{"_id":"69a5f1959bea1f4dd80abc49","slug":"passengers-of-tanda-area-are-troubled-due-to-lack-of-roadways-bus-stand-rampur-news-c-282-1-smbd1026-165525-2026-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur News: रोडवेज बस अड्डा न होने से टांडा क्षेत्र के यात्री परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur News: रोडवेज बस अड्डा न होने से टांडा क्षेत्र के यात्री परेशान
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
Updated Tue, 03 Mar 2026 01:52 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
टांडा। नगर में वर्षों से रोडवेज बस अड्डा न होने के कारण स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। टांडा से जिला मुख्यालय और बड़े शहरों के लिए सीधी सरकारी बस सेवा उपलब्ध न होने से यात्रियों को निजी बसों पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां मनमाना किराया वसूले जाने की शिकायतें हैं।
मुरादाबाद-बाजपुर मार्ग उत्तराखंड को जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा मार्ग माना जाता है। करीब 60 किलोमीटर लंबे इस मार्ग से अन्य रास्तों की तुलना में 25 से 30 किलोमीटर दूरी कम हो जाती है। इसी मार्ग पर टांडा नगर के अलावा दढियाल, मसवासी, सीकमपुर, बादली, मानपुर, डूंगरपुर और सिरसावा दोराहा जैसे कस्बे स्थित हैं, जिनकी कुल आबादी दो लाख से अधिक है।
इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद क्षेत्र में रोडवेज की नियमित बस सेवा उपलब्ध नहीं है। निजी बसों का संचालन भी यात्रियों की आवश्यकता के अनुरूप नहीं हो रहा है। सुबह छह बजे से शाम तक ही निजी बसें संचालित होती हैं, जबकि देर शाम मुरादाबाद से आने वाली बसें टांडा में ही यात्रियों को उतार देती हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।
*********
स्थानीय लोगों की पीड़ा
टांडा में न रोडवेज अड्डा है और न ही रोडवेज बसें चलती हैं। निजी बस संचालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं और यात्रियों की कोई सुनवाई नहीं है। -सिराजुल हसन, नगर निवासी
-- -
कारोबार के सिलसिले में बाहर जाना पड़ता है लेकिन रोडवेज न होने से पहले प्राइवेट बसों में धक्के खाकर किसी बड़े शहर पहुंचना पड़ता है, फिर आगे की यात्रा होती है। -हाजी मोहम्मद शकील, व्यापारी नेता
Trending Videos
मुरादाबाद-बाजपुर मार्ग उत्तराखंड को जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा मार्ग माना जाता है। करीब 60 किलोमीटर लंबे इस मार्ग से अन्य रास्तों की तुलना में 25 से 30 किलोमीटर दूरी कम हो जाती है। इसी मार्ग पर टांडा नगर के अलावा दढियाल, मसवासी, सीकमपुर, बादली, मानपुर, डूंगरपुर और सिरसावा दोराहा जैसे कस्बे स्थित हैं, जिनकी कुल आबादी दो लाख से अधिक है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद क्षेत्र में रोडवेज की नियमित बस सेवा उपलब्ध नहीं है। निजी बसों का संचालन भी यात्रियों की आवश्यकता के अनुरूप नहीं हो रहा है। सुबह छह बजे से शाम तक ही निजी बसें संचालित होती हैं, जबकि देर शाम मुरादाबाद से आने वाली बसें टांडा में ही यात्रियों को उतार देती हैं, जिससे लोगों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।
*********
स्थानीय लोगों की पीड़ा
टांडा में न रोडवेज अड्डा है और न ही रोडवेज बसें चलती हैं। निजी बस संचालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं और यात्रियों की कोई सुनवाई नहीं है। -सिराजुल हसन, नगर निवासी
कारोबार के सिलसिले में बाहर जाना पड़ता है लेकिन रोडवेज न होने से पहले प्राइवेट बसों में धक्के खाकर किसी बड़े शहर पहुंचना पड़ता है, फिर आगे की यात्रा होती है। -हाजी मोहम्मद शकील, व्यापारी नेता
