सेंट्रल मार्केट: ध्वस्तीकरण पर राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के पाले में डाली गेंद, कहा-करें विचार
मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण पर रोक नहीं लगाई है। अवैध कॉलोनियों के संबंध में राज्य सरकार को नीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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मेरठ के शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट से दुकानदारों को ध्वस्तीकरण को लेकर कोई सीधी राहत नहीं मिली है। कोर्ट ने अवैध कॉलोनियों के मामले में राज्य सरकार को नीति बनाने के निर्देश दिए हैं, जिसमें पुनर्वास के पहलू पर भी विचार किया जाएगा। मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
ध्वस्तीकरण को लेकर दुकानदारों को नहीं मिली राहत
शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले में व्यापारी नेता संजीव मित्तल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। बुधवार को सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कॉलोनियों के संबंध में राज्य सरकार को नीति बनाने के निर्देश दिए। हालांकि, व्यापारियों के मुताबिक आदेश में सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण पर कोई रोक या सीधी राहत नहीं दी गई है।
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44 भवनों को ध्वस्त करने के पहले ही दिए जा चुके हैं आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई की सुनवाई में 44 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। परिषद ने आठ अप्रैल को इन 44 भवनों को सील किया था। ये मूल रूप से आवासीय भवन हैं, जिनमें स्कूल, नर्सिंग होम, बैंक्वेट हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मिठाई की दुकान समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद परिषद ने इन भवनों का सर्वे कर सील खोल दी थी। इसके बाद कई आवंटी अपनी संपत्तियों में किए गए अवैध निर्माण को खुद हटाने में जुटे हैं। परिषद की ओर से विभिन्न योजनाओं में भी सर्वे कराया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संपत्तियों के मूल स्वरूप में किस तरह बदलाव किए गए हैं।
याचिका में सेंट्रल मार्केट का उल्लेख नहीं
आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के अनुसार, व्यापारी नेता संजीव मित्तल की ओर से दाखिल याचिका में सेंट्रल मार्केट, मेरठ या सेटबैक को लेकर कोई उल्लेख नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने अवैध कॉलोनियों के मामले में सरकार को नीति बनाने के निर्देश दिए हैं।सेंट्रल मार्केट के व्यापारी नेता अर्पित मोघा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से व्यापारियों को कोई खास राहत नहीं मिली है। उनके मुताबिक आदेश में सेंट्रल मार्केट का कहीं उल्लेख नहीं है, जबकि अवैध निर्माण को मूल स्वरूप में लाने के आदेश पहले से दिए जा चुके हैं।
21 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। इस दौरान सरकार की ओर से नीति और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल सेंट्रल मार्केट के दुकानदारों को ध्वस्तीकरण के आदेश पर कोई सीधी राहत नहीं मिली है।