Muzaffarnagar: सालिम हत्याकांड में दोषी शाहनवाज को मृत्युदंड, दो मामलों में हो चुकी आजीवन कारावास की सजा
तेजलहेड़ा के सालिम हत्याकांड में अदालत ने दोषी शाहनवाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। सालिम की हत्या 2000 में अपहरण के बाद फिरौती की रकम समय पर नहीं पहुंचने पर की गई थी। अभियुक्त को दो अन्य मामलों में पहले ही आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।
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मुजफ्फरनगर छपार थाना क्षेत्र के तेजलहेड़ा गांव से 27 साल पहले पांच लाख रुपये की फिरौती के लिए किसान सालिम की छुरी से गर्दन काटकर हत्या के मामले में दोषी बरला के शाहनवाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया। वारदात में पहले बेटे का अपहरण किया गया था लेकिन बाद में बदमाशों ने पिता की हत्या कर दी।
छपार के तेजलहेड़ा गांव निवासी आबाद, हारुण और मुकर्रम नौ दिसंबर 1999 की रात करीब आठ बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली में पॉपलर की लकड़ियां लादकर हरियाणा के यमुनानगर बेचने के लिए निकले थे। हारुण ट्रैक्टर चला रहा था। रजबहा पटरी पर पहुंचते ही तीन बदमाशों ने तमंचे से डराते हुए घेर लिया।
आबाद किसी तरह बचकर भाग निकला, जबकि हारुण और मुकर्रम का अपहरण कर लिया गया था। दो दिन बाद मुकर्रम को बदमाशों ने छोड़ दिया और हारुण के पिता सालिम को पांच लाख रुपये की रंगदारी के लिए चिट्ठी भेजी। वादी आबाद ने प्राथमिकी दर्ज कराई।
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मामले में नया मोड़ 19 जनवरी 2000 को आया। सालिम अपने परिवार के इलियास के साथ बदमाशों से मिलने लक्सर के पास जंगल में पहुंचे। बदमाशों ने उनकी मुलाकात हारुण से कराई। रुपयों का इंतजाम करने के लिए बदमाशों ने हारुण को छोड़ दिया और सालिम एवं इलियास को अपहरण कर बैठा लिया। फिरौती की रकम का इंतजार करने के बाद बदमाशों ने 25 जनवरी 2000 को सालिम की छुरी से गर्दन काटकर हत्या कर दी और शव को लक्सर के जंगल में फेंक दिया था।
करीब 25 दिन बाद 50 हजार रुपये की फिरौती वसूलकर इलियास को छोड़ा गया था। पुलिस जांच में बरला के सगे भाई शाहनवाज व शौकीन के अलावा भोकरहेड़ी के अहसान का नाम प्रकाश में आया। शौकीन और अहसान पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। शाहनवाज के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।
- 09 दिसंबर 1999 : हारुण व मुकर्रम का अपहरण।
- 11 दिसंबर 1999 : मुकर्रम बदमाशों से छूटकर लौटा।
- 15 दिसंबर 1999 : पांच लाख की रंगदारी की चिट्ठी।
- 19 जनवरी 2000 : बदमाशों ने हारुण को छोड़ा। सालिम-इलियास पकड़ा।
- 25 जनवरी 2000 : लक्सर में लाश मिलने की सूचना।
- 26 जनवरी 2000 : शव सालिम का निकला।
रकम पहुंचाने में हुई देरी से की गई सालिम की हत्या
तेजलहेड़ा के हारुण के अपहरण के मामले में फिरौती की चिट्ठी मिली तो पिता ठेकेदार सालिम, परिवार के इलियास और मुश्ताक के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर बदमाशों के बताए गए स्थान लक्सर के पास लाठ के जंगल में पहुंच गए। यहां बदमाशों से मुलाकात हुई।
सालिम ने कहा कि गारंटी के तौर पर वह और इलियास उनके पास रहेंगे, जबकि हारुण घर जाकर रुपयों का इंतजाम करेगा। हारुण घर लौट आया और सालिम व इलियास बदमाशों के पास रह गए थे। समय पर रकम नहीं पहुंची तो सालिम की हत्या कर दी गई।