुकी है और आंतरिक सर्वे के आधार पर टिकट तय किए जाने की चर्चा है।

SP Mission 2027: Intense Deliberations Over Candidates on All Seven Assembly Seats in Meerut
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

उत्तर प्रदेश की सियासत में क्रांतिधरा मेरठ हमेशा से सत्ता की चाबी माना जाता रहा है। आगामी चुनाव देखते हुए समाजवादी पार्टी ने अपनी रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है। 

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सपा के राजनीतिक गलियारों से जो बातें छनकर आ रही हैं उनमें यह है कि अगस्त के महीने में अखिलेश यादव अपना मेरठ कार्ड खोल सकते हैं ताकि प्रत्याशियों को मतदाताओं के बीच अपनी पैठ जमाने का समय मिल सके। साथ ही टिकट को लेकर आपसी खींचतान भी खत्म हो जाए और प्रत्याशी मजबूती से चुनाव लड़ सकें।

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अगले साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। जनवरी-फरवरी में आचार संहिता लग सकती है। जिले की सातों विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर सुगबुगाहट चरम पर है ।


संभावित दावेदारों की सूची लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पहुंच चुकी है। इस बार समाजवादी पार्टी ने टिकट वितरण की प्रक्रिया में थोड़ा बदलाव किया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि टिकट के लिए आंतरिक सर्वे कराया जा रहा है कि कौन किस पार्टी से जीत सकता है या सबसे मजबूती से चुनाव लड़ सकता है। यही टिकट वितरण का मुख्य आधार बनाया जाएगा।

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पुराने चेहरे या नया प्रयोग
मेरठ की सातों सीटों (मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण, मेरठ कैंट, किठौर, हस्तिनापुर, सरधना और सिवालखास) पर सपा के भीतर इस बार जबरदस्त होड़ है। पार्टी के वो पुराने दिग्गज जो पिछले कई चुनावों से सक्रिय हैं, अपनी निष्ठा और अनुभव की दुहाई दे रहे हैं।

तीन सीटों पर पुराने दिग्गजों का दावा सबसे मजबूत है। वर्तमान में सपा के विधायक हैं। मेरठ दक्षिण को लेकर असमंजस है। यहां से पिछली बार आदिल चौधरी मजबूती से चुनाव लड़े थे। हालांकि वह भाजपा के सोमेंद्र तोमर से हार गए थे।

मेरठ से निकलेगा जीत का रास्ता
अखिलेश यादव जानते हैं कि अगर मेरठ की सातों सीटों पर सही समीकरण साध लिए गए तो इसका असर पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ेगा। यही कारण है कि टिकट वितरण में जल्दबाजी के बजाय फूंक-फूंक कर कदम रखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जुलाई की इस सियासी तपिश में किसका टिकट कटता है और किसके सिर पर अखिलेश यादव अपना भरोसा जताते हुए चुनावी मैदान में उतारते हैं।

हस्तिनापुर, सिवालखास और कैंट पर टिकीं सबकी नजरें
मेरठ की हस्तिनापुर, सिवालखास और कैंट सीट पर टिकट की दावेदारी दिलचस्प है। हस्तिनापुर सीट पर पूर्व मंत्री प्रभुदयाल वाल्मीकि, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, सपा के टिकट पर मेयर का चुनाव लड़ीं दीपू मनोठिया और प्रशांत गौतम के मजबूती से दावेदारी ठोक रहे हैं।

सिवालखास पर सम्राट मलिक, गौरव चौधरी, नदीम चौहान और वसीम राजा का दावा है। इस सीट पर पहले सपा-रालोद गठबंधन से गुलाम मोहम्मद लडे़ थे और जीते थे। इस बार रालोद का भाजपा से गठबंधन है। कैंट सीट पर दावेदारी ज्यादा नहीं है। कहा जा रहा है कि सपा का कांग्रेस से गठबंधन होगा, यह सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी।

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