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Meerut News: सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से समाप्त हुआ मेरठ कॉलेज प्राचार्य विवाद, प्रो. युद्धवीर सिंह ही रहेंगे प्राचार्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए मेरठ कॉलेज के प्राचार्य पद को लेकर चल रहे लंबे न्यायिक विवाद का अंत कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने डॉ. मनोज रावत की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि प्रो. युद्धवीर सिंह ही मेरठ कॉलेज के वैध प्राचार्य बने रहेंगे।
बता दें कि उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-49 के तहत प्रदेश में प्राचार्यों की नियुक्तियां की गई थीं। डॉ. मनोज रावत का नाम मुख्य चयन सूची में शामिल नहीं था, जबकि अतिरिक्त चयन सूची में उनका स्थान 59वां था। उन्हें बलिया स्थित बजरंग पीजी कॉलेज आवंटित किया गया था, लेकिन उन्होंने वहां कार्यभार ग्रहण नहीं किया। बाद में मेरठ कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. सच्चिदानंद शर्मा के त्यागपत्र देने के पश्चात डॉ. रावत ने निदेशालय में आवेदन देकर मेरठ कॉलेज में नियुक्ति की मांग की। जबकि चयन संस्तुति नियमावली में आवंटित महाविद्यालय बदलने का कोई प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा उन्हें मेरठ कॉलेज आवंटित कर दिया गया और अक्टूबर 2024 में उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया।
मेरठ कॉलेज मेरठ के प्रेस प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज के अनुसार, मेरठ कॉलेज प्रबंधन द्वारा जारी नियुक्ति पत्र में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि उनकी नियुक्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के अधीन रहेगी। बाद में इस नियुक्ति को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जहां फरवरी 2025 में न्यायालय ने निदेशालय की संस्तुति और कॉलेज प्रबंधन के नियुक्ति पत्र दोनों को अवैध करार दिया। इसके बाद डॉ. रावत ने डबल बेंच में अपील की, लेकिन वहां भी उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई। मामला मई 2025 में सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, जहां लंबी सुनवाई के बाद मंगलवार को न्यायालय ने डॉ. मनोज रावत की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही मेरठ कॉलेज के प्राचार्य पद को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया।
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मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल और सचिव विवेक कुमार गर्ग ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया। वरिष्ठ सदस्य संजीवेश्वर प्रकाश एवं जयवीर सिंह ने कॉलेज पहुंचकर प्रो. युद्धवीर सिंह को बधाई दी।
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मेरठ। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए मेरठ कॉलेज के प्राचार्य पद को लेकर चल रहे लंबे न्यायिक विवाद का अंत कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने डॉ. मनोज रावत की याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि प्रो. युद्धवीर सिंह ही मेरठ कॉलेज के वैध प्राचार्य बने रहेंगे।
बता दें कि उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-49 के तहत प्रदेश में प्राचार्यों की नियुक्तियां की गई थीं। डॉ. मनोज रावत का नाम मुख्य चयन सूची में शामिल नहीं था, जबकि अतिरिक्त चयन सूची में उनका स्थान 59वां था। उन्हें बलिया स्थित बजरंग पीजी कॉलेज आवंटित किया गया था, लेकिन उन्होंने वहां कार्यभार ग्रहण नहीं किया। बाद में मेरठ कॉलेज के तत्कालीन प्राचार्य डॉ. सच्चिदानंद शर्मा के त्यागपत्र देने के पश्चात डॉ. रावत ने निदेशालय में आवेदन देकर मेरठ कॉलेज में नियुक्ति की मांग की। जबकि चयन संस्तुति नियमावली में आवंटित महाविद्यालय बदलने का कोई प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा उन्हें मेरठ कॉलेज आवंटित कर दिया गया और अक्टूबर 2024 में उन्होंने कार्यभार ग्रहण कर लिया।
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मेरठ कॉलेज मेरठ के प्रेस प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज के अनुसार, मेरठ कॉलेज प्रबंधन द्वारा जारी नियुक्ति पत्र में यह स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि उनकी नियुक्ति इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के अधीन रहेगी। बाद में इस नियुक्ति को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जहां फरवरी 2025 में न्यायालय ने निदेशालय की संस्तुति और कॉलेज प्रबंधन के नियुक्ति पत्र दोनों को अवैध करार दिया। इसके बाद डॉ. रावत ने डबल बेंच में अपील की, लेकिन वहां भी उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी गई। मामला मई 2025 में सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, जहां लंबी सुनवाई के बाद मंगलवार को न्यायालय ने डॉ. मनोज रावत की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही मेरठ कॉलेज के प्राचार्य पद को लेकर चल रहा विवाद समाप्त हो गया।
मेरठ कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल और सचिव विवेक कुमार गर्ग ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया। वरिष्ठ सदस्य संजीवेश्वर प्रकाश एवं जयवीर सिंह ने कॉलेज पहुंचकर प्रो. युद्धवीर सिंह को बधाई दी।