UP: बदला तीज मनाने का अंदाज, झूले और लोकगीतों की जगह अब सेल्फी, रील और तीज पार्टियों का बढ़ा चलन
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कभी सावन की फुहारों के बीच गांव की चौपाल और घर के आंगन में पेड़ों की डाल पर झूला पड़ता था। तीज के गीतों के बीच महिलाएं और युवतियां सखियों के साथ घंटों झूला झूलतीं और लोकगीत गाकर त्योहार की खुशियां साझा करती थीं। समय बदला तो तीज मनाने का अंदाज भी बदल गया।
अब डीजे की धुन पर डांस, झूले के साथ मोबाइल फोन की सेल्फी, रील और फोटोशूट भी तीज की खुशी का हिस्सा बन गए हैं। शहरों में महिला संगठन, किटी ग्रुप, अपार्टमेंट और कॉलोनियों में तीज पार्टियों का आयोजन कर रहे हैं।
इनमें महिलाओं के लिए मेहंदी प्रतियोगिता सावन गीत, नृत्य और पारंपरिक परिधान प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। कई जगहों पर महिलाएं हरे रंग के परिधानों और सोलह शृंगार के साथ समूह में तस्वीरें खिंचवाकर इन पलों को यादगार बना रही हैं।
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पहले झूले के लिए तय होती थी जगह और समय
जाट कॉलोनी की रहने वाली सुषमा रानी ने बताया कि हमारे समय में घर के आसपास किसी बड़े पेड़ की मजबूत डाल पर झूला डाला जाता था। आसपास की महिलाएं और युवतियां एकत्र होकर झूला झूलतीं और सावन के लोकगीत गाती थीं। तीज केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं था, बल्कि मायके और ससुराल की महिलाओं के मिलने-जुलने और रिश्तों में मिठास बढ़ाने का अवसर भी था।
सावन शुरू होते ही करती थीं चूड़ियों की खरीदारी
गांधीनगर की रहने वाली शिक्षा शर्मा का कहना है कि सावन लगते ही महिलाएं तीज से पहले ही अपने परिधान और चूड़ियों की खरीदारी करती थीं। पेड़ पर झूला डालने की तैयारी भी पहले हो जाती थी। मायके से आई बेटियों और बहुओं के साथ तीज मनाने का अलग ही आनंद था। अब आयोजन बड़े हो गए हैं, लेकिन पहले जैसी सहज खुशी की याद आज भी आती है।
अपने अंदाज में मना रही हैं तीज पार्टी
नीतू का कहना है कि नई पीढ़ी इसे दोस्ती, मनोरंजन और अपनी संस्कृति से जुड़कर अपने अंदाज में मना रही है। झूले से सेल्फी तक पहुंची तीज आज भी महिलाओं के बीच उतनी ही लोकप्रिय है। किटी ग्रुप और महिला संगठन में पार्टी होती है। इसमें मेहंदी, गेम्स, डांस और फोटो सेशन भी होता है।
सोशल मीडिया ने यादें सहेजने का तरीका बदला
द्वारिकापुरी की रहने वाली दीपाली कौशिक का कहना है कि पहले तीज की यादें किस्सों में रहती थीं। आज के दौर में अब हम उन्हें फोटो और वीडियो के रूप में भी सहेज लेते हैं। हम हरे रंग के पारंपरिक कपड़े पहनते हैं, मेहंदी लगाते हैं और सावन के गीतों पर कार्यक्रम करते हैं।