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Sant Kabir Nagar News: दास्तानगोई से इतिहास, समाज, स्त्री के संघर्षों को किया जीवंत
संवाद न्यूज एजेंसी, संत कबीर नगर
Updated Fri, 30 Jan 2026 02:37 AM IST
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महोत्सव में डाॅक्टर सीमा मोदी द्वारा नाट्य मंचन किया गया-संवाद
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मगहर। कबीर मगहर महोत्सव की दूसरी शाम रंगमंच कलाकार, स्टेज परफॉर्मर व समाज सेविका सीमा मोदी के निर्देशन में 1857 आग और इंकलाब का जीवंत मंचन किया गया। जिसमें दास्तानगोई के माध्यम से इतिहास, समाज, स्त्री के संघर्षों के पन्नों को रंगमंच के माध्यम से जीवंत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में इंकलाब जिंदाबाद के नारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। किस्सागोई 1857 क्रांति आग और इंकलाब की कहानी सीमा मोदी और सौम्या आदित्री की ज़ुबानी प्रस्तुत की गई।
मगहर महोत्सव में सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी लखनऊ ने किस्सागोई के जरिए दिखाई 1857 की क्रांति में महिलाओं के योगदान की। संस्था की महासचिव डॉ सीमा मोदी जो इसकी किस्सागो भी हैं और निर्देशिका भी ने बताया कि उत्तर प्रदेश की माटी में संस्कृति भी है, संघर्ष भी है,और क्रांति भी। 1857 की पहली आजादी की चिंगारी इसी धरती से उठी थी। आज उसी स्मृति को जीवित रखने के लिए हमने किस्सागोई के माध्यम से ये ज्वाला जलाई है।
इतिहास जब किताबों में कैद हो जाता है, तो वह सिर्फ तारीख बनकर रह जाता है लेकिन जब वही इतिहास मंच पर सांस लेने लगता है, तो वह चेतना बन जाता है। यह मंचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और स्त्री-संघर्ष की परतों को उजागर करने वाला एक सशक्त सांस्कृतिक अनुभव है।आजादी की लड़ाई में बहुत सारे लोगों ने अपना बलिदान दिया। कुछ इतिहास के पन्नों में छप गए, तो कुछ छिप गए। उन्हीं में से एक थी अजीजन बाई। जो पेशे से तो थी तवायफ, लेकिन उनके हौसले और देशभक्ति के जज्बे ने उन्हें एक क्रांतिकारी बना दिया। एक ऐसा क्रांतिकारी जिससे अंग्रेजी हुकूमत भी थर-थर कांपती थी।
अजीजन की भूमिका निभाई आयुषी गुप्ता, तात्या टोपे कैफ अली खान, नाना साहब और हैवलॉक की भूमिका सत्यम सिंह राजपूत, क्रांतिकारी और सिपाही अन्वी श्रीवास्तव, मनु आनंद थी। म्यूजिक सुब्रत त्रिपाठी, प्रांजल ने दी। कॉस्ट्यूम अभिषेक शर्मा, लाइव सिंगिंग सौम्या आदित्री, संगीत संकलन अनवारूल हसन का रहा दास्तानगोई रंगकर्मी सीमा मोदी और सौम्या आदित्री ने की। लेखिका अरशाना अज्मत और संपूर्ण परिकल्पना एवं निर्देशन डॉ सीमा मोदी का रहा।
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मगहर महोत्सव में सृजन शक्ति वेलफेयर सोसाइटी लखनऊ ने किस्सागोई के जरिए दिखाई 1857 की क्रांति में महिलाओं के योगदान की। संस्था की महासचिव डॉ सीमा मोदी जो इसकी किस्सागो भी हैं और निर्देशिका भी ने बताया कि उत्तर प्रदेश की माटी में संस्कृति भी है, संघर्ष भी है,और क्रांति भी। 1857 की पहली आजादी की चिंगारी इसी धरती से उठी थी। आज उसी स्मृति को जीवित रखने के लिए हमने किस्सागोई के माध्यम से ये ज्वाला जलाई है।
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इतिहास जब किताबों में कैद हो जाता है, तो वह सिर्फ तारीख बनकर रह जाता है लेकिन जब वही इतिहास मंच पर सांस लेने लगता है, तो वह चेतना बन जाता है। यह मंचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और स्त्री-संघर्ष की परतों को उजागर करने वाला एक सशक्त सांस्कृतिक अनुभव है।आजादी की लड़ाई में बहुत सारे लोगों ने अपना बलिदान दिया। कुछ इतिहास के पन्नों में छप गए, तो कुछ छिप गए। उन्हीं में से एक थी अजीजन बाई। जो पेशे से तो थी तवायफ, लेकिन उनके हौसले और देशभक्ति के जज्बे ने उन्हें एक क्रांतिकारी बना दिया। एक ऐसा क्रांतिकारी जिससे अंग्रेजी हुकूमत भी थर-थर कांपती थी।
अजीजन की भूमिका निभाई आयुषी गुप्ता, तात्या टोपे कैफ अली खान, नाना साहब और हैवलॉक की भूमिका सत्यम सिंह राजपूत, क्रांतिकारी और सिपाही अन्वी श्रीवास्तव, मनु आनंद थी। म्यूजिक सुब्रत त्रिपाठी, प्रांजल ने दी। कॉस्ट्यूम अभिषेक शर्मा, लाइव सिंगिंग सौम्या आदित्री, संगीत संकलन अनवारूल हसन का रहा दास्तानगोई रंगकर्मी सीमा मोदी और सौम्या आदित्री ने की। लेखिका अरशाना अज्मत और संपूर्ण परिकल्पना एवं निर्देशन डॉ सीमा मोदी का रहा।
