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पुलिस पर हमला, फायरिंग कानून व्यवस्था को चुनाैती, ऐसे में नरमी असंभव : कोर्ट

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 29 Mar 2026 02:25 AM IST
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Attack on police, firing challenge law and order, leniency impossible: Court
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मुरादाबाद। बहुचर्चित मैनाठेर कांड में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि पुलिस चौकी और पीएसी की गाड़ियों को जलाना तथा तत्कालीन डीआईजी पर जानलेवा फायरिंग करना कानून व्यवस्था को खुली चुनौती है। पुलिसकर्मियों से मारपीट को भी अदालत ने गंभीर अपराध माना। फैसले में साफ कहा गया कि ऐसे मामलों में दोषियों के प्रति नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है।
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शनिवार को सजा सुनाए जाने से पहले अभियुक्तों के वकीलों ने अदालत से कम सजा देने की अपील की। उनका कहना था कि कई आरोपी बेहद गरीब हैं उनके छोटे-छोटे बच्चे हैं और घर में कमाने वाला कोई दूसरा सदस्य नहीं है। कमरुल और जाने आलम के वकील ने बताया कि जाने आलम पांच बच्चों का पिता है और उसके माता-पिता भी नहीं हैं। जबकि कमरुल के परिवार की आर्थिक स्थिति भी कमजोर है।
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कुछ अन्य आरोपियों के वकीलों ने यह भी कहा कि कुछ आरोपी बीमार हैं, कुछ पहले ही जेल में समय काट चुके हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वहीं सरकार की ओर से एडीजीसी ब्रजराज सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने मिलकर गंभीर हिंसक घटना को अंजाम दिया था। इस दौरान तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह और उनके पीआरओ रवि कुमार को चोटें आईं।
पुलिस चौकी और पीएसी की गाड़ियों में आग लगा दी गई, डीआईजी की पिस्टल और पीआरओ का मोबाइल लूट लिया गया और जिलाधिकारी की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को देखने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपियों के कृत्य से पूरे इलाके में डर और दहशत का माहौल बन गया था। अदालत ने साफ कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए यह मामला नरमी का नहीं, बल्कि कड़ी सजा देने का है।
इसके बाद अदालत ने सभी 16 दोषियों को दंगा, हत्या के प्रयास, आगजनी, डकैती, सरकारी कर्मचारियों पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में दोषी ठहराते हुए अलग-अलग अवधि की सजा और जुर्माना लगाया। आगजनी और डकैती जैसे गंभीर मामलों में सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
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