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Shamli: कपड़ा गुम होने पर ट्रांसपोर्ट कंपनी पर 78,440 रुपये का जुर्माना, उपभोक्ता आयोग का आदेश

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 01 May 2026 04:30 PM IST
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सार

शामली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कपड़ा गुम होने के मामले में ट्रांसपोर्ट कंपनी यूनिवर्सल एक्सप्रेस सर्विसेज पर 78,440 रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने 45 दिन के भीतर भुगतान करने के आदेश दिए हैं।

Shamli Consumer Court: Transport Company Fined ₹78,440 for Losing Cloth Consignment
जिला उपभोक्ता फोरम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

शामली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कपड़ा गुम होने के मामले में ट्रांसपोर्ट कंपनी पर कड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने ट्रांसपोर्ट कंपनी को परिवादी को कुल 78,440 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

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80 हजार रुपये का कपड़ा नहीं पहुंचा
शहर के मोहल्ला नया बाजार निवासी विपिन कुमार ने छह सितंबर 2022 को ट्रांसपोर्ट कंपनी यूनिवर्सल एक्सप्रेस सर्विसेज (हेड ऑफिस मुखर्जी नगर, दिल्ली) के खिलाफ परिवाद दायर किया था। परिवादी के अनुसार उन्होंने दिल्ली के जोगियान नई सड़क स्थित पवन टेक्सटाइल से अपनी दुकान के लिए कपड़ा खरीदा था। सात अक्टूबर 2021 को करीब 80 हजार रुपये का यह माल ट्रांसपोर्ट के जरिए शामली स्थित आदर्श ट्रांसपोर्ट पर पहुंचना था, लेकिन माल कभी नहीं पहुंचा।
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कई बार शिकायत के बावजूद नहीं मिला समाधान
विपिन कुमार का कहना है कि उन्होंने कई बार कंपनी से संपर्क किया, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से सात अप्रैल और नौ मई 2022 को नोटिस भेजा।

पहले नोटिस के बाद कंपनी ने फोन पर जल्द माल या रुपये देने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में कोई कार्रवाई नहीं की। दूसरे नोटिस पर भी कंपनी ने जवाब में माल और रुपये देने से इनकार कर दिया।

 

आयोग ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई के बाद आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने ट्रांसपोर्ट कंपनी को आदेश दिया कि परिवादी को खरीदे गए माल की वास्तविक कीमत 28,440 रुपये अदा करें। इसके अलावा मानसिक, आर्थिक और सामाजिक क्षति के लिए 20 हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने के भी आदेश दिए गए।

25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
आयोग ने ट्रांसपोर्ट कंपनी द्वारा किए गए अनुचित व्यापार व्यवहार को देखते हुए 25 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड भी लगाया है, जो राजकोष में जमा कराया जाएगा। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 45 दिन के भीतर भुगतान करे, अन्यथा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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