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Siddharthnagar News: गैलन में नहीं मिल रहा डीजल, नर्सरी की सिंचाई प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 17 Jun 2026 12:42 AM IST
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तुलसियापुर/पकड़ी बाजार। डीजल और पेट्रोल की बिक्री को लेकर जारी नए दिशा-निर्देशों ने क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की नर्सरी के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण समय होने के बीच किसानों को पेट्रोल पंपों से गैलन और सामान्य डिब्बों में डीजल-पेट्रोल नहीं मिल रहा है। इससे खेतों की सिंचाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को जारी अधिसूचना में केवल वाहनों के टैंक अथवा पीईएसओ (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन) से अनुमोदित डिब्बों में ही डीजल-पेट्रोल देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद क्षेत्र के पेट्रोल पंप संचालक सामान्य डिब्बों और गैलनों में तेल देने से इंकार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय धान की नर्सरी को बचाने के लिए हर दूसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। अधिकांश किसान पंपिंग सेट और छोटे इंजनों के लिए पांच से दस लीटर डीजल या पेट्रोल लेकर जाते हैं। लेकिन पीईएसओ अनुमोदित डिब्बे स्थानीय बाजारों में उपलब्ध नहीं हैं और बड़े शहरों से महंगे दामों पर खरीदने पड़ेंगे।
किसानों का आरोप है कि वर्षों से सामान्य डिब्बों और गैलनों में तेल मिलता रहा है, लेकिन अचानक लागू हुए इस नियम से खेती-किसानी का कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने और नियम में आवश्यक राहत देने की मांग की है। शोहरतगढ़ के उपजिलाधिकारी कर्मेंद्र कुमार ने बताया कि शासन और मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराया जा रहा है।
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किसान बोले
धान की नर्सरी बचाने के लिए इस समय नियमित सिंचाई जरूरी है। ऐसे में डिब्बों में तेल न मिलने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। - राहुल शुक्ल
पंपिंग सेट को पेट्रोल पंप तक ले जाना संभव नहीं है। सरकार को किसानों की जरूरतों को देखते हुए इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए। - प्रेमचंद
दशकों से सामान्य गैलन और डिब्बों में तेल मिलता रहा है। अचानक नियम बदलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। - मो. हारून
सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन इस प्रकार के नियम किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। - डाॅ. अब्दुल कलाम
जानकारी के अनुसार पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 11 जून को जारी अधिसूचना में केवल वाहनों के टैंक अथवा पीईएसओ (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन) से अनुमोदित डिब्बों में ही डीजल-पेट्रोल देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद क्षेत्र के पेट्रोल पंप संचालक सामान्य डिब्बों और गैलनों में तेल देने से इंकार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय धान की नर्सरी को बचाने के लिए हर दूसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। अधिकांश किसान पंपिंग सेट और छोटे इंजनों के लिए पांच से दस लीटर डीजल या पेट्रोल लेकर जाते हैं। लेकिन पीईएसओ अनुमोदित डिब्बे स्थानीय बाजारों में उपलब्ध नहीं हैं और बड़े शहरों से महंगे दामों पर खरीदने पड़ेंगे।
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किसानों का आरोप है कि वर्षों से सामान्य डिब्बों और गैलनों में तेल मिलता रहा है, लेकिन अचानक लागू हुए इस नियम से खेती-किसानी का कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने और नियम में आवश्यक राहत देने की मांग की है। शोहरतगढ़ के उपजिलाधिकारी कर्मेंद्र कुमार ने बताया कि शासन और मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन कराया जा रहा है।
किसान बोले
धान की नर्सरी बचाने के लिए इस समय नियमित सिंचाई जरूरी है। ऐसे में डिब्बों में तेल न मिलने से किसानों को परेशानी उठानी पड़ रही है। - राहुल शुक्ल
पंपिंग सेट को पेट्रोल पंप तक ले जाना संभव नहीं है। सरकार को किसानों की जरूरतों को देखते हुए इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए। - प्रेमचंद
दशकों से सामान्य गैलन और डिब्बों में तेल मिलता रहा है। अचानक नियम बदलने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। - मो. हारून
सरकार किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन इस प्रकार के नियम किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। - डाॅ. अब्दुल कलाम