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Sultanpur News: ओपीडी बनी इंतजार घर, इलाज कराने में छूटा पसीना
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दवा काउंटर पर लगी मरीजों व तीमारदारों की भीड़।
- फोटो : पार्क में टूटी पड़ी बाउंड्रीवॉल
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सुल्तानपुर। एक दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज की ओपीडी खुली तो हालात बेकाबू नजर आए। पुरुष अस्पताल में 2234 नए मरीजों ने पंजीयन कराया। परचा काउंटर से लेकर डॉक्टर कक्ष और दवा वितरण केंद्र तक हर जगह लंबी कतारें लगी रहीं। इलाज कराने आए मरीजों और तीमारदारों को घंटों इंतजार करना पड़ा।
सुबह नौ बजे ओपीडी शुरू होने से पहले ही परिसर में भीड़ उमड़ आई थी। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से मरीज सीढ़ियों और फर्श पर बैठे नजर आए। बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ी। दवा काउंटर पर एक घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ा। 10 बजे पहुंचे बुजुर्ग राम मनोहर दोपहर तक लाइन में खड़े रहे। रजनी बेटे को दिखाने आई थीं, लेकिन दवा के लिए लंबी कतार देखकर फर्श पर बैठ गईं। घुटने के दर्द से परेशान निर्मला ने कहा कि घंटों खड़े रहने से तकलीफ और बढ़ गई।
दिव्यांग शौचालय में ताला
मेडिकल कॉलेज परिसर में दिव्यांगों के लिए बना शौचालय बंद रहा। दिव्यांग मरीजों को अन्य शौचालय का सहारा लेना पड़ा, जहां शुल्क भी देना पड़ा।
सोमवार को बढ़ जाती है भीड़
प्राचार्य डॉ. प्रियांक वर्मा ने बताया कि रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को मरीजों की संख्या अधिक रही। पांच दवा काउंटर संचालित हैं, लेकिन भीड़ अधिक होने से दिक्कत हुई।
राहत के लिए इस पहल की जरूरत
अतिरिक्त अस्थायी काउंटर : सोमवार व छुट्टी के बाद के दिन परचा और दवा के अतिरिक्त काउंटर खोले जाएं।
टोकन प्रणाली लागू हो : डिजिटल या मैनुअल टोकन सिस्टम से धक्का-मुक्की और अनावश्यक भीड़ रोकी जा सकती है।
वरिष्ठ नागरिक व दिव्यांगों की अलग लाइन: बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग काउंटर या प्राथमिकता व्यवस्था हो।
बैठने की पर्याप्त व्यवस्था: बरामदे और परिसर में अतिरिक्त कुर्सियां लगाई जाएं।
ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा: पहले से पर्ची बनवाने की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू हो तो काउंटर पर दबाव कम होगा।
दिव्यांग शौचालय नियमित खुला रहे: इसके लिए संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी तय हो।
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सुबह नौ बजे ओपीडी शुरू होने से पहले ही परिसर में भीड़ उमड़ आई थी। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने से मरीज सीढ़ियों और फर्श पर बैठे नजर आए। बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ी। दवा काउंटर पर एक घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ा। 10 बजे पहुंचे बुजुर्ग राम मनोहर दोपहर तक लाइन में खड़े रहे। रजनी बेटे को दिखाने आई थीं, लेकिन दवा के लिए लंबी कतार देखकर फर्श पर बैठ गईं। घुटने के दर्द से परेशान निर्मला ने कहा कि घंटों खड़े रहने से तकलीफ और बढ़ गई।
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दिव्यांग शौचालय में ताला
मेडिकल कॉलेज परिसर में दिव्यांगों के लिए बना शौचालय बंद रहा। दिव्यांग मरीजों को अन्य शौचालय का सहारा लेना पड़ा, जहां शुल्क भी देना पड़ा।
सोमवार को बढ़ जाती है भीड़
प्राचार्य डॉ. प्रियांक वर्मा ने बताया कि रविवार की छुट्टी के बाद सोमवार को मरीजों की संख्या अधिक रही। पांच दवा काउंटर संचालित हैं, लेकिन भीड़ अधिक होने से दिक्कत हुई।
राहत के लिए इस पहल की जरूरत
अतिरिक्त अस्थायी काउंटर : सोमवार व छुट्टी के बाद के दिन परचा और दवा के अतिरिक्त काउंटर खोले जाएं।
टोकन प्रणाली लागू हो : डिजिटल या मैनुअल टोकन सिस्टम से धक्का-मुक्की और अनावश्यक भीड़ रोकी जा सकती है।
वरिष्ठ नागरिक व दिव्यांगों की अलग लाइन: बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग काउंटर या प्राथमिकता व्यवस्था हो।
बैठने की पर्याप्त व्यवस्था: बरामदे और परिसर में अतिरिक्त कुर्सियां लगाई जाएं।
ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा: पहले से पर्ची बनवाने की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू हो तो काउंटर पर दबाव कम होगा।
दिव्यांग शौचालय नियमित खुला रहे: इसके लिए संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी तय हो।
