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Sultanpur News: अब हर गाटा देगा गवाही, खेत-खेत पहुंचेगी ई-पड़ताल की टीम

Sat, 01 Aug 2026 12:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर Updated Sat, 01 Aug 2026 12:12 AM IST
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Now, every land parcel will bear witness; the e-survey team will reach every single field
सुल्तानपुर। जिले में खेती का पूरा ब्योरा कागजों से निकलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होगा। 16 अगस्त से शुरू होने वाले ई-पड़ताल अभियान में कृषि विभाग की टीमें हर खेत तक पहुंचकर फसल का सत्यापन करेंगी। प्रत्येक गाटा संख्या पर खड़ी फसल की फोटो लेकर विभागीय एप पर अपलोड की जाएगी। इससे स्पष्ट हो जाएगा कि किस खेत में कौन सी फसल बोई गई है, कौन सा रकबा खाली है और वास्तविक खेती कितने क्षेत्रफल में हो रही है।
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जिले के 11,22,923 गाटों का डोर-टू-डोर डिजिटल सर्वे किया जाएगा। कई स्थानों पर फसल संबंधी विवरण मैनुअल रिपोर्ट के आधार पर तैयार होता था, लेकिन नई व्यवस्था में बिना मौके पर पहुंचे जानकारी दर्ज नहीं की जा सकेगी। विभाग का दावा है कि खेतों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और फसल संबंधी आंकड़ों में पारदर्शिता आएगी।
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ई-पड़ताल के बाद प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल क्षति का आकलन पहले से अधिक सटीक होगा। नुकसान का सत्यापन डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर होने से मुआवजा वितरण में गड़बड़ियों की संभावना कम होगी। वास्तविक खेती के आधार पर किसानों को मिलने वाली सरकारी योजनाओं का लाभ तय किया जाएगा। विभाग के अनुसार खेतों के सही रकबे और फसल का रिकॉर्ड उपलब्ध होने से खाद और बीज का आवंटन जरूरत के अनुसार किया जा सकेगा।
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कृषि अनुदान, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और अन्य योजनाओं में भी वास्तविक किसानों को प्राथमिकता मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि ई-पड़ताल से फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी और कृषि व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।



ई-पड़ताल से मिलेंगे ये बड़े फायदे
हर गाटा का डिजिटल फसल रिकॉर्ड तैयार होगा।
आपदा के बाद फसल क्षति का सटीक आकलन संभव होगा।
खाद, बीज और कृषि अनुदान का वितरण वास्तविक खेती के आधार पर होगा।
किसान क्रेडिट कार्ड सहित योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
गलत दावे और फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी।

ई पड़ताल अभियान होगा शुरू उप कृषि निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सभी चिह्नित गाटों का ई-पड़ताल अभियान शुरू होगा। प्रत्येक खेत पर पहुंचकर फसल का सत्यापन किया जाएगा। इससे कृषि संबंधी सभी योजनाओं का लाभ वास्तविक खेती करने वाले किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा।
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