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जिस मुकदमे को सपा करा रही थी वापस, अदालत ने उसमें दोषियों को सुनाई सजा: पूर्व डीजीपी
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मुरदाबाद। पूर्व डीजीपी एवं राज्यसभा सांसद बृजलाल ने मैनाठेर बवाल के दोषियों को आजीवन कारावास की सजा के एलान का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सपा अपने कार्यकाल में इस मुकदमे को वापसी करने में जुटी थी लेकिन अदालत इस मामले में शुरुआत से गंभीर थी और उस वक्त की सरकार की ओर से दाखिल की गई अर्जी को खारिज करते हुए मुकदमे की सुनवाई जारी रखी थी।
उन्होंने कहा कि 2012 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही आईपीएस अफसर पर हमले की घटना को सपा सरकार मामूली मानने लगी थी। कुछ नेता और उनके समर्थकों को खुश करने के लिए सपा सरकार ने इस मुकदमे को वापस लेने का निर्णय लिया था लेकिन कोर्ट ने सपा की अर्जी खारिज कर दी थी। उसका ही नतीजा है कि आज अदालत ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उनका कहना है कि बाकी मुकदमों की भी दोबारा जांच की जाए ताकी मैनाठेर बवाल की साजिश रचने वाले आरोपी भी सलाखों के पीछे जाएं।
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धमकी और तबादलों भी नहीं डरे थे वादी रवि कुमार
मुरादाबाद। डीआईजी पर हमले के मामले में उनके पीआरओ रवि कुमार ने एफआईआर दर्ज कराई थी। रवि कुमार भी इस घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह भी भीड़ में फंस गए थे और डीआईजी के साथ ही रहे थे। उन्होंने बताया कि इस मुकदमे को वापस लेने के लिए उन पर तरह तरह से दबाव बनाए गए। कभी ट्रांसफर की धमकी दी गई तो कभी अन्य तरह की धमकी दी गई लेकिन उन्होंने उस मंजर को देखा। इस तरह भीड़ ने हमला किया था। अदालत के फैसले से बहुत खुश हैं।
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उन्होंने कहा कि 2012 में सत्ता परिवर्तन के साथ ही आईपीएस अफसर पर हमले की घटना को सपा सरकार मामूली मानने लगी थी। कुछ नेता और उनके समर्थकों को खुश करने के लिए सपा सरकार ने इस मुकदमे को वापस लेने का निर्णय लिया था लेकिन कोर्ट ने सपा की अर्जी खारिज कर दी थी। उसका ही नतीजा है कि आज अदालत ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उनका कहना है कि बाकी मुकदमों की भी दोबारा जांच की जाए ताकी मैनाठेर बवाल की साजिश रचने वाले आरोपी भी सलाखों के पीछे जाएं।
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धमकी और तबादलों भी नहीं डरे थे वादी रवि कुमार
मुरादाबाद। डीआईजी पर हमले के मामले में उनके पीआरओ रवि कुमार ने एफआईआर दर्ज कराई थी। रवि कुमार भी इस घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वह भी भीड़ में फंस गए थे और डीआईजी के साथ ही रहे थे। उन्होंने बताया कि इस मुकदमे को वापस लेने के लिए उन पर तरह तरह से दबाव बनाए गए। कभी ट्रांसफर की धमकी दी गई तो कभी अन्य तरह की धमकी दी गई लेकिन उन्होंने उस मंजर को देखा। इस तरह भीड़ ने हमला किया था। अदालत के फैसले से बहुत खुश हैं।