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Mirzapur News: घिरे बादल जमकर बरसे नहीं, सिर्फ बूंदाबांदी, चार डिग्री लुढ़का तापमान
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दोपहर बाद उड़ते धूल के गुब्बार के बीच फतहां के पास सड़क पर गुजरते राहगीर।-संवाद।
- फोटो : Archive
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आषाढ़ का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन जिले में मानसून अब भी मेहरबान नहीं हुआ है। बृहस्पतिवार की सुबह काले बादलों ने अच्छी बारिश की उम्मीद जगाई, पर कुछ देर की बूंदाबांदी के बाद मौसम साफ होने लगा।
दोपहर में चली धूलभरी हवा बादलों को अपने साथ उड़ा ले गई और खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सका। हल्की फुहार से केवल सड़कें गीली हुईं, जबकि खेत प्यासे ही रह गए। इससे धान की रोपाई का इंतजार कर रहे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
मौसम विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार की तुलना में दोनों तापमान में दो-दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। बादलों के कारण दिनभर तेज धूप से राहत मिली, लेकिन हवा में नमी बढ़ने से उमस बनी रही। जिले के अधिकांश गांवों में धान की नर्सरी तैयार है, लेकिन खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। जिन किसानों ने निजी नलकूपों से सिंचाई कर नर्सरी तैयार की है, वे अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो नर्सरी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
बारिश की कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है।
तालाब, पोखरे और अन्य जलस्रोत अभी भी पर्याप्त नहीं भर पाए हैं। कई क्षेत्रों में किसान महंगी सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। मौसम का यह मिजाज खरीफ सीजन की शुरुआत के लिए चुनौती बना हुआ है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि धान की समय पर रोपाई के लिए लगातार और पर्याप्त वर्षा आवश्यक है। यदि मानसून की यही स्थिति बनी रही तो फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिले के किसान अब अच्छी बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
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दोपहर में चली धूलभरी हवा बादलों को अपने साथ उड़ा ले गई और खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच सका। हल्की फुहार से केवल सड़कें गीली हुईं, जबकि खेत प्यासे ही रह गए। इससे धान की रोपाई का इंतजार कर रहे किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
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मौसम विभाग के अनुसार बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बुधवार की तुलना में दोनों तापमान में दो-दो डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। बादलों के कारण दिनभर तेज धूप से राहत मिली, लेकिन हवा में नमी बढ़ने से उमस बनी रही। जिले के अधिकांश गांवों में धान की नर्सरी तैयार है, लेकिन खेतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से रोपाई शुरू नहीं हो पा रही है। जिन किसानों ने निजी नलकूपों से सिंचाई कर नर्सरी तैयार की है, वे अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
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किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो नर्सरी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
बारिश की कमी का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है।
तालाब, पोखरे और अन्य जलस्रोत अभी भी पर्याप्त नहीं भर पाए हैं। कई क्षेत्रों में किसान महंगी सिंचाई करने को मजबूर हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। मौसम का यह मिजाज खरीफ सीजन की शुरुआत के लिए चुनौती बना हुआ है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि धान की समय पर रोपाई के लिए लगातार और पर्याप्त वर्षा आवश्यक है। यदि मानसून की यही स्थिति बनी रही तो फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिले के किसान अब अच्छी बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।