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Sant Kabir Nagar News: नशे की लत...किसी ने ले ली अपनों की जान तो किसी ने कर ली खुदकुशी
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संतकबीरनगर/धनघटा। नशे की प्रवृति लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही है। कहीं कोई नशे की लत में अपनों की जान ले रहा है तो कोई खुदकुशी कर रहा है। कोई हादसे का शिकार हो रहा है। इसके साथ ही नशा लोगों को कर्ज के दलदल में भी धकेल रहा है। दूसरी ओर नशे की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान काम नहीं आ रहे और सरकारी इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहा है। जिला अस्पताल के गैर-संचारी रोग केंद्र में नशे के आदि व्यक्तियों की काउंसिलिंग की जाती है। इलाज की स्थिति में उन्हें गोरखपुर और लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है।
नशे के आदी लोगों के जिले में अलग-अलग मामले सामने आए हैं। धनघटा संवाद के अनुसार शराब के आदी एक युवक ने एक वर्ष पहले मात्र 50 रुपये के लिए अपनी मां को मौत के घाट उतार दिया था। मां की हत्या के आरोप में युवक आज भी जेल में बंद है। पुलिस के मुताबिक धनघटा थाना क्षेत्र के परसहर पूर्वी गांव निवासी राजुल वर्ष 2025 में 18 नवंबर को अपनी मां शांति देवी से शराब पीने के लिए 50 रुपये की मांग किया। मां ने जब रुपये देने से मना किया तो ईंट से उसके पैर-सिर पर प्रहार कर दिया जिससे राजुल के मां की मौत हो गई। धनघटा क्षेत्र में बनने वाली कच्ची शराब का सेवन करने वालों की संख्या भी अधिक है। इसी तरह छह माह पहले मूडाडीहा गांव निवासी एक युवक नशे में धुत होकर अपनी मां को मारपीट कर अधमरा कर दिया था।
धर्मसिंहवा संवाद के अनुसार, थाना क्षेत्र के सुकरौली गांव में पिछले साल 7 नवंबर को एक युवक ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। बताया जाता है कि वह अपनी नानी से पैसे की मांग कर रहा था। पैसा न देने पर उसने घर में ही खुदकुशी कर ली थी। ग्रामीणों के मुताबिक युवक नशे में धुत रहता था और इसी के लिए वह अपनी नानी से पैसे मांग रहा था। पैसा न मिलने पर तनाव में आकर उसने खुदकुशी कर ली थी।
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हादसे में चली गई जान
सूर्योदय नशा मुक्ति केंद्र खलीलाबाद के प्रबंधक पीके सिंह के मुताबिक नई बाजार मेंहदावल निवासी राजेश साहनी आर्थिक तंगी के चलते कर्जदार हो गए। उनकी काउंसिलिंग की गई। धौरहरा निवासी भीमसेन की हादसे में जान चली गई।
गैर-संचारी रोग केंद्र में प्रतिमाह आते हैं 70-80 पीड़ित
जिला अस्पताल के गैर-संचारी रोग केंद्र में नशे के शिकार व्यक्तियों की काउसिंलिंग की जाती है। उन्हें इलाज की स्थिति में गोरखपुर और लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। कर्मियों के मुताबिक यहां इलाज व काउंसिलिंग के लिए प्रतिमाह 70 से 80 लोग आते हैं। इसमें परामर्श लेने वालों की संख्या अधिक रहती है। इलाज के लिए आने वालों की संख्या कम रहती है। काउंसिलिंग केंद्र में की जाती है, जबकि इलाज की स्थिति वाले लोगों को गोरखपुर और लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। कर्मियों के मुताबिक अभी यहां इलाज की व्यवस्था नहीं है।
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नशे के आदी लोगों के जिले में अलग-अलग मामले सामने आए हैं। धनघटा संवाद के अनुसार शराब के आदी एक युवक ने एक वर्ष पहले मात्र 50 रुपये के लिए अपनी मां को मौत के घाट उतार दिया था। मां की हत्या के आरोप में युवक आज भी जेल में बंद है। पुलिस के मुताबिक धनघटा थाना क्षेत्र के परसहर पूर्वी गांव निवासी राजुल वर्ष 2025 में 18 नवंबर को अपनी मां शांति देवी से शराब पीने के लिए 50 रुपये की मांग किया। मां ने जब रुपये देने से मना किया तो ईंट से उसके पैर-सिर पर प्रहार कर दिया जिससे राजुल के मां की मौत हो गई। धनघटा क्षेत्र में बनने वाली कच्ची शराब का सेवन करने वालों की संख्या भी अधिक है। इसी तरह छह माह पहले मूडाडीहा गांव निवासी एक युवक नशे में धुत होकर अपनी मां को मारपीट कर अधमरा कर दिया था।
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धर्मसिंहवा संवाद के अनुसार, थाना क्षेत्र के सुकरौली गांव में पिछले साल 7 नवंबर को एक युवक ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। बताया जाता है कि वह अपनी नानी से पैसे की मांग कर रहा था। पैसा न देने पर उसने घर में ही खुदकुशी कर ली थी। ग्रामीणों के मुताबिक युवक नशे में धुत रहता था और इसी के लिए वह अपनी नानी से पैसे मांग रहा था। पैसा न मिलने पर तनाव में आकर उसने खुदकुशी कर ली थी।
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हादसे में चली गई जान
सूर्योदय नशा मुक्ति केंद्र खलीलाबाद के प्रबंधक पीके सिंह के मुताबिक नई बाजार मेंहदावल निवासी राजेश साहनी आर्थिक तंगी के चलते कर्जदार हो गए। उनकी काउंसिलिंग की गई। धौरहरा निवासी भीमसेन की हादसे में जान चली गई।
गैर-संचारी रोग केंद्र में प्रतिमाह आते हैं 70-80 पीड़ित
जिला अस्पताल के गैर-संचारी रोग केंद्र में नशे के शिकार व्यक्तियों की काउसिंलिंग की जाती है। उन्हें इलाज की स्थिति में गोरखपुर और लखनऊ मेडिकल कॉलेज भेज दिया जाता है। कर्मियों के मुताबिक यहां इलाज व काउंसिलिंग के लिए प्रतिमाह 70 से 80 लोग आते हैं। इसमें परामर्श लेने वालों की संख्या अधिक रहती है। इलाज के लिए आने वालों की संख्या कम रहती है। काउंसिलिंग केंद्र में की जाती है, जबकि इलाज की स्थिति वाले लोगों को गोरखपुर और लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। कर्मियों के मुताबिक अभी यहां इलाज की व्यवस्था नहीं है।