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Sant Kabir Nagar News: 30 दिनों के भीतर दें मांगी गईं सूचनाएं
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सांथा विकास खंड के कॉलेज में कार्यक्रम को राज्य सूचना आयुक्त ने संबोधित
सांथा। विकास खंड के रामनरेश चौधरी कृषक विद्या मंदिर इंटर कॉलेज रमवापुर जनसूचना अधिकार अधिनियम के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य सूचना आयुक्त राकेश कुमार रहे।
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत नागरिकों को सूचना लेने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। जन सूचना अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि आवेदक द्वारा मांगी गई सूचनाएं 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। भारत के सर्वोच्च कानून में जन सूचना का अधिकार शामिल है। उन्होंने कहा कि सभी कार्यालयों में इसके लिए रजिस्टर रखा गया है, जिसमें आवेदन प्राप्ति और निस्तारण का विवरण क्रमवार और तिथिवार दर्ज किया जाता है। समय सीमा पूर्ण होने के अंदर सूचना न मिलने पर राज्य सूचना आयोग में आवेदन करना होता है। जहां लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ दंड का प्रावधान किया गया है। जहां से जुर्माना लगाकर समय से सूचना देने के लिए निर्देशित किया जाता है।
राज्य सूचना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अधूरी या भ्रामक सूचना देना कानूनन गलत है। उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकारी केवल अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सूचनाएं ही उपलब्ध करा सकते हैं। निजी संस्थानों से संबंधित जानकारी भी वहीं तक दी जा सकती है, जहां तक लोक प्राधिकरण की पहुंच हो।
उन्होंने यह भी बताया कि किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) से संबंधित सूचना देने से पूर्व संबंधित व्यक्ति की सहमति लेना आवश्यक है। यदि कोई अधिकारी सूचना देने में लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है। इस दौरान सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद आदि मौजूद रहे।
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सांथा। विकास खंड के रामनरेश चौधरी कृषक विद्या मंदिर इंटर कॉलेज रमवापुर जनसूचना अधिकार अधिनियम के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य सूचना आयुक्त राकेश कुमार रहे।
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत नागरिकों को सूचना लेने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। जन सूचना अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि आवेदक द्वारा मांगी गई सूचनाएं 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। भारत के सर्वोच्च कानून में जन सूचना का अधिकार शामिल है। उन्होंने कहा कि सभी कार्यालयों में इसके लिए रजिस्टर रखा गया है, जिसमें आवेदन प्राप्ति और निस्तारण का विवरण क्रमवार और तिथिवार दर्ज किया जाता है। समय सीमा पूर्ण होने के अंदर सूचना न मिलने पर राज्य सूचना आयोग में आवेदन करना होता है। जहां लापरवाही बरतने वाले कर्मियों के खिलाफ दंड का प्रावधान किया गया है। जहां से जुर्माना लगाकर समय से सूचना देने के लिए निर्देशित किया जाता है।
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राज्य सूचना आयुक्त ने स्पष्ट किया कि अधूरी या भ्रामक सूचना देना कानूनन गलत है। उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकारी केवल अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सूचनाएं ही उपलब्ध करा सकते हैं। निजी संस्थानों से संबंधित जानकारी भी वहीं तक दी जा सकती है, जहां तक लोक प्राधिकरण की पहुंच हो।
उन्होंने यह भी बताया कि किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) से संबंधित सूचना देने से पूर्व संबंधित व्यक्ति की सहमति लेना आवश्यक है। यदि कोई अधिकारी सूचना देने में लापरवाही करता है तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है। इस दौरान सांसद लक्ष्मीकांत उर्फ पप्पू निषाद आदि मौजूद रहे।