लाठी से लैपटॉप तक: आठ साल बाद यूपी पुलिस ट्रेनिंग में बदलाव, डिजिटल पुलिसिंग और स्मार्ट क्राउड कंट्रोल पर फोकस
यूपी पुलिस का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आठ साल बाद बदला गया है। अब इसमें डिजिटल पुलिसिंग, साइबर अपराध, फोरेंसिक साइंस और एआई को शामिल किया गया है। इसका मकसद पुलिसकर्मी भविष्य के अपराधों से प्रभावी ढंग से निपट सकें।
विस्तार
कभी लूट-चोरी और डकैती की वारदात पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती हुआ करती थी लेकिन अब अपराध की दुनिया मोबाइल स्क्रीन, लैपटॉप और डिजिटल नेटवर्क तक फैल चुकी है। साइबर ठगी, डिजिटल साजिशें और एआई के जरिए किए जा रहे अपराध पुलिस के सामने रोज नई चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं।
बदलते हालात और नए कानूनों को ध्यान में रखते हुए यूपी पुलिस का पाठ्यक्रम आठ साल बाद पूरी तरह नया रूप ले रहा है। अब सिपाही से लेकर सीओ स्तर तक के अधिकारी सिर्फ कानून और लाठी नहीं बल्कि डिजिटल जांच, फोरेंसिक साइंस, साइबर अपराध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बारीकियां भी पढ़ेंगे।
ट्रेनिंग पाठ्यक्रम 2018 के बाद बदला
जिससे भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिसकर्मी हर मोर्चे पर एक कदम आगे रहेंगे। उत्तर प्रदेश पुलिस का ट्रेनिंग पाठ्यक्रम 2018 के बाद बदला गया है। इन आठ वर्षों में अपराध के तौर तरीके भी बदले हैं। नए कानून और पुलिस को अधिक आधुनिक बनाने के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। आउट डोर और इंडोर दोनों में ही बदलाव किया गया।
तकनीक आधारित जांच पर विशेष जोर
इंडोर ट्रेनिंग में परंपरागत विषयों के साथ डिजिटल पुलिसिंग, साइबर अपराध, फोरेंसिक साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डाटा एनालिसिस और तकनीक आधारित जांच पर विशेष जोर रहेगा। नए पाठ्यक्रम में पुलिस कर्मियों को यह भी सिखाया जाएगा कि डिजिटल साक्ष्य कैसे जुटाएं उन्हें सुरक्षित कैसे रखें और अदालत में कैसे प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें। आउट डोर में स्मार्ट पुलिसिंग तैयार की जाएगी। तकनीकी ढंग से भीड़ को कैसे नियंत्रित किया जाएगा।
टीम वर्क पर विशेष फोकस
कानून व्यवस्था, आधुनिक हथियार,तनाव प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल और टीम वर्क पर विशेष फोकस रहेगा। इसके अलावा देश के चर्चित कांड,चर्चित खुलासे और घटनाओं को भी शामिल किया गया। ताकि आने वाले पुलिस कर्मी समझ सकें कि इस घटना में कहां पुलिस की चूक रही और कहां पुलिस की तत्परता से बड़ी घटनाएं होने से रोकी जा सकती थीं। अप्रैल मई में आने वाले नए बैच इनकी बारीकियां समझ सकेंगे।
देश की जांच और सुरक्षा एजेंसियों के सुझाव भी शामिल
नए पाठक्रम में प्रशिक्षण संस्थानों, विशेषज्ञों, जांच और सुरक्षा एजेंसियों के सुझाव भी शामिल किए गए हैं। एनआईए, सीबीआई, एनसीबी, विजिलेंस,आईबी, आर्मी, बीएसएफ, आईटीबीपी समेत अन्य एजेंसियां कैसे कार्रवाई करती हैं यह भी सिपाही,दरोगा और सीओ पढ़ेंगे।
अचानक हो रहे विरोध-प्रदर्शन भी पुलिस के लिए चुनौती
धार्मिक और राजनीति आयोजन की संख्या और भीड़ में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। अचानक से होने वाले विरोध-प्रदर्शन और सोशल मीडिया से अफवाह फैलाने की घटनाएं सामने आईं हैं। इन सब से निपटने के लिए नए पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
नया पाठ्यक्रम पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम, कानूनी रूप से मजबूत और जनता के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। नए पाठ्यक्रम में प्रशिक्षण संस्थानों, विशेषज्ञों, देश की जांच और सुरक्षा एजेंसियों के सुझाव भी शामिल किए गए हैं। नए पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। -राजीव सभरवाल, डीजी ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश पुलिस
