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Shahjahanpur News: सरकारी स्वास्थ्य सेवा के खराब हालात...197 के सापेक्ष केवल 57 चिकित्सक तैनात
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 19 Feb 2026 11:47 PM IST
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सबीना
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शाहजहांपुर। जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतरी हुईं हैं। मानक के अनुसार 197 डॉक्टर जिले में होने चाहिए, लेकिन केवल 57 कार्यरत हैं। गिनती के विशेषज्ञ डॉक्टर होने के चलते मरीजों को सरकारी अस्पतालों के बजाय निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है। नए डॉक्टर आ नहीं रहे, जबकि कई सेवारत चिकित्सक इस्तीफे दे चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अधीन जिले में 15 सीएचसी व 39 पीएचसी हैं। इनमें मरीजों के लिए ओपीडी के साथ भर्ती करने की सुविधा भी है। नियम के अनुसार, स्वास्थ्य इकाइयों पर 197 नियमित डॉक्टर होने चाहिए जबकि तैनाती मात्र 69 की है। इनमें भी पांच डॉक्टर लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे हैं। एक डॉक्टर पीजीआई में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं, जबकि छह डॉक्टर पीजी करने के लिए बाहर गए हुए हैं।
इस तरह स्वास्थ्य इकाइयों की जिम्मेदारी मात्र 57 डॉक्टरों के सहारे संचालित हो रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का भी काफी ज्यादा अभाव है। इस वजह से स्वास्थ्य इकाइयों पर आने वाले सभी बीमारियों के मरीजों का उपचार एक ही डॉक्टर को करना पड़ता है। अस्पतालों में सामान्य उपचार ही हो पा रहा है और गंभीर मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है, अन्यथा की स्थिति में मरीज निजी अस्पताल जाने को मजबूर हैं।
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सीएचसी पर विशेषज्ञ डॉक्टर का अभाव
-स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के कई बार विज्ञापन निकलने के बाद भी पदों पर भर्ती नहीं हो पाई है। पिछले वर्ष भी कई डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया था। इसके चलते स्थिति काफी खराब हो गई। जिले में 16 महिला रोग विशेषज्ञ होनी चाहिए, जबकि विभाग के पास मात्र दो डॉक्टर हैं। पांच एलएमओ (लेडी मेडिकल ऑफिसर) हैं। बाल रोग विशेषज्ञ के तीन पद स्वीकृत हैं, जबकि नियुक्ति मात्र एक की है। 15 सर्जन के सापेक्ष तीन कार्यरत हैं, इनमें दो गैरहाजिर चल रहे हैं। एकमात्र सर्जन डॉ. रामकुमार पुवायां सीएचसी में तैनात हैं। एनेस्थीसिया के 16 पदों के सापेक्ष तीन कार्यरत हैं, इनमें एक गंभीर रोग से जूझ रहे हैं। फिजिशियन भी 15 के सापेक्ष मात्र एक ही है।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ ने संभाली सीएमएस की कुर्सी, अटके दिव्यांग प्रमाणपत्र
-विभाग के पास एक मात्र हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.सरोज कुमार थे, जो अब सीएमएस बन गए हैं। पहले वह राजकीय मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देकर प्रत्येक सोमवार को दिव्यांग कैंप में आकर मरीजों की जांच कर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाते थे। उनके सीएमएस बनने के बाद दिव्यांग प्रमाणपत्र भी अटकने लगे हैं। ऐसे में विभाग ने मुख्यालय से हड्डी रोग विशेषज्ञ की मांग की है।
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वित्तीय वर्ष में 1673 सिजेरियन हुए
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास एक मात्र सर्जन होने के चलते मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो राजकीय मेडिकल कॉलेज और सीएचसी पर वित्तीय वर्ष में 1673 सर्जरी की गईं। इनमें मेडिकल कॉलेज की सर्जरी की संख्या ज्यादा है। सीएचसी पर जरूरत पड़ने पर सर्जन को बुलाकर सिजेरियरन कराया जाता है। किसी तरह व्यवस्था को चलाया जा रहा है। इसी तरह वित्तीय वर्ष में मेडिकल कॉलेज और सीएचसी-पीएचसी पर 34607 सामान्य प्रसव हुए हैं। स्वास्थ्य इकाइयों पर एलएमओ व स्टाफ नर्स के माध्यम से प्रसव कराए जाते हैं।
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फोटो 10
-सीएचसी पर बेटे अरशद की दवा लेने के लिए आए थे। यहां बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऐसे में निजी अस्पताल में बेटे का उपचार कराना पड़ेगा।
शबीना, मोहल्ला नजरपुर-तिलहर
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फोटो 11
-पैर में काफी दिक्कत थी। लग रहा है कि हड्डी में चोट लगी है। सीएचसी आने पर मेडिकल कॉलेज जाने की बात कह दी। अब निजी अस्पताल में उपचार कराएंगे।
रेहाना बी, मोहल्ला हिंदूपट्टी-तिलहर
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फोटो 12
-पेट में दर्द और बुखार की दिक्कत है। यहां पर कोई फिजिशियन नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टर के नहीं होने के चलते 40 किमी दूर मेडिकल कॉलेज जाना पड़ेगा।
राकेश कुमार, गांव कटैया उस्मानपुर, निगोही
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फोटो 13
-मां की दवा लेने के लिए सीएचसी पर आए थे। यहां पर डॉक्टर ने देखा है लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर को देखना चाहिए। इस वजह से राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है।
मनोज सिंह, ढकिया तिवारी-निगोही
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-स्वास्थ्य इकाइयों पर रिक्त पदों को भरने के लिए पत्राचार किया जा चुका है। चिकित्सकों की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों से बेहतर इलाज किया जाता है।
डॉ. विवेक कुमार मिश्रा, सीएमओ
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स्वास्थ्य विभाग के अधीन जिले में 15 सीएचसी व 39 पीएचसी हैं। इनमें मरीजों के लिए ओपीडी के साथ भर्ती करने की सुविधा भी है। नियम के अनुसार, स्वास्थ्य इकाइयों पर 197 नियमित डॉक्टर होने चाहिए जबकि तैनाती मात्र 69 की है। इनमें भी पांच डॉक्टर लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे हैं। एक डॉक्टर पीजीआई में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं, जबकि छह डॉक्टर पीजी करने के लिए बाहर गए हुए हैं।
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इस तरह स्वास्थ्य इकाइयों की जिम्मेदारी मात्र 57 डॉक्टरों के सहारे संचालित हो रही है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का भी काफी ज्यादा अभाव है। इस वजह से स्वास्थ्य इकाइयों पर आने वाले सभी बीमारियों के मरीजों का उपचार एक ही डॉक्टर को करना पड़ता है। अस्पतालों में सामान्य उपचार ही हो पा रहा है और गंभीर मरीजों को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है, अन्यथा की स्थिति में मरीज निजी अस्पताल जाने को मजबूर हैं।
सीएचसी पर विशेषज्ञ डॉक्टर का अभाव
-स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के कई बार विज्ञापन निकलने के बाद भी पदों पर भर्ती नहीं हो पाई है। पिछले वर्ष भी कई डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया था। इसके चलते स्थिति काफी खराब हो गई। जिले में 16 महिला रोग विशेषज्ञ होनी चाहिए, जबकि विभाग के पास मात्र दो डॉक्टर हैं। पांच एलएमओ (लेडी मेडिकल ऑफिसर) हैं। बाल रोग विशेषज्ञ के तीन पद स्वीकृत हैं, जबकि नियुक्ति मात्र एक की है। 15 सर्जन के सापेक्ष तीन कार्यरत हैं, इनमें दो गैरहाजिर चल रहे हैं। एकमात्र सर्जन डॉ. रामकुमार पुवायां सीएचसी में तैनात हैं। एनेस्थीसिया के 16 पदों के सापेक्ष तीन कार्यरत हैं, इनमें एक गंभीर रोग से जूझ रहे हैं। फिजिशियन भी 15 के सापेक्ष मात्र एक ही है।
हड्डी रोग विशेषज्ञ ने संभाली सीएमएस की कुर्सी, अटके दिव्यांग प्रमाणपत्र
-विभाग के पास एक मात्र हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ.सरोज कुमार थे, जो अब सीएमएस बन गए हैं। पहले वह राजकीय मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देकर प्रत्येक सोमवार को दिव्यांग कैंप में आकर मरीजों की जांच कर दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाते थे। उनके सीएमएस बनने के बाद दिव्यांग प्रमाणपत्र भी अटकने लगे हैं। ऐसे में विभाग ने मुख्यालय से हड्डी रोग विशेषज्ञ की मांग की है।
वित्तीय वर्ष में 1673 सिजेरियन हुए
जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास एक मात्र सर्जन होने के चलते मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो राजकीय मेडिकल कॉलेज और सीएचसी पर वित्तीय वर्ष में 1673 सर्जरी की गईं। इनमें मेडिकल कॉलेज की सर्जरी की संख्या ज्यादा है। सीएचसी पर जरूरत पड़ने पर सर्जन को बुलाकर सिजेरियरन कराया जाता है। किसी तरह व्यवस्था को चलाया जा रहा है। इसी तरह वित्तीय वर्ष में मेडिकल कॉलेज और सीएचसी-पीएचसी पर 34607 सामान्य प्रसव हुए हैं। स्वास्थ्य इकाइयों पर एलएमओ व स्टाफ नर्स के माध्यम से प्रसव कराए जाते हैं।
फोटो 10
-सीएचसी पर बेटे अरशद की दवा लेने के लिए आए थे। यहां बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। ऐसे में निजी अस्पताल में बेटे का उपचार कराना पड़ेगा।
शबीना, मोहल्ला नजरपुर-तिलहर
फोटो 11
-पैर में काफी दिक्कत थी। लग रहा है कि हड्डी में चोट लगी है। सीएचसी आने पर मेडिकल कॉलेज जाने की बात कह दी। अब निजी अस्पताल में उपचार कराएंगे।
रेहाना बी, मोहल्ला हिंदूपट्टी-तिलहर
फोटो 12
-पेट में दर्द और बुखार की दिक्कत है। यहां पर कोई फिजिशियन नहीं है। विशेषज्ञ डॉक्टर के नहीं होने के चलते 40 किमी दूर मेडिकल कॉलेज जाना पड़ेगा।
राकेश कुमार, गांव कटैया उस्मानपुर, निगोही
फोटो 13
-मां की दवा लेने के लिए सीएचसी पर आए थे। यहां पर डॉक्टर ने देखा है लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर को देखना चाहिए। इस वजह से राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है।
मनोज सिंह, ढकिया तिवारी-निगोही
-स्वास्थ्य इकाइयों पर रिक्त पदों को भरने के लिए पत्राचार किया जा चुका है। चिकित्सकों की कमी को पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों से बेहतर इलाज किया जाता है।
डॉ. विवेक कुमार मिश्रा, सीएमओ

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