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Unnao News: खड़गपुर आईआईटी के प्रोफेसर ने भी जांची एक्सप्रेसवे की बदहाली
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फोटो-25- किमी 63.5 पर सड़क का नमूना लेती एनआईटी टीम। संवाद
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उन्नाव। एनएचएआई की ओर से जांच के लिए नियुक्त किए गए आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी के नेतृत्व में पेवमेंट विशेषज्ञों की टीम भी शुक्रवार को विस्तृत तकनीकी जांच करने पहुंची। इस टीम को एक्सप्रेसवे के धंसने के कारणों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट में सुधार के उपाय भी बताएगी।
हालांकि शुरुआती जांच में सड़क की ऊपरी परत चटकने और जलनिकासी ठीक न होना बड़ी वजह के रूप में सामने आया है। प्रोफेसर और उनकी टीम ने शुक्रवार को बनी टोल के पास से निरीक्षण शुरू किया और दोनों लेन को देखा। इस दौरान सैंपल और एक्सप्रेसवे के डिजाइन के फोटो भी लिए। टीम सदस्यों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सड़क की ऊपरी परत में दरारें होना व उनसे पानी जाना और कई जगह जल निकासी की व्यवस्था ठीक न होना एक्सप्रेसवे के धंसने की वजह सामने आ रही है। सड़क के किनारों की मिट्टी को बहने से रोकने के लिए भी कोई ठोस काम नहीं हुए। बारिश में मिट्टी कटी और सीलन जाने से मिट्टी धंसी तो सड़क भी बैठ गई। हालांकि पूरी रिपोर्ट इसी महीने एनएचएआई को दे दी जाएगी।
देखते रहिए साल भर बाद भी यही स्थिति रहेगी
उन्नाव। तकनीकी जानकारों का साफ कहना है कि देखते रहिए सड़क की मरम्मत (पीसी) इसी तरह साल भर भी चलती रहेगी तभी भी समस्या रहेगी। पीएनसी के पूर्व इंजीनियर रवींद्र कुमार का कहना है कि एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड एरिया का डिजाइन ही गलत है। शुरुआत में ठेकेदार ने आपत्ति लगाई थी, तब एनएचएआई ने कहा कि नई डिजाइन है ठीक है, अमेरिकन डिजाइन है। अब वही समस्या सामने आ रही है। यह डिजाइन छोटे वाहनों के लिए है, इस 45 किलोमीटर हिस्से में छह से आठ मीटर तक मिट्टी की भरान हुई है। देखते रहिए एक साल तक इसी तरह सड़क तोड़कर बनाते रहेंगे। तब भी समस्या बनी रहेगी। सड़क पर कम से कम सड़क की कम से कम तीन परत बिछाई जाएं तभी टिकेगी, केवर एक पीसी पर सड़क टिकेगी ही नहीं। एनएचएआई ने सड़क बनने और पूरी जांच करने बाद ही निर्माण एजेंसी को एनओसी दी होगी। इसी के बाद लोकार्पण किया गया। अब सड़क धंस गई तो ठेका कंपनी पर जुर्माना और कार्रवाई की जाएगी। सबसे ज्यादा ऊंचाई नेवरना के पास है जहां पर गंगा एक्सप्रेसवे के ऊपर से यह एक्सप्रेसवे निकला है और बेहटा के ऊपर भी सबसे ज्यादा मिट्टी भरान है।
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यहां पर सबसे ज्यादा झटके
किलोमीटर संख्या- स्थान
36.8- कांथा नहर पुल
39.8 सरैंया गांव के सामने
40.6- बछौरा गांव के सामने
42.6-मेदपुर गांव के सामने
44.6-कुदिकापुर गांव के पास
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यहां-यहां धंसी और दब चुकी सड़क 5 अगस्त- किमी संख्या 63.9, 64.1 और 64.3 बेहटा गांव के पास सड़क धंसी।
4 अगस्त-लखनऊ जाने वाली लेन में किमी संख्या 37.3 के पास पानी के बहाव से बड़ा गड्ढा हो गया।
4 अगस्त-किमीटर संख्या 32.5 महनौरा गांव के सामने भी मिट्टी और नाली कटने से सड़क को भी नुकसान पहुंचा।
4-अगस्त- बेगमखेड़ा गांव के सामने किमीटर संख्या 30.6 पर 29 जुलाई को धंसी सड़क की मरम्मत के बाद पैचवर्क उखड़ा।
4 अगस्त-हसनापुर गांव के पास किमीसंख्या 29.6 के बीच सड़क दबने से नाली बन गईं।
4 अगस्त-बनी टोल से 500 मीटर पहले किमी संख्या 29.2 पर 200 मीटर दायरे में सड़क उखड़ने की शुरुआत।
4 अगस्त-लखनऊ से कानपुर की लेन पर किमी संख्या 45.8 रायपुर के पास और 33.9 सहरावां के पास मिट्टी कटने से सड़क को नुकसान।
3 अगस्त (रविवार रात) बेहटा गांव के पास किमी संख्या 65 से 65.2 तक 200 मीटर सड़क की तीनों लेन में धंस गईं। मरम्मत चल रही है।
3 अगस्त (रविवार रात) किमी संख्या 37.7 पर असोहा के कांथा गांव के पास भी कानपुर से लखनऊ की लेन में सड़क दस मीटर धंस गई है। मरम्मत का काम चल रहा है।
2 अगस्त को सदर तहसील के जगेथा गांव के पास किमी संख्या 48.9 से 48.5 के बीच चार सौ मीटर सड़क कई जगह दबी। मरम्मत अभी नहीं हुई है।
2 अगस्त को असोहा ब्लाक के बछौरा गांव के अंडरपास के निकट किमी संख्या 38.5 पर आठ मीटर सड़क टूटी, मरम्मत हुई।
1 अगस्त तूरी गांव के सामने किलोमीटर संख्या 46.5 से 46.6 के बीच भी सड़क दबने से नाली बन गईं। मरम्मत नहीं हुई है।
25 जुलाई को कोरारी गांव के सामने किमी संख्या 64.4 पर दस मीटर सड़क घंस गई थी, मरम्मत करने में तीन दिन लगे। पांच किमी में ट्रैफिक डायवर्जन रह था।
30 जुलाई को सहरावां गांव के पास किलोमीटर संख्या 30.8 पर सात मीटर सड़क घंसी, मरम्मत कराई गई।
29 जुलाई को असोहा ब्लॉक के बेगमखेड़ा गांव के सामने किमी संख्या 30.9 के पास 10 मीटर सड़क धंसी। मरम्मत में दो दिन लगे।
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हालांकि शुरुआती जांच में सड़क की ऊपरी परत चटकने और जलनिकासी ठीक न होना बड़ी वजह के रूप में सामने आया है। प्रोफेसर और उनकी टीम ने शुक्रवार को बनी टोल के पास से निरीक्षण शुरू किया और दोनों लेन को देखा। इस दौरान सैंपल और एक्सप्रेसवे के डिजाइन के फोटो भी लिए। टीम सदस्यों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सड़क की ऊपरी परत में दरारें होना व उनसे पानी जाना और कई जगह जल निकासी की व्यवस्था ठीक न होना एक्सप्रेसवे के धंसने की वजह सामने आ रही है। सड़क के किनारों की मिट्टी को बहने से रोकने के लिए भी कोई ठोस काम नहीं हुए। बारिश में मिट्टी कटी और सीलन जाने से मिट्टी धंसी तो सड़क भी बैठ गई। हालांकि पूरी रिपोर्ट इसी महीने एनएचएआई को दे दी जाएगी।
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देखते रहिए साल भर बाद भी यही स्थिति रहेगी
उन्नाव। तकनीकी जानकारों का साफ कहना है कि देखते रहिए सड़क की मरम्मत (पीसी) इसी तरह साल भर भी चलती रहेगी तभी भी समस्या रहेगी। पीएनसी के पूर्व इंजीनियर रवींद्र कुमार का कहना है कि एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड एरिया का डिजाइन ही गलत है। शुरुआत में ठेकेदार ने आपत्ति लगाई थी, तब एनएचएआई ने कहा कि नई डिजाइन है ठीक है, अमेरिकन डिजाइन है। अब वही समस्या सामने आ रही है। यह डिजाइन छोटे वाहनों के लिए है, इस 45 किलोमीटर हिस्से में छह से आठ मीटर तक मिट्टी की भरान हुई है। देखते रहिए एक साल तक इसी तरह सड़क तोड़कर बनाते रहेंगे। तब भी समस्या बनी रहेगी। सड़क पर कम से कम सड़क की कम से कम तीन परत बिछाई जाएं तभी टिकेगी, केवर एक पीसी पर सड़क टिकेगी ही नहीं। एनएचएआई ने सड़क बनने और पूरी जांच करने बाद ही निर्माण एजेंसी को एनओसी दी होगी। इसी के बाद लोकार्पण किया गया। अब सड़क धंस गई तो ठेका कंपनी पर जुर्माना और कार्रवाई की जाएगी। सबसे ज्यादा ऊंचाई नेवरना के पास है जहां पर गंगा एक्सप्रेसवे के ऊपर से यह एक्सप्रेसवे निकला है और बेहटा के ऊपर भी सबसे ज्यादा मिट्टी भरान है।
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यहां पर सबसे ज्यादा झटके
किलोमीटर संख्या- स्थान
36.8- कांथा नहर पुल
39.8 सरैंया गांव के सामने
40.6- बछौरा गांव के सामने
42.6-मेदपुर गांव के सामने
44.6-कुदिकापुर गांव के पास
यहां-यहां धंसी और दब चुकी सड़क 5 अगस्त- किमी संख्या 63.9, 64.1 और 64.3 बेहटा गांव के पास सड़क धंसी।
4 अगस्त-लखनऊ जाने वाली लेन में किमी संख्या 37.3 के पास पानी के बहाव से बड़ा गड्ढा हो गया।
4 अगस्त-किमीटर संख्या 32.5 महनौरा गांव के सामने भी मिट्टी और नाली कटने से सड़क को भी नुकसान पहुंचा।
4-अगस्त- बेगमखेड़ा गांव के सामने किमीटर संख्या 30.6 पर 29 जुलाई को धंसी सड़क की मरम्मत के बाद पैचवर्क उखड़ा।
4 अगस्त-हसनापुर गांव के पास किमीसंख्या 29.6 के बीच सड़क दबने से नाली बन गईं।
4 अगस्त-बनी टोल से 500 मीटर पहले किमी संख्या 29.2 पर 200 मीटर दायरे में सड़क उखड़ने की शुरुआत।
4 अगस्त-लखनऊ से कानपुर की लेन पर किमी संख्या 45.8 रायपुर के पास और 33.9 सहरावां के पास मिट्टी कटने से सड़क को नुकसान।
3 अगस्त (रविवार रात) बेहटा गांव के पास किमी संख्या 65 से 65.2 तक 200 मीटर सड़क की तीनों लेन में धंस गईं। मरम्मत चल रही है।
3 अगस्त (रविवार रात) किमी संख्या 37.7 पर असोहा के कांथा गांव के पास भी कानपुर से लखनऊ की लेन में सड़क दस मीटर धंस गई है। मरम्मत का काम चल रहा है।
2 अगस्त को सदर तहसील के जगेथा गांव के पास किमी संख्या 48.9 से 48.5 के बीच चार सौ मीटर सड़क कई जगह दबी। मरम्मत अभी नहीं हुई है।
2 अगस्त को असोहा ब्लाक के बछौरा गांव के अंडरपास के निकट किमी संख्या 38.5 पर आठ मीटर सड़क टूटी, मरम्मत हुई।
1 अगस्त तूरी गांव के सामने किलोमीटर संख्या 46.5 से 46.6 के बीच भी सड़क दबने से नाली बन गईं। मरम्मत नहीं हुई है।
25 जुलाई को कोरारी गांव के सामने किमी संख्या 64.4 पर दस मीटर सड़क घंस गई थी, मरम्मत करने में तीन दिन लगे। पांच किमी में ट्रैफिक डायवर्जन रह था।
30 जुलाई को सहरावां गांव के पास किलोमीटर संख्या 30.8 पर सात मीटर सड़क घंसी, मरम्मत कराई गई।
29 जुलाई को असोहा ब्लॉक के बेगमखेड़ा गांव के सामने किमी संख्या 30.9 के पास 10 मीटर सड़क धंसी। मरम्मत में दो दिन लगे।